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यूँ फंसी चक्कर में मैं

Yuun Fansi Chakker me Mai

दोस्तो, मेरा नाम सुलक्षणा है, 38 साल की गोरी चिट्टी खूबसूरत औरत हूँ, कद 5 फुट 6 इंच है, घने लंबे बाल हैं और बहुत ही अच्छा गदराया बदन है, जिस वजह से मेरी खूबसूरती में और भी चार चाँद लग जाते हैं।

आज आपको मैं अपनी कहानी सुनाती हूँ। बात 2 साल पहले की है, मेरा अपने पति से किसी वजह से तलाक हो चुका था और मैंने एक प्राइवेट कंपनी में जॉब कर ली।
जॉब अच्छी थी, अपना घर, अपनी कार तो मेरे पास पहले से ही थी, एक बेटी है जो स्कूल में पढ़ती है।
पति से अलग होने के बाद मैंने अपना सारा ध्यान अपने काम और घर में लगा दिया, खूब मन लगा कर मैं अपना काम कर रही थी।
ऑफिस का स्टाफ भी बहुत अच्छा था। यह बात अलग थी कि सब मेरी खूबसूरती पर फिदा थे और चोरी छुपे मेरे हुस्न को देखते थे। अपने हुस्न की तारीफ उनकी आँखों में पढ़ कर मुझे भी अच्छा लगता था। बहुत से लोगों ने मुझे लाइन दी मगर मैंने किसी की परवाह नहीं की, सिर्फ अपने काम पर ध्यान दिया।

एक बार किसी काम की वजह से बॉस को 15 दिन के लिए बाहर जाना पड़ा तो उन्होंने मुझे उनकी जगह काम करने को कहा।
मुझे थोड़ा अजीब लगा कि यह मेहरबानी कुछ ज़्यादा ही है, मगर मुझे अपने आप को साबित करने का मौका मिल रहा था, मैंने हाँ कर दी।

बॉस के जाने के बाद मैंने बहुत ही दिल लगा कर काम किया, बड़े ही सोच समझ कर फैसले लिए।
जब बॉस वापिस आए तो मैंने उन्हें अपने काम की सारी रिपोर्ट दी, बॉस बहुत खुश हुये, उन्होंने मुझे शाबाशी दी।

वैसे मेरे बॉस मुझसे ज़्यादा बड़े नहीं थी, बस 48-49 साल के होंगे, पसंद वो भी मुझे करते थे, मगर कभी उन्होंने मुझे गलत निगाह से नहीं देखा।
मगर हमारी कंपनी का जो लीगल अडवाइज़र है न, कुणाल वो हमेशा मुझे खा जाने वाली नज़रों से देखता था। वो अक्सर बॉस के कमरे में बैठा रहता और जब कभी भी मैं या ऑफिस की कोई और लड़की बॉस के केबिन में जाती, वो सबको बहुत घूरता था।

ऐसे ही एक दिन मैं किसी काम से बॉस के केबिन में गई, तो कुणाल भी वहीं बैठा था। यूँ ही बातों बातों में कुणाल ने मुझ पर तंज़ कसा कि जब किसी को पावर मिल जाती है न, तो वो उसका गलत इस्तेमाल करने से बाज़ नहीं आता।

मुझे उसकी बात बड़ी अजीब लगी और समझ में भी नहीं आई, मैं चुपचाप बाहर आ गई।

अगले दिन सुबह जब मैं ऑफिस पहुंची तो मुझे तभी बॉस ने बुला लिया।
मैं उनके केबिन में गई, उस वक़्त कुणाल भी वहीं बैठा था, दोनों बहुत सी फाइलें और रजिस्टर खोल कर बैठे थे, जैसे कोई हिसाब किताब लगा रहे हों।
मैंने जाकर बॉस और कुणाल दोनों को गुड मॉर्निंग कहा और उनके पास ही खड़ी होकर देखने लगी कि वे क्या कर रहे हैं।

बॉस ने मुझे बैठने को कहा, मेरे साथ वो दोनों भी अपनी अपनी जगह पे बैठ गए।
बॉस ने मुझे बताया कि उनके जाने के बाद मैंने जो 15 दिन उनका काम संभाला था उस दौरान, दो बिज़नस डील्स में करीब साढ़े छः लाख की घपलेबाज़ी हुई है।

