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रंगीली बहनों की चूत चुदाई का मज़ा -5

Rangili Bahanon Ki Chut Chudai Ka Maza-Part 5

अब तक आपने मेरी पिछली कहानी मे   रंगीली बहनों की चूत चुदाई का मज़ा -4  पढ़ा..
सोनाली और सुरभि- तो हम लोगों ने जो कुछ किया.. वो सब इसमें रेकॉर्ड हो गया होगा?
मैं- हाँ सब कुछ..
सोनाली और सुरभि- जरा दिखाओ तो..
मैं- ओके.. ये लो..

मैंने वीडियो प्ले कर दिया।
सोनाली और सुरभि- यह तो लग रहा है कोई लाइव इंडियन पॉर्न चल रहा है।
मैं- और तुम दोनों पॉर्न स्टार की तरह..
सोनाली और सुरभि- हाँ लग तो रहा है।

मैंने आँख मारते हुए कहा- तो क्या अपलोड कर दूँ नेट पर? फेमस हो जाओगी..
अब आगे..

सोनाली और सुरभि- नहीं.. नहीं होना फेमस.. और हाँ इसको अभी डिलीट करो.. किसी को दिखना नहीं चाहिए।
मैं- ओके कर दूँगा..
सोनाली और सुरभि- ओके.. चलो ना कुछ शॉपिंग करने चलते हैं।
मैं- हाँ चलो किसी मॉल में चलते हैं।
सोनाली और सुरभि- ओके।

हम लोग रेडी हुए और एक मॉल में पहुँच गए और कुछ ड्रेस खरीदने के बाद लेडीज फ्लोर पर गए.. तो वहाँ बहुत सारी हॉट ड्रेस भरी पड़ी थीं.. तो मैंने उन दोनों को सजेस्ट किया.. तो दोनों ने अपने-अपने साइज़ के हिसाब से कुछ कपड़े ले लिए।
उनको ये सब इतने अधिक पसंद आए थे कि उन दोनों ने मिल कर लगभग 22 जोड़े ब्रा-पैन्टी खरीद लिए थे।

हम लोग घूमते रहे खूब मस्ती की और घर आ गए.. तो सोनाली ने अपने बैग से एक पैकेट निकाला.. उसमें रबर के 6 सैट लंड के थे।
मैं- ये क्यों लिए?
सोनाली- रात को पता चलेगा।
मैं- ओके।

उसके बाद दोनों ने सारे ड्रेस पहन कर मुझे दिखाए और जब रात हो गई तो खाना आदि खाने के बाद हम लोग रेस्ट करने लगे।
कुछ देर रेस्ट करने के बाद दोनों कपड़े उतार कर मेरे कमरे में आ गईं, मेरी जरा आँख लग गई थी.. तो दोनों ने मुझे उठाया।
मैं बोला- मेरे जिस्म में दर्द हो रहा है।
तो दोनों मेरे सारे कपड़े उतार दिए और अपनी चूचियों को तेल में डुबो कर मेरे बदन पर घुमाने लगीं।

मैं ये चूचियों से मसाज करना पॉर्न मूवी में देख चुका था.. लेकिन आज पहली बार मेरे साथ भी यही हो रही थी।
अब तो दोनों की चूचियों भी बड़ी और सख्त हो चुकी हैं.. मेरे मिलने से पहले छोटी-छोटी टेनिस की गेंद जैसे आकार की थीं। लेकिन मेरे मिलने के बाद तो फुटबाल सी हो गई हैं तो मसाज भी बड़ी आसानी से हो रही थी और मुझे मजा भी आ रहा था।

फिर मैं पीछे को मुड़ गया.. तो दोनों अपने हाथों और चूचियों से मेरी पीठ पर मसाज देने लगीं और मसाज के बहाने मेरे पूरे शरीर में तेल लग गया था।

दीदी ने सोनाली के चूतड़ों पर तेल लगाया और मेरे पीठ पर बिठा कर आगे को धकेल दिया.. तेल के कारण फिसलन होने के कारण वो सीधे मेरे सिर के पास आ कर रुकी। फिर तो दोनों इसी तरह आगे-पीछे करते हुए मेरी पीठ की मालिश करती रहीं और मैं चूतड़ों की इस मसाज का मजा लेता रहा।

