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पहला पहला प्यार, पहली चुदाई

Pahla Pahla Pyar, Pahli Chudai

दोस्तो, अन्तर्वासना पर यह मेरी फर्स्ट टाइम सेक्स स्टोरी है. सबसे पहले मैं अपने बारे में बता दूँ, मेरा नाम राज है और मैं जयपुर का रहने वाला हूँ. मेरी हाइट 5 फुट 11 इंच है तथा मैं फेयर कलर वाला अच्छा दिखने वाला एक आकर्षक बन्दा हूँ.

मैं उन्हें धन्यवाद कहना चाहूंगा जिन्होंने अन्तर्वासना जैसे पोर्टल का सृजन करके लोगों को एक मंच दिया कि वो अपनी आपबीती को कहानी के रूप में कह सकें. मैं भी आज इसी मंच से आपको अपनी सच्ची कहानी बताने जा रहा हूँ.

यह बात कुछ साल पहले की है. मैं अपने घर वालों के साथ रहता था. हमने जयपुर में एक नया घर किराये पर लिया था. मैं वहां पर नया था.. किसी को जानता नहीं था.

उन दिनों गर्मियों के दिन थे तो बस पूरा दिन घर पर रहना और शाम को थोड़ी देर छत पर टहलना, ऐसे ही मेरे दिन निकल रहे थे.

मैं थोड़ा अंतर्मुखी किस्म का बन्दा हूँ तो मुझे लोगों के साथ घुलने मिलने में थोड़ा वक्त लगता है. सारा दिन अकेले टाइमपास करने की एक वजह ये भी थी.

मैं शाम को कभी कभी मंदिर चला जाता हूँ. मंदिर के सामने ही कॉलोनी का पार्क है. एक दिन मंदिर गया तो मुझे पार्क में ही अपनी कहानी की हीरोइन दिख गई.. उसका नाम काम्या था.

दोस्तो, क्या बताऊँ जब मैंने उसे देखा तो देखता ही रह गया, कितनी खूबसूरत थी वो, मैं शब्दों में बयां नहीं कर सकता. काम्या का फिगर एकदम परफेक्ट, दूध सी गोरी.. बहुत ही खूबसूरत दिख रही थी. उसका फिगर 36-24-35 का था. अब आप लोग अंदाज़ा लगा सकते हैं कि वो कितनी खूबसूरत थी.

मुझे तो वो एकदम हीरोइन लग रही थी. काफी देर तक तो मैं उसे वहीं खड़ा खड़ा देखता रहा. फिर मुझे कुछ होश आया कि मैं कहाँ हूँ. मंदिर में कॉलोनी के सभी लोग आते जाते रहते हैं, कोई उसे घूरते हुए मुझे देख लेगा, तो क्या सोचेगा.

यही सब सोचकर मैं वहाँ से पार्क के अन्दर चला गया.

पार्क में वो अकेली ही इयरफोन लगा के घूम रही थी तो मैंने सोचा कि चल कर इससे बात की जाए. पर सच बताऊँ दोस्तो, उसके पास जाने की मेरी हिम्मत ही नहीं हुई, बात करना तो बहुत दूर की बात है.
एक बार मैं हिम्मत जुटा कर उसके करीब चला गया था, पर बिना कुछ बोले वापस घूम कर अपनी जगह आ गया.

कुछ देर बाद वो चली गई और मैं भी अपने घर आ गया. घर आकर मैं सोचने लगा कि मुझे उससे बात कर लेनी चाहिए थी. मैं मन ही मन में खुद को कोस रहा था. खैर.. फिर मैंने सोचा कि पार्क में तो वो आती ही होगी तो जान पहचान तो कर ही लेंगे, आज नहीं तो कल सही.

अगले दिन मैं फिर से पार्क में गया और शाम को 2-3 घंटे वहीं बैठा रहा. आज मैं पक्का इरादा करके आया था कि आज तो उससे बात करके ही रहूँगा, चाहे कुछ भी हो जाए. पर वो उस दिन पार्क में आई ही नहीं.

मैं ऐसे ही 5-6 दिन तक पार्क में रोज़ नियम से जाता रहा, इस उम्मीद में कि शायद वो दिख जाए, पर वो नहीं दिखी.