मेरे तो पैरों तले से ज़मीन निकल गई, मैंने उनके सारे पेपर चेक किए, और जब मैंने सारा हिसाब लगा कर देखा तो करीब साढ़े छः लाख रुपये गायब थे, चेक के बजाए मैंने ही कैश पैसे देने को कहा था, और पेमेंट नहीं हुई थी।
अब इतने पैसे तो मेरे पास भी नहीं थे कि मैं अपनी जेब से दे देती, मगर असल बात यह थी, मेरी नौकरी भी तो जाती थी।

मैं तो परेशान हो गई, मैंने हर डीटेल को चेक किया। मगर हर तरफ से घपलेबाजी का इशारा मेरी तरफ ही हो रहा था। मैंने बॉस से बात की कि अब इसका क्या हल हो सकता है?
बॉस ने कुणाल की तरफ देखा।
वो बोला- वही हम भी सोच रहे हैं, आप हमारी कंपनी कि एक मेहनती और ईमानदार एम्प्लोयी हैं, आप पर हमें पूरा विश्वास है, मगर जो हुआ है, उसका भी हल निकालना है और हम आपको भी नहीं खोना चाहते, न ही यह चाहते हैं कि आपके घर पुलिस आए।

पुलिस का नाम सुन कर तो मैं सच में डर गई, और मेरे डर को शायद कुणाल ने भाँप लिया। वो उठ कर मेरे पास आया और बड़े ही शालीन तरीके से मेरे पास बैठ गया और बोला- आप ऐसा करो, अच्छे से याद करो और बताओ कि आपने वो पैसे किसको दिये थे, क्योंकि सेफ की चाबी आपके ही पास थी।

मगर मैंने पैसे दिये नहीं थे तो पैसे कैसे निकल गए, वो भी बंद सेफ से। मैं बहुत परेशान थी, मैं अपना सर पकड़ कर बैठ गई, कुणाल ने मेरे कंधे पे हाथ रखा और तसल्ली देने लगा।
परेशानी और डर की वजह से मैं रोने लगी।
कुनाल ने मुझे चुप करवाया और अपनी सीट पे जा कर बैठने को कहा।

मैं अपने केबिन में आ गई। थोड़ी देर बाद जब कुछ संभली तो ऑफिस का प्यून मेरे पास आया। मुझे पानी दिया पीने को और बोला- मैडम जी, एक बात कहूँ?
मैंने कहा- कहो!
वो बोला- यह जो आपके साथ हो रहा है न, यह कोई नई बात नहीं है। आपसे पहले भी ऐसे हो चुका है।
‘मतलब?’ मैंने पूछा।
वो बोला- ये जो कुणाल बाबू हैं न, सब कुछ इनकी ही चाल है, खुद ही घपला करवा देते हैं और फिर खूबसूरत लड़कियों को अपने जाल में फंसा लेते हैं।

मैं समझ गई कि मैं कुणाल के जाल में फंसी हूँ। अब मैं सिर्फ यह देखना चाहती थी कि वो मुझसे क्या चाहता है, बात तो साफ थी कि उसकी गंदी नज़र मुझ पर थी।

दो दिन बाद मैं अपने केबिन में बैठी थी और घर जाने से पहले अपना सामान समेट रही थी, तभी मेरा मोबाइल बजा।
मैंने देखा कुणाल का फोन था, मैंने हैलो कहा तो वो उधर से बोला- बात ऐसी है कि आज शाम को मेरी मीटिंग अपने एक बहुत ही सीनियर वकील से है, जिससे मैं आपका केस डिस्कस करने वाला हूँ, प्रशांतजी (मेरे बॉस) भी वहीं होंगे, अगर आपकी ज़रूरत पड़ी तो मैं आपको बुला लूँगा, क्या आप आएंगी?

मेरे पास और क्या चारा था, मैंने कहा- जी आ जाऊँगी, कितने बजे आना है?
वो बोला- शाम 7 बजे की मीटिंग है, याद रखिएगा।

मैं घर जाते वक़्त यही सोच रही थी कि कुणाल मुझसे क्या चाहता है, यह बात तो साफ थी कि उसकी मुझ पर गंदी निगाह थी, मगर अगर उसने कुछ उल्टी सुल्टी डिमांड रख दी तो क्या मैं उसकी बात मान पाऊँगी।
मैं बहुत कुछ सोच रही थी, अगर पैसे देने पड़े, अगर मुझे नौकरी से निकाल दिया गया, और अगर कुणाल ने मुझे कोई अनुचित मांग मानने को कहा तो?

