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मेरी सोनी मेरी तमन्ना-1

Meri Soni Meri Tamnna-Part 1

हाय पाठको,

मैं नागपुर में रहता हूँ मेरा नाम नब्बू हैं और उम्र 25 साल है। मैं एक सरकारी कंपनी में काम करता हूँ और मैं अच्छा खासा कमा लेता हूँ। मेरे घर में मेरी माँ और छोटा भाई जो मुझ से सात साल छोटा है। मैं आप लोगों का ज्यादा समय न लेते हुए अपनी कहानी बताता हूँ और एक बात कि मेरी कहानी शत-प्रतिशत सच है।

सोनी जो एक खूबसूरत बला का नाम है, वो 18 साल की, जिसने अभी अभी जवानी में कदम रखा था, उसका रंग थोड़ा सांवला था और सेक्सी होने के साथ वो बिंदास भी थी। उसकी आँखें बहुत ही नशीली थी, जब वो चलती थी तो उसकी जवानी और मादकता साफ़ दिखती थी, जिसे देखकर बस्ती के सारे लड़के अपना लंड पकड़ कर सीधा करते थे क्योंकि उनका खड़ा हो जाता था। सोनी हमेशा चूड़ीदार सलवार-सूट पहनती थी जिसमें उसकी आकृति देखकर कोई भी उसका आकार बता देता था, हर कोई उसको चोदने की तमन्ना रखता था ! हर कोई उसको परपोज करना चाहता था।

अब सीधा कहानी पर आते हैं !

यह बात चार साल पहले की है, जब मैं इक्कीस साल का था तब मेरी कोई गर्लफ्रेंड नहीं थी। मैं अपने दोस्तों के साथ अक्सर गंगा-जमुना जाया करता था और रांडों को जमकर चोदा करते थे।

क्योंकि मेरे दोस्त अपनी अपनी गर्लफ्रेंड के साथ बाकी सब तो कर लेते थे पर उन्हें चोदना उनके बस की बात नहीं थी।

एक बार मेर दो दोस्त अज्जू और शिव अपनी-अपनी गर्लफ्रेंड के साथ घूमने जा रहे थे। उनकी गर्लफ्रेंडज़ के साथ उनकी एक सहेली आने वाली थी। जब मेरे दोस्त अपनी-अपनी गर्लफ्रेंड को रिसीव करने के लिये गए तो उनके साथ सोनी भी आई थी।

मेरे दोस्तों की नजर अपनी गर्लफ्रेंड से ज्यादा सोनी पर थी। मेरे दोस्तों ने सोचा कि नब्बू की तो कोई गर्लफ्रेंड है नहीं ! क्यों न उसका जुगाड़ सोनी के साथ जमा दिया जाये ! बाद में मिल बाँटकर खायेंगे !

और फ़िर अज्जू ने मुझे फोन किया, कहा- जल्दी से इस रेस्टोरेंट में आ जा ! हमारी गर्लफ्रेंड के साथ सोनी भी आई है।

मेरी तो खुशी का ठिकाना ही नहीं था, बिना मेहनत किए गर्लफ्रेंड मिल रही थी। मैं दस मिनट में तैयार होकर घर से निकल पडा !

मैं रेस्टोरेंट में पहुँचा, जैसे ही मेरी नज़र सोनी पर पड़ी, मैं खिल गया। सोनी ने लाल रंग की चूड़ीदार सलवार पहनी थी।

मेरे दोस्तों ने मेरा सबसे परिचय कराया।

मेरे दोस्त की गर्लफ्रेंड ने कहा- बहुत दिनों से सोनी कह रही थी कि वो मुझसे दोस्ती करना चाहती है, इसलिए इसे साथ लाये हैं।

सोनी मुझे पहले से ही जानती थी। मैं हैरान था क्योंकि जिसके पीछे सारे लड़के पड़े हैं और खिंसी (नागपुर का प्रसिद्ध पिकनिक स्पॉट) जाने के अपनी अपनी बाइक पर लड़कियों को बिठाया और मैंने अपनी बाइक पर सोनी को ! और निकल पड़े !

मेरे दोस्तों ने फोन पर ही सारी बात बता दी थी कि कुछ भी हो, प्रपोज़ कर देना ! क्योंकि उसका कोई बायफ़्रेंड नहीं है, प्रपोज़ करने के बाद सोनी तेरी ही जायेगी, जी भर के तू चोद लेना और हो सके तो हमारा भी जुगाड़ जमा देना !

दोस्तो, मेरा तो खुद का ही पता नहीं था, इनका कहाँ से जमाता !

रास्ते में मैंने उससे खूब बातें की, जैसे- उसे क्या पसंद है ! मेरी तो बस यही तमन्ना थी कि कब मेरे लण्ड की मुराद पूरी होगी, कब मैं इसे चोदूँगा।

मैं अच्छी तरह से जनता था कि इसे चोदना इतना आसान नहीं है।

खैर हम बातें करते करते खिंसी पहुँच गए फिर हमने नौकाविहार किया और थोड़ा घूमे। इसके बाद मेरे दोस्त अपनी अपनी गर्लफ्रेंड के साथ अलग-अलग इधर उधर चले गए और कहा कि 30 मिनट के बाद घर के लिए निकलना है।

अब दोस्तो, मेरे पास 30 मिनट थे। मैं सोनी के साथ एक जगह बैठ गया, थोड़ी बात करने बाद मैंने उसे “आय लव यू” कह दिया।

तो उसने कहा- दो दिन के बाद जवाब दूँगी।

दोस्तो, ऐसा चालू लड़की ही कहती है और मैं इस जवाब के लिये पहले से तैयार था कि यह मेरे को थोड़ा घुमाएगी।

फ़िर मैंने दूसरी बातें करना शुरू किया। उसने बताया कि पहले उसने कभी अफ़ेयर नहीं किया, वो पहली बार डेटिंग पर आई है !