पार्क में जाने के चक्कर में सारा कुछ गड़बड़ हो रहा था, घर वाले बोलते कि आजकल तेरा ध्यान कहां रहता है, कहाँ खोया रहता है. मैं उन्हें कैसे बताता कि मैं कहां खोया रहता हूँ.
मैं सारा दिन यही सोचता रहता कि उस दिन उससे बात कर ली होती तो अच्छा होता.

अब मैंने पार्क में जाना छोड़ दिया था. मैंने सोच लिया था कि हवा का झोंका था, जो आया और चला गया. मैं भी कहाँ पागल हो रहा हूँ. यही सोचकर मन को समझा लिया. अब बस फिर से वही पुरानी दिनचर्या शुरू हो गई, रोज़ दिन भर घर पर और शाम को छत पर.

पर कहते हैं न कि कस्तूरी हिरन की नाभि के अन्दर ही रहती है और वो उसे पूरे ज़माने में ढूंढता फिरता है, कुछ ऐसा ही मेरे साथ भी था.

काम्या मेरे पीछे ही एक मकान छोड़ कर रहती थी और मुझे ये तब पता चला, जब मैंने एक दिन शाम को उसे छत पर देखा. मेरी छत से उसकी छत पर बड़े आराम से जाया जा सकता था.

एक बार तो मुझे मेरी आँखों पर ही भरोसा नहीं हुआ यार, मैं जिसे ढूंढने के लिए पार्क में जाया करता था, वो तो मेरे पास ही रहती थी. बस फिर क्या था,पार्क में जाना बंद और छत पर चढ़ना शुरू.

मैं रोज़ छत पर चढ़ा रहता और उसे देखता रहता. बस अब मौके का इंतज़ार था कि कब मौका मिले और कब मैं उससे कुछ बात करूँ.

उसके बाद वो कई बार शाम को छत पर नहीं दिखती थी तो मैं पार्क में चला जाता था और वो वहीं बैठी मिल जाती थी.

उसने भी मुझे नोटिस करना शुरू कर दिया था. कई बार मैं किसी और तरफ देखते हुए अचानक से उसकी तरफ नज़र घुमाता था, तो वो मेरी तरफ देखती रहती थी, पर मेरे देखते ही दूसरी तरफ नज़र घुमा लेती थी.
मैं समझ गया था कि पसंद तो ये भी करती है मुझे, पर ऐसे एक दूसरे को देखते रहने से कुछ नहीं होने वाला है, बात तो आगे बढ़ानी ही पड़ेगी.

पहले मैं पोर्न देख देख कर लंड हिलाया करता था और अब उसके बारे में सोच कर हिला लेता था.

ऐसे देखते ही देखते करीब एक महीना निकल गया. मैंने सोच लिया था ऐसे कुछ नहीं होने वाला. इसकी चूत चाहिए तो बात को आगे बढ़ाना ही पड़ेगा.

एक दिन वो छत पर नहीं थी, मैं समझ गया कि पार्क में होगी. मैं पार्क में चला गया. आज मैं पक्का इरादा करके गया था कि बात करनी ही है.

पार्क में देखा तो वो एक तरफ बैठी किसी से फोन पर बात कर रही थी. मैंने सोचा इसकी बात पूरी होने दो, फिर इसके पास चलेंगे.

जैसे ही उसने कॉल काटा, मैं उसके पास चला गया, मैंने उसे हाय बोला.
तो उसने मेरी तरफ देखा और हाय बोल nकर, जिस बेंच पर वो बैठी थी, उस पर एक तरफ खिसक गई और बोली- बैठो.

मैं बड़ा खुश हुआ कि यार लड़की अपने पास बैठने को बोल रही है. मेरे मन में लड्डू फूट रहे थे, पर थोड़ा नर्वस भी था.

लेकिन बस एक बार बात शुरू हो गई, फिर क्या था. फिर तो बातें होती ही गईं. हम उस दिन वहाँ करीब 3 घंटे तक बैठे बैठे बातें ही करते रहे.

अब तो ये रोज़ का नियम सा हो गया था. शाम को पार्क में जाना और घंटों तक एक-दूसरे से बातें करते रहना.

मुझे पता तो लग गया था कि ये भी मुझे पसंद करती है, बस आई लव यू बोलना था. मुझे पता था ये मान जाएगी.

मैंने उसका नम्बर ले लिया था, तो रोज़ पार्क में बातें होतीं और फिर पार्क से जाने के बाद घर पर भी फोन पर चैटिंग और बातें चलती रहती थीं.

आखिर मैंने उसे एक दिन प्रपोज़ कर ही दिया.