घर आ कर मैं सबसे पहले नहाई, और नहाते नहाते मैंने सोच लिया कि यह नौकरी मुझे नहीं खोनी, यह सिर्फ एक नौकरी नहीं, मेरी पहचान है, चाहे कुछ भी हो जाये, मैं उनकी हर बात मान जाऊँगी, बस नौकरी नहीं जानी चाहिए।

मैंने अपने बगल के बाल साफ किए, यही नहीं अपनी कमर के नीचे के बाल (झांट) भी बिल्कुल साफ कर दिए, सारी बॉडी पे लोशन लगाया।

करीब 7 बजे फिर से फोन आया, और कुणाल बोला- हैलो, सुलक्षणा जी, वकील साहब से टाइम मिल गया है, क्या आप अभी आ सकती हैं?
मैंने पूछा- कहाँ आना है?
वो बोला- होटल सन बीम में, हम आपका इंतज़ार कर रहे हैं।

मैंने फोन काटा, कपड़े बदले, बेशक मेरे बूब्स बड़े हैं, फिर भी पैड वाली ब्रा पहनी के थोड़े और भरे भरे बूब्स लगे, हल्के सी ग्रीन कलर की साटिन की साड़ी पहनी, बढ़िया सा मेकअप किया ताकि और हॉट लगूँ।
शीशे में देखा, बहुत ही धांसू लग रही थी।

गाड़ी लेकर मैं होटल पहुंची, कुणाल मुझे गेट पे ही मिल गया, वो मुझे ऊपर पाँचवी मंज़िल पे अपने रूम में ले गया।
उस वक़्त 8 बज रहे थे।
जब मैं रूम में एंटर हुई तो देखा वहाँ तो बस प्रशांतजी और कुणाल ही थे।
मेरे पूछने से पहले ही कुणाल ने कह दिया- वो वकील साहब से सारी बात डिस्कस हो चुकी है, उन्हें जल्दी जाना था, अब सिर्फ आपसे पूछना है।

मैं जाकर सोफ़े पे बैठ गई, प्रशांतजी भी बैठे थे, कुणाल ने एक ड्रिंक बनाई और मुझे दी।
मुझे अपने आप में थोड़ी बहादुरी, थोड़ी दिलेरी पैदा करने के लिए, ड्रिंक ज़रूरी थी, मैंने एक ही बार सारी ड्रिंक पी ली और कुणाल से
कहा- वन मोर प्लीज़!
वो झट से एक और ड्रिंक बना लाया।
मैंने गिलास हाथ में पकड़ा और पूछा- जी अब बताइये क्या चाहते हैं आप?
मेरी टोन बता रही थी कि मैं सब कुछ करने को तैयार हूँ, अब सिर्फ उन्होंने अपने अंदर के जानवर को बाहर निकालना था।

बात कुणाल ने ही शुरू की, थोड़ा इधर उधर घुमा कर वो बोला- अगर आपको हमारी इच्छा पूरी करने में कोई दिक्कत न हो, तो सब कुछ वैसा ही हो जाएगा, जैसे पहले था।
‘क्या इच्छा है आपकी?’ मैंने पूछा।
‘एक मर्द को एक खूबसूरत औरत से क्या चाहिए!’ वो बोला।
‘मेरे पास न तो देने के लिए इतने पैसे हैं, और न ही मैं यह नौकरी खोना चाहती हूँ।’ कह कर मैं उठी और बालकनी के पास जा
कर खड़ी हो गई।

कुणाल मेरे पीछे आकर खड़ा हो गया, उसने अपने दोनों हाथ मेरे कंधों पे रखे, मैं चुपचाप खड़ी रही, उसने अपने एक हाथ से मेरे बाल मेरे कंधे से हटाये और मेरे कंधे का जो हिस्सा मेरे ब्लाउज़ से बाहर था, वहाँ पे अपने होंठो से चूम किया।
मेरे कंधे से एक बिजली की लहर दौड़ी जो मेरे दोनों बूब्स से होते हुये, मेरी योनि में सनसनाहट पैदा करती हुई मेरे पाँव तक गई।
करीब दो बरस बाद मुझे किसी मर्द ने इस तरह से छुआ था।

मैंने कुछ प्रीतिक्रिया नहीं की, तो कुणाल ने मुझे अपनी बाहों में भर लिया- तुम जानती हो सुलक्षणा, मैंने जब से तुम्हें देखा है, मैं तो तुम्हारा दीवाना हुआ पड़ा हूँ, तुम बेहद खूबसूरत हो।
कहते कहते उसने अपना हाथ मेरे पेट पे फेरा।
मगर किसी मर्द के छूने भर के एहसास से मेरे अंदर तो हलचल मच गई थी, मैंने अपना सिर पीछे को गिराया और उसके कंधे पे टिका दिया और अपनी आँखें बंद कर ली।