कुछ देर मसाज का मजा देने के बाद दोनों सामने झुक कर गाण्ड हिलने लगीं.. एक तो तेल लगने के बाद गाण्ड वैसे ही खूबसूरत दिख रही थी और हिलने के बाद तो और भी कयामत लग रही थी।

अब मुझसे कंट्रोल नहीं हुआ और मैं भी उठ गया.. दोनों में ज्यादा सेक्सी दीदी की गाण्ड लग रही थी.. सो मैंने दीदी को गोद में उठाया और उसकी चूत के पास लंड सटा कर झटके मारने लगा।

तभी मैंने देखा की सोनाली भी रबर के लंड को पहन कर आ गई। मैं ये देख कर समझ गया कि इसका क्या इस्तेमाल होगा। मैं उसको देख कर मुस्कुरा दिया।
सोनाली- दीदी ने एक साथ दो लंड का मजा नहीं लिया है.. सो आज उसका मन पूरा कर देती हूँ।
मैं- हाँ कर दो।

सुरभि- क्या करने वाले हो तुम दोनों?
सोनाली और मैं- कुछ नहीं.. बस देखती जाओ.. आगे-आगे होता है क्या?

मैं नीचे लेट गया और दीदी को अपने ऊपर लिटा लिया और चूत में लंड डाल दिया और अन्दर-बाहर करने लगा।

उसकी गाण्ड का छेद सोनाली के सामने थी.. सो सोनाली ने उसकी गाण्ड के मुँह पर लंड रखा.. और झटका मारना चाहा.. लेकिन वो फिसल कर बाहर आ गया।

उसे अभी नकली लौड़े से गाण्ड मारने का अनुभव नहीं था ना.. सो मैं रुक गया सोनाली के उस रबर वाले लंड को पकड़ कर दीदी की गाण्ड के छेद के पास ले गया। मैंने इशारा किया और तभी सोनाली ने झटका मारा.. तो लंड सीधा गाण्ड में घुस गया.. रबर का ये लौड़ा मेरे लौड़े से बहुत पतला लंड था। तब भी दीदी की आह्ह.. निकल गई।

अब हम दोनों साथ झटके मारने लगे और दीदी भी 2 लंड एक साथ ले कर मजे ले रही थी।
कुछ देर ऐसे चुदाई करने के बाद मैं दीदी की दोनों टाँगों के बीच आ गया और दोनों टाँगों को कंधे पर रख कर झटके मारने लगा।

फिर कुछ देर बाद मैंने दीदी को बिस्तर पर लिटा दिया और उसके ऊपर लेट गया लंड को चूत में पेल कर दीदी को चुम्बन करने लगा।

तभी सोनाली मेरे चूतड़ों पर फिर से तेल लगाने लगी और लगाते-लगाते ही वो मेरी गाण्ड में उंगली घुसेड़ने लगी.. तो मैं उसको हटाने लगा।

तो दीदी ने मुझे पकड़ लिया और सोनाली अपना रबर वाला लंड मेरी गाण्ड में डालने लगी.. वो पेन जितना पतला था। उसने पूरा अन्दर डाल दिया और मेरे ऊपर लेट गई.. तो मैंने उसको हटा दिया।

अब मैंने दीदी को छोड़ कर सोनाली को उल्टा किया और उसकी गाण्ड के छेद पर अपना लंड लगा कर एक ही झटके में पूरा गाण्ड की जड़ तक अन्दर पेल दिया.. और जोरदार झटका मारने लगा।

सोनाली कराह उठी..

गाण्ड चुदाई के बीच-बीच में मैं उसके चूतड़ों पर भी चपत मारने लगा। कुछ देर बाद चूतड़ों को छोड़ कर उसकी चूचियों को मसलने लगा और पीछे से गाण्ड में झटके मारता रहा। मैंने सोनाली को तब तक नहीं छोड़ा.. जब तक मैं झड़ नहीं गया और झड़ कर हम तीनों बिस्तर पर एक साथ लेट गए।

सुरभि- क्या बात है आज सोनाली की जबरदस्त चुदाई हो गई।
सोनाली- आप को भी तो आज मजा आया होगा.. एक साथ दो लंड लिए हैं।
सुरभि- हाँ बहुत मजा आया।

मैं- सोनाली को तो एक साथ दो लंड खाने का अच्छा ख़ासा अनुभव है।
सुरभि- क्या सच में?
मैं- उसी से पूछ लो.. बताओ सोनाली।
सोनाली- हाँ..
सुरभि- कब और किसके साथ?