मैंने प्रपोज़ करने के लिए 1 अप्रैल का दिन चुना कि ये मान गई तो ठीक है वरना बोल दूंगा कि अप्रैल फूल बनाया.

जब हम पार्क में मिले तो मैंने उसे आई लव यू बोल दिया. मेरे बोलते ही वो कुछ नहीं बोली, बस मुझे 2 सेकंड तक घूरा और बिना कुछ कहे जल्दी जल्दी चली गई.

मैंने सोचा साला ये तो गड़बड़ हो गई. मैं भी उसके पीछे पीछे भागा, पर वो कुछ नहीं बोली, बस चली गई.

मेरी तो फट के हाथ में आ गई, मैंने सोचा साला ये मैंने क्या कर दिया.

पर मेरे पास बैकअप प्लान भी था. मैंने सोच लिया कि मानी तो है नहीं, अब तो बस अप्रैल फूल बनाया, ये बोलना है.

दोस्तो, मैं आपको ये बताना चाहूंगा कि इस कहानी की एक एक लाइन सच्ची है. कुछ भी झूठ नहीं है. मेरे साथ जो कुछ भी हुआ, उसे में वैसा का वैसा लिखने की कोशिश कर रहा हूँ.

अब तो मेरे आई लव यू बोलते ही वो वहाँ से वापस चली गई थी. तो मैं भी घर आकर छत पे चला गया. मैंने उसे कई मैसेज किए, कॉल किया पर किसी का जवाब नहीं दिया.

मैंने सोच लिया था कि अब कुछ नहीं हो सकता. मैं वापस नीचे आ गया और सोचने लगा कि साला मैंने खुद ही सब बिगाड़ दिया. पर आई लव यू तो बोलना ही था. ऐसे बात कर करके तो वैसे भी चूत नहीं मिलने वाली थी.

रात को करीब 11-30 पर उसका मैसेज आया कि छत पर आ जाओ.

भाइयो, मैं सच बता रहा हूँ.. मैं छत की तरफ ऐसे भागा, बिल्कुल सुपरमैन की तरह. छत पर जाकर देखा तो काम्या छत पर खड़ी थी.
मैंने कहा- तुम यहाँ क्या कर रही हो कोई देख लेगा.
उसने कुछ नहीं बोला, बस मुझे अपनी ओर खींचा और मेरे होंठों पे अपने होंठ रख दिए.

दोस्तो, वो मेरा पहला किस था और आप जानते हो पहली बार किस की तो बात ही कुछ और होती है, चाहे वो पहला किस हो या पहला सेक्स या पहला कुछ और.. पहली बार की फीलिंग हमेशा स्पेशल रहती है.
मैं उसके होंठों में ही कहीं खो गया था. मैं भी उसे पागलों की तरह किस कर रहा था.

हम दोनों किस करते हुए करीब 5 मिनट तक एक दूसरे में खोये रहे. फिर मुझे ध्यान आया कि हम छत पर हैं और कोई भी हमें किस करते हुए देख सकता है.
यह ध्यान आने के बाद मैं उससे अलग हुआ. वो बहुत ही यादगार किस था दोस्तों.

उसने मुझे कहा- आई लव यू टू पागल.. मैं यही इंतज़ार कर रही थी कि कब तुम कहोगे. मुझे लगा कि तुम वैलेंटाइन पर कहोगे, पर तुमने तब भी कुछ नहीं कहा तो मैं मायूस सी हो गई थी. और अब जाकर तुमने आज कहा.
जब मैंने उसे बताया कि अगर तुम हाँ नहीं कहती तो मैं बोल देता कि अप्रैल फूल बनाया, तो वो बहुत हँसी.

बस फिर तो ये रोज़ का हो गया था. अब हमने पार्क में जाना बंद कर दिया था. रोज़ फोन पर ही बातें होती और रात को छत पर मिलते और चुम्मा चाटी करते रहते.

अब तो लंड महाराज काम्या की चूत के अन्दर जाने के लिए बड़े बेचैन हो रहे थे. लेकिन जैसा कि मैंने आपको बताया कि पहली बार की फीलिंग ही अलग होती है, तो मैं अपना पहला सेक्स ऐसे ही जल्दबाज़ी में नहीं करना चाहता था.
मैं चाहता था कि पहला सेक्स यादगार हो, बस इसीलिए मैं इंतज़ार कर रहा था कि कब मौका मिले और मैं मौके पे चौका मारूँ.