कुणाल ने अपने दोनों हाथ ऊपर लेजा कर मेरे दोनों बूब्स को पकड़ लिया और बड़े आहिस्ता आहिस्ता से दबाये। जब मैंने फिर भी कोई प्रीतिक्रिया नहीं की तो कुणाल ने मेरा हाथ पकड़ा और वापिस सोफ़े के पास ले गया।
मैं खड़ी रही, कुणाल ने मेरे कंधे से मेरा ब्रोच खोला, साड़ी का पल्लू बड़े आराम से नीचे गिरा दिया। आज पहले बार ऐसा हुआ था कि मेरा पल्लू मेरे बॉस के सामने नीचे गिरा था।

प्रशांत जी भी जो बैठे देख रहे थे, गिलास रख कर उठ कर आए और मेरे सामने खड़े हो गए।
मैंने अपनी आखें बंद ही रखी।
कुणाल अपनी कमर पीछे से मेरे हिप्स पे लगा के खड़ा था और मुझे एहसास हो रहा था कि उसका लण्ड मेरे हिप्स के बीच में घिस रहा था।
पहले प्रशांतजी ने मेरे दोनों बूब्स अपने हाथ में पकड़े, उन्हे दबाया, और मेरे ब्लाउज़ में से बाहर दिख रहे मेरे क्लीवेज को चूमा, और अपनी जीभ से चाटा।

मैं चुपचाप खड़ी उन मर्दो की करतूतें देख रही थी। फिर प्रशांतजी ने मेरी साड़ी की चुन्नट एक एक करके खोली और मेरी साड़ी उतार कर सोफ़े पर फेंक दी।
कुणाल ने मुझे गोद में उठा लिया और बेड पे ले गया, मुझे प्यार से बेड पे लिटाया, प्रशांतजी ने मेरे सेंडिल उतारे और सेंडिल उतार कर मेरे पाँव चूमे, मेरे पाँव की उँगलियों और अँगूठों को मुँह में लेकर चूसा।
वो मेरे पाँव के अंगूठे चूस रहे थे और झंझनाहट मेरी योनि में हो रही थी। मुझे लगा जैसे मेरी योनि गीली हो गई है।

इतनी देर में कुणाल ने अपने सारे कपड़े उतार दिये, सिर्फ एक चड्डी को छोड़ कर। मगर उसकी चड्डी में भी उसका तना हुआ लण्ड साफ दिख रहा था।
वो मेरी बगल में आ कर लेट गया और अपने हाथों से उसने मेरे ब्लाउज़ के बटन खोले और मेरा ब्लाउज़ उतार दिया। मेरी ब्रा में से मेरा बड़ा सा क्लीवेज दिख रहा था, जिस पर दोनों ने हाथ फिरा कर देखा।

उधर प्रशांतजी ने अपने हाथों से पहले मेरा पेटीकोट मेरे घुटनो तक उठाया, मेरी टाँगो को पाँव से लेकर घुटनों तक चूमते चाटते वो घुटनों तक आ गए।
जब उन्होंने देखा कि कुणाल मेरे होंठ चूस रहा है और सिर्फ एक चड्डी में हैं, उन्होंने भी अपने कपड़े उतार दिये।

कुणाल ने मेरा चेहरा अपनी तरफ घुमाया और मेरे गालों को चूमा और फिर अपने होंठ मेरे होंठों पे रख दिये।उसने मेरे होंठ चूसे, मैंने उसका साथ दिया, मैंने भी उसके होंठ चूसे।

दो साल बाद मैं किसी पुरुष से सेक्स करने जा रही थी, नही तो अपने पति से तलाक के बाद जब कभी भी दिल किया, अपने हाथों से ही अपनी सेक्स की भूख शांत कर लेती थी, मगर आज तो दो दो मर्द मुझे भोगने को तैयार खड़े थे, मेरी तरफ से पूरी सहयोग मिलता देख उनके भी होंसले बढ़ गए थे।

बेहद शांत रहने वाले प्रशांतजी ने मेरी पेंटी उतारी और मेरी टाँगें खोल कर अपना मुँह मेरी चूत से लगा दिया और सबसे पहले मेरी
चूत को अपने दाँतों से काट खाया।
मैं सिहर गई, मगर दोनों मर्दों को जोश चढ़ गया था।