तो मैंने और सोनाली ने मिल कर पूरी कहानी बता दी.. लेकिन अगर आपको यह बात जाननी है कि सोनाली ने कब दो लंड से चुदाई का मजा लिया.. तो पिछले भागों को पढ़िए।

सोनाली- दीदी आप भी लेना चाहोगी क्या?
सुरभि- नहीं बाबा..
सोनाली- ओ के!

सुरभि- और तुम भी छोड़ दो.. घर में रहने तक ये सब ठीक है.. लेकिन घर से बाहर नहीं लेना.. कल को किसी को पता चल गया.. तो बदनामी होगी।
सोनाली- नहीं पता चलेगा..
सुरभि- क्यों नहीं पता चलेगा? कहीं उससे झगड़ा हुआ और उसने सबको बता दिया तो?
सोनाली- नहीं ना बताएगा..
सुरभि- क्यों नहीं बताएगा।

सोनाली- क्योंकि सुशान्त उसकी दोनों बहनों को चोद चुका है।
सुरभि- क्या सच में?
सोनाली- उसी से पूछ लो.. बताओ सुशान्त..
मैं- हाँ दीदी।
सुरभि- अरे ये लंड है कि क्या है.. किसी को नहीं छोड़ा है क्या?

मैं- क्या करूँ.. मैं तो सम्भल जाऊँगा.. लेकिन ये लंड है कि मानता ही नहीं है। जो मुझे पसंद आ जाती है.. यह लंड अपना रास्ता खुद ही ढूँढ लेता है।
सोनाली- अब तक कोई ऐसी लड़की है.. जिसके पीछे तू पड़ा हो.. लेकिन वो नहीं पटी हो तुमसे?
मैं- हाँ हैं ना.. बहुत हैं.. लेकिन उनमें से एक है.. जिसके पीछे मैं पिछले 3 साल से पड़ा हुआ हूँ.. लेकिन लाइन ही नहीं दे रही है।
सुरभि- कौन है?
मैं- साधना मेम.. मेरे कॉलेज में टीचर हैं.. पिछले 3 साल से उनके लिए तड़फ रहा हूँ.. लेकिन साली की चूत अब तक मिली नहीं है।

सुरभि और सोनाली- मिल जाएगी.. जल्दी ही.. मुझे पूरा भरोसा है।
मैं- क्या बात है.. इतना भरोसा है मुझ पर?
सुरभि और सोनाली- हाँ क्योंकि जो लड़का अपनी सग़ी बहन को नहीं छोड़ता है.. वो हरामी अपनी टीचर को क्या छोड़ेगा।
मैंने हँसते हुए- हाँ यह बात भी सही है.. वैसे तुम दोनों अब मेरी बहन नहीं हो..
सुरभि और सोनाली- हाँ हमें भी भाई बोलते हुए अच्छा नहीं लगता।

मैं- हाँ आज से मैं दीदी और छोटी नहीं बोलूँगा.. आज से सुरभि को बड़ी बीवी और सोनाली को छोटी बीवी बोलूँगा।
सुरभि और सोनाली- ओके.. और हम दोनों तुमको पतिदेव।

मैं- हाँ लेकिन सिर्फ़ हम लोगों के बीच ही.. बाहर जैसे हम लोग एक-दूसरे से जैसे बात करते थे.. वैसे ही बात करेंगे।
सुरभि और सोनाली- ओके मेरे पतिदेव।
मैं- अच्छा मेरी दोनों बीवियों.. अब हमें सोना चाहिए..

दोनों मेरी बाँहों में नंगी ही सो गईं.. जब मैं सुबह उठा.. तो देखा बिस्तर पर मैं अकेला सोया हुआ हूँ। मैं मन ही मन सोचने लगा कि मेरी दोनों बीवियाँ कहाँ हैं।

तभी मुझे सामने से मेरी बड़ी बीवी आती हुई दिखी।

उसके बाद क्या हुआ.. जानने के लिए इंतज़ार करें मेरी अगली कहानी का।
मुझे ईमेल करते रहें.. मुझे आपके ईमेल का इंतज़ार रहेगा। अगर आपके ज्यादा ईमेल नहीं आए.. तो इसके बाद इसके और पार्ट सेंड नहीं करूँगा और समझूँगा कि आप लोग बोर हो गए हैं। अगर ईमेल आया तो आगे के भाग लिखूंगा।
shusantchandan@gmail.com

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