फिर आखिर मौका मिल भी गया. मेरे परिवार में शादी थी, सब घरवाले वहां जा रहे थे और साथ ही कॉलोनी के मंदिर में नई मूर्ति की स्थापना भी हो रही थी. तो मूर्ति स्थापना की वजह से 2 दिन तक कॉलोनी में कार्यक्रम ही कार्यक्रम थे.

मुझे तो कोई चिंता थी ही नहीं क्योंकि मेरे घर पर कोई नहीं था, पर मंदिर के कार्यक्रम की वजह से काम्या को भी बाहर जाने का बहाना मिल गया था.

वैसे उसके घर वाले मॉडर्न ख़यालात वाले थे और वो काम्या के कहीं भी आने जाने पर कोई रोक नहीं लगाते थे. लेकिन मंदिर के कार्यक्रम से उसे एक और बहाना मिल गया था.. और टाइम भी खूब मिल गया था. जिससे हम आराम से चुदाई कार्यक्रम पूरा कर सकते थे.

मैं तो सोच सोच कर ही बहुत एक्साइटेड हो रहा था कि मैं पहली बार सेक्स करने जा रहा हूँ.

वो मेरा पहली बार था इसलिए मुझे सब कुछ आज भी वैसा का वैसा याद है और वैसा ही लिखने की कोशिश कर रहा हूँ.

मैंने उसे सुबह 11 बजे के आस पास आने को बोल दिया था. क्योंकि कॉलोनी में सभी आस पास में रहने वाले लोग 11 बजे तक ऑफिस निकल जाते हैं. तो कोई उसे आते हुए देख ले, ये चांस बिल्कुल नहीं था. उस समय तक उसके घरवाले भी ऑफिस चले जाते थे.

वो ठीक 11 बजे आ गई थी. दोस्तो, वो क्या कयामत लग रही थी, मैं बता नहीं सकता. मैं आपको पहले ही बता चुका हूँ कि वो कितनी खूबसूरत थी. आज तो जीन्स और स्लीवलेस टॉप में तो उसकी खूबसूरती बिल्कुल बाहर निकल कर भागी जा रही थी. सच में वो उस दिन बहुत खूबसूरत लग रही थी.

मैंने उसे अन्दर खींच लिया और दरवाज़ा लगा कर मैं उसको वहीं पागलों की तरह चूमने लगा. उसके होंठों में गज़ब का नशा था यारों.
हम काफी देर तक वही खड़े खड़े किस ही करते रहे. फिर वो बोली कि आगे भी कुछ करना है या यहीं खड़े खड़े किस ही करते रहोगे.
मैंने कहा- हाँ मेरी जान, आज तो बहुत कुछ करना है.

हम दोनों अन्दर आ गए थे.

उसने अन्दर आकर घर के म्यूजिक सिस्टम पर कोई गाना लगा दिया और बड़े ही कामुक अंदाज़ में गाने के साथ साथ डांस करते हुए एक एक करके अपने कपड़े उतारने लगी. बिल्कुल वैसे, जैसा हमने फिल्मों में देखा है.

एक तो वो वैसे ही बिल्कुल कातिल लग रही थी और ऊपर से मेरा पहली बार था तो मैं तो सेक्स के लिए मरा जा रहा था. ऊपर से उसने ये सब करना शुरू कर दिया था. मेरा लंड तो खतरनाक टन्ना रहा था. मैंने लंड में इतना तनाव आज से पहले कभी महसूस नहीं किया था. मुझे लग रहा था कि आज तो लंड पेंट ही फाड़ देगा.

काम्या का सेक्सी शो चालू था, वो एक एक करके बड़े कामुक अंदाज़ में अपने कपड़े उतारती जा रही थी. आखिर में वो ब्रा पैंटी में आ गई और सीधा मेरे ऊपर आ गई.

मैं बेड पर चित्त लेता था और वो मेरे ऊपर चढ़ी थी. एक बार फिर से हम एक दूसरे को पागलों की तरह चूम रहे थे. मैंने उसके मम्मों को अपनी छाती से मसलना शुरू कर दिया था. वो एकदम से गरम हो गई और मुझे देखते हुए मेरे नीचे को सरकने लगी.

उसने मेरी शर्ट उतार दी और पेंट खोल कर लंड को मुँह में ले लिया और बहुत अनुभवी खिलाड़ी की तरह मुँह में लंड लेकर गपागप लॉलीपॉप की तरह चूसने लगी.