कुणाल ने मेरी ब्रा ऐसे खींच कर उतारी कि उसके दोनों स्ट्रैप ही टूट गए, मेरी दोनों छातियों अपने सख्त हाथों में पकड़ के कुणाल ने मसल दिया, मेरे मुख से दर्द से चीख निकल गई।
उसके बाद वो बदहवासों की तरफ मेरी छातियों को नोचने लगा, कभी दबाता, कभी निचोड़ता, कभी काटता।

जितना आनन्द मुझे प्रशांतजी से अपनी चूत चटवा कर आ रहा था उतना ही दर्द मुझे कुणाल मेरी छातियों को मसल कर दे रहा था। उसके दबाने से मेरी दोनों छातियाँ लाल हो गई थी।
उसने अपनी चड्डी उतार दी और मैंने उसका करीब 6 इंच का मोटा काला लण्ड हवा में लहराता दिखा। फिर वो मेरी छाती पर आ बैठा और उसने अपना लण्ड मेरे होठों से लगा दिया, मैंने उसका लण्ड अपने मुँह में ले लिया और चूसना शुरू कर दिया।
मैं तो सिर्फ उसका लण्ड चूसना चाहती थी, मगर उसने तो अपनी कमर चला कर मेरा मुख चोदन शुरू कर दिया।
एक दो बार तो ऐसा लगा जैसे मुझे उल्टी हो जाएगी, इतनी ज़ोर से उसका लण्ड मेरे गले के अंदर जा कर लगा।

प्रशांतजी के चाटने से मेरी चूत पानी पानी हो रही थी।
थोड़ी देर चाटने के बाद प्रशांतजी ने मेरी चूत पे अपना लण्ड रखा और अंदर ठेल दिया।
अब मेरे दोनों मुख लण्ड से भरे पड़े थे और दोनों में चुदाई हो रही थी।

करीब 5 मिनट की डबल चुदाई के बाद दोनों ने अपनी अपनी जगह बदल ली, अब प्रशांतजी मुझे लण्ड चुसवा रहे थे और कुणाल मुझे चोद रहा था।
मगर प्रशांतजी बड़े प्यार से मेरा ख्याल रखते हुये मुझे लण्ड चुसवा रहे थे और मैं भी पूरा मन लगा कर उनका लण्ड चूस रही थी।
कुणाल मेरी चूत को भी बेदर्दी से चोद रहा था, शायद इसी वजह से मैं झड़ गई, जबर्दस्ती की चुदाई में मैं जल्दी स्खलित हो जाती हूँ। स्खलित होते वक़्त जो मैं कसमसाई, उसी कारण प्रशांतजी का भी वीर्यपात मेरे मुख में ही हो गया।

मैंने उनकी आँखों में देखा, उन्होंने अपना सिर हिला कर मुझे इशारा किया कि ‘पी जाओ’ और मैं उनका सारा वीर्य अंदर निगल गई।
झड़ने के बाद प्रशांत जी मेरी बगल में ही लेट गए, उन्होंने दो सिगरेट सुलगाई और एक मुझे दे दी।
हम दोनों सिगरेट पीने लगे।
इसी दौरान, कुणाल ने भी अपनी मर्दांगी के रस से मेरी चूत को सरोबार कर दिया।
वो मेरे ऊपर ही लेट गया और मेरी ही सिगरेट लेकर पीने लगा।

‘जानती हो सुलक्षणा, जिस दिन तुम्हें पहली बार देखा था, मेरा तभी तुम पे मन आ गया था और मैंने यह सोच लिया था कि एक न एक दिन तुम्हें ज़रूर अपना बनाऊँगा।’ कुणाल बोला।
‘और उसके लिए चाहे मुझ पर झूठा केस ही क्यों न बनाना पड़े?’ मैंने कहा।

‘अरे!’ कह कर वो हंस दिया- अब क्या बताऊँ, तुम हो ही इतनी हसीन कि प्रशांत भी तुम्हें हर हाल में हासिल करना चाहता था।
‘सच में?’ मैंने पूछा- अगर प्रशांतजी कहते तो इनके लिए तो मेरी हमेशा से हाँ थी।’ मैंने कहा।
इस बार हम तीनों हंस पड़े।

उस रात उन दोनों मर्दों ने मुझे तीन तीन बार चोदा। सुबह 6 बजे मैं घर वापिस आई।
और उसके बाद मैं आज कंपनी की मैनेजर हूँ। एक पते की बात बताती हूँ आपको, सेंटर (चूत) की सिफ़ारिश के आगे सब फेल है।
alberto62lopez@yahoo.in

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