लंड चुसाई के साथ में उसकी मादक आवाज़ें माहौल को और अधिक कामुक बना रही थीं.

मैं तो अपनी हालत शब्दों में बयां नहीं कर सकता. वो लंड को मुँह में लेकर टोपे पर जीभ से हरकत करती, तो मैं तो समझो मर ही जाता था. मुझे उसके लंड चूसने के तरीके और हाव भाव से पता चल गया था कि ये साली उतनी शरीफ है नहीं, जितनी शकल से दिखती है.

एक तो पहला सेक्स था और ऊपर से उसने इस तरीके से चूसा कि मैं कुछ ही मिनट में झड़ गया.
वो मेरा पूरा माल चाट गई.

अब मैं उसके ऊपर आ गया और वो मेरे नीचे थी. मैं उसके पूरे बदन को पागलों की तरह चूमने और चाटने लगा. मुँह और गले पर चूमते चूमते मैं उसकी ब्रा पर आ गया. उसके बड़े बड़े मम्मे ब्रा से बाहर निकल रहे थे. मैं उसके मम्मों को ब्रा के ऊपर से ही चूसने लगा और मुँह में भरने लगा. वो बस मज़े मज़े में सिसकारियाँ लेती जा रही थी “उम्म्ह… अहह… हय… याह…”

ऊपर ऊपर से चूसने के बाद मैंने उसकी ब्रा को खोलना चाहा.. पर मुझसे उसकी ब्रा का हुक नहीं खुला तो उसने खुद अपनी ब्रा खोल कर अपने दोनों सफ़ेद कबूतरों को आज़ाद कर दिया.
मैं तो उसे देखता ही रह गया. पहली बार मैं किसी लड़की को ऐसे असलियत में ऐसे देख रहा था और वो भी इतनी हॉट लड़की को.

उसके मम्मे तो कमाल के थे. मेरा मन कर रहा था कि इन्हें पूरा का पूरा मुँह में भर लूँ. एकदम परफेक्ट साइज़ के तने हुए मम्मे थे, जिन पर छोटे छोटे गुलाबी निप्पल तो क़यामत ही ढा रहे थे.
मैं तो मम्मों को देखते ही पागल हो उठा और उन्हें पागलों की तरह दबाने काटने और चूसने लगा. उसके मम्मे चूस चूस के मैंने एकदम लाल कर दिए.

मम्मों को चूसने के बाद मैं उसके पेट और नाभि को चूमते हुए उसकी पेंटी तक आ गया. एक झटके में मैंने उसकी पेंटी खींच कर निकाल दी; मुझे जन्नत में ले जाने वाली चीज़ मेरी आँखों के सामने थी. एकदम क्लीन शेव्ड गुलाबी चूत.. एक भी बाल नहीं था.

मैंने उसकी तरफ सवालिया नजरों से देखा तो उसने बताया कि आज ही नहाते टाइम साफ़ की है.

मैं तो पागलों की तरह उसकी चूत पर टूट पड़ा. मैं उसकी चूत को चूसने लगा. उसकी चूत के दाने को मुँह में लेकर उस पर जीभ से हरकत करने लगा. वो ज़ोर ज़ोर की सिसकारियाँ लेती हुई कामुक आज़ज़ें निकाल रही थी.

चूंकि घर में कोई नहीं था और म्यूजिक भी चल रहा था तो वो कुछ ज़्यादा ही खुल कर आवाज़ें निकाल रही थी. पूरा कमरा उसकी मादक सिसकारियों से गूंज रहा था.

कभी कभी तो उसकी आह आह आह की आवाज़ें म्यूजिक की बीट्स से मैच हो जाती थीं तो दोनों एक साथ चलती थीं और गज़ब का मादक माहौल बन जाता था.

मैं उसकी चूत को इस तरह से चूस रहा था कि जैसे चूत से सब कुछ अभी चूस कर बाहर निकाल दूंगा. वो थोड़ी ही देर में ज़ोर ज़ोर से उम्म्म आअह्ह आअह्ह्ह की आवाजें निकलने लगी. मैं समझ गया कि अब ये झड़ने वाली है. मैं और ज़ोर ज़ोर से उसकी चूत चूसने लगा.

वो मेरे सर को अपनी चूत पर दबाने लगी और थोड़ी ही देर में ज़ोर ज़ोर से आवाज़ें करती हुई झड़ गई.

हमने फोरप्ले में ही काफी टाइम निकाल दिया था. हालाँकि अभी हमारे पास काफी टाइम था, तो ज़ल्दबाज़ी करने की कोई ज़रूरत नहीं थी. मैं सब कुछ बड़े आराम से मज़े ले लेकर करना चाहता था.

मैं उसकी चूत में दो उंगली डाल कर ज़ोर से अन्दर बाहर करने लगा.. जिससे वो फिर से गरम हो गई और जल्दी से लंड डालने के लिए बोलने लगी.

पर मैं उसे तड़पा तड़पा कर चोदना चाहता था. जैसे ही मुझे लगा कि अब ये उंगली से ही मज़े ले रही है, मैंने उंगली निकाल ली और चूत के मुँह पर लंड लगा दिया. पर मैंने लंड को चुत के अन्दर नहीं डाला. मैं उसकी चूत पर ऊपर दाने पर लंड का टोपा लगा कर चूत की दरार में ऊपर से नीचे तक ले जाने लगा. फिर नीचे से ऊपर रगड़ने लगा.

मैं ऐसे ही करता रहा तो वो बहुत ज़्यादा तड़प गई. मैं उसे तड़पा तड़पा कर उस चरम बिंदु तक ले जाना चाहता था, जहाँ पर लंड डालने पर उसे सेक्स का असली मज़ा आए.

लेकिन अब काम्या बहुत ज़्यादा तड़प गई थी और गालियां देने लगी थी- डाल मादरचोद, अन्दर डाल बहनचोद… डालता क्यों नहीं है.. क्यों तड़पा रहा है भोसड़ी के.
मैंने हंसते हुए अपने लंड को चूत पर लगाया और धीरे धीरे पूरा अन्दर और बाहर करने लगा. लेकिन मैं बिल्कुल धीरे धीरे कर रहा था. दो-तीन बार अन्दर बाहर करने में ही वो इतनी उत्तेजित हो गई कि ज़ोर ज़ोर से आवाज़ें निकाल कर दूसरी बार झड़ गई.

इस बार वो बहुत ज़्यादा झड़ी थी, पूरी चूत उसके पानी से भर गई थी. अब मैंने धकापेल ज़ोर ज़ोर से चुदाई शुरू कर दी.

काम्या तो पूरी तरह से सेक्स के मज़े में डूब चुकी थी.. ज़ोर ज़ोर से हर शॉट के साथ आह्ह उह्ह चिल्ला रही थी. उसकी आवाज़ें माहौल की कामुकता को बहुत बढ़ा रही थीं. मैं भी पहले सेक्स को यादगार बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहता था.

मैंने उसकी एक टांग को ऊपर उठा लिया और दूसरी टांग के दोनों तरफ अपनी टांगें रख दी. एक टांग को हाथ में पकड़ कर मैं धकाधक उसकी चूत को पेलने लगा. लंड चूत के टकराव से बनने वाला म्यूजिक माहौल को अलग ही नशा दे रहा था.

मैं लौड़ा चूत से बाहर निकलता और फिर अपनी कमर को पूरी तरह फ्री छोड़ कर लंड पर वजन डाल कर उसकी चूत में लौड़ा डाल देता, जिससे लौड़ा पूरा अन्दर तक जा रहा था.

थोड़ी देर की धकापेल चुदाई के बाद हम दोनों एक साथ ही झड़ गए. मैंने पूरा माल उसकी चूत में ही निकाल दिया.
चुदाई के बाद मैंने लौड़ा उसकी चूत में ही पड़ा रहने दिया और उसे चूमने लगा.

हम दोनों ने ही आज परम सुख को प्राप्त किया था और वो हम दोनों के चेहरे से साफ़ दिख रहा था.

चुदाई के कुछ देर बाद हमने एक साथ शावर लिया. इन सब में काफी टाइम हो गया था और उसके घर वाले भी आने वाले थे, वो कपड़े पहन कर चली गई.

इसके बाद हमने एक बार और रात में खुली छत पर चुदाई की. खुले में चुदाई करने का भी अपना ही अलग रोमांच है.

यह थी मेरे पहले प्यार और चुदाई की इंडियन सेक्सी सच्ची कहानी. आपको मेरी फर्स्ट टाइम सेक्स कहानी कैसी लगी, आप अपने सुझाव मुझे इस ईमेल आईडी पर भेज सकते हैं.
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