शाम हो गई थी, अब मेरे दोस्त भी आ गये थे, हमको घर जाना था।

मैंने सोनी को कहा कि वो मेरी बाईक चलाए !

वो तैयार हो गई क्योंकि उसके पापा ने उसे बाईक चलाना सिखाया था। वो मेरी बाईक पर बैठ गई और जैसे ही मैं उसके पीछे बैठा, मेरा लण्ड उसकी गाण्ड से चिपक गया।

उसने कुछ नहीं कहा। मेरा लण्ड खड़ा हो चुका था और उसमें दर्द होने लगा था। उसे भी महसूस हो रहा होगा की नब्बू का लण्ड उसकी गांड से टकरा रहा है पर वो कुछ नहीं कह रही थी।

हम बाईक पर बात करते करते आ घर आ रहे थे, मैं उसकी गांड से लण्ड चिपका कर ही बैठा था। आधे रास्ते में मैंने फ़िर आई लव यू कहा।

उसका वही जवाब था जिसके लिये मैं पहले से तैयार था। मैंने अपने दोनों हाथ उसके पीछे से बगल में डालकर गाडी का हैंडल पकड़ लिया और गाड़ी पूरी रफ़्तार से चलाने लगा।

सोनी को डर लगने लगा, वो चिल्लाने लगी- गाड़ी स्लो करो !

मैं- मेरा जवाब दो हाँ या ना?

सोनी-हाँ हाँ ! मैं तो बस मज़ाक कर रही थी। हम वापिस आ चुके थे, हमने बाय किया और जाते जाते मैंने सोनी को अपना मोबाईल नम्बर दे दिया।

उस रात मुझे नींद नहीं आ रही थी। अचानक रात के एक बजे सोनी का फोन आया, हम बातें करने लगे।

मैंने उससे कहा- अब हम अकले ही मिलेंगे !

उसने हाँ कह दिया और मैं उससे 8-10 बार मिला। मैं उसको ब्वात्निक ( नागपुर का मशहूर कपल पार्क ) में ले जाकर जम कर किस करता और साथ में उसके मम्मे भी दबाता था। वो हमेशा सीस्स_ सीस्स् करती थी और उसकी चूत में उंगली डाल देता था, मगर सोनी को चोदने के लिये वह सही जगह नहीं थी और न ही सही समय था। मेरी एक गलती मेरी तमन्ना पर पानी फेर देती। मैं सोनी को जी भर कर चोदना चाहता था, मैं कैसे बर्दाश्त कर रहा था, यह मैं ही जानता था !

एक दिन मेरे सबर का बाँध टूट गया मैं अब और इंतज़ार नहीं कर सकता था, मैंने आफिस के एक दोस्त से उसके फार्म हाउस की चाबी ले ली और सोनी को लेकर पहुँच गया।

सोनी समझ गई थी कि मैं उसे यहाँ क्यों लाया हूँ, मगर वो अनजान बन रही थी, उसने कहा- हम यहाँ क्यों आये हैं? क्या यह मकान तुमने खरीदा है?

मैं- नहीं, मैं यहाँ तुम्हें प्यार करने लाया हूँ !

कहकर उसे अपनी बाँहों में ले जकड़ लिया और हम दोनों पागलों की तरह एक दूसरे को चूमने लगे जैसे हम दोनों बरसों से भूखे हों। चूमते-चूमते मैंने उसकी सलवार खोल दी और उसकी चूत में उंगली डाल दी जो पहले से गीली थी !

अचानक सोनी अलग हो गई और कहा- मुझे पता था कि तुम यही करोगे और मुझे इसके बाद छोड़ दोगे !

मैं यह नहीं चाहता था कि ऐसा मौका हाथ से चले जाए !

मैं- सोनी, क्या तुम्हें ऐसा लगता है कि मैं तुम्हें छोड़ दूँगा? मेरे ऊपर भरोसा नहीं है ?

सोनी- अगर यह करने के बाद मैं माँ बन गई तो क्या होगा?

मैं- मेरे पास सब चीज का इलाज है, अगर तुम्हें मासिक नहीं हुआ तो दो महीने के अन्दर बता देना !

अब वो निडर होकर मेरे से लिपट गई। इस बार ज्यादा देर नहीं की, सीधे उसके कपड़े उतार दिए।

दोस्तो, वो क्या लग रही थी- काली पैंटी और ब्रा में उसका कसा हुआ जिस्म ! उसकी मादकता को बढ़ा रहा था, ऊपर से उसकी वो नशीली आँखें मेरा हौंसला और बढ़ा रही थी। मैंने भी अंडरवीयर समेत अपने सारे कपड़े उतार दिए। मैं उसके सामने पूरा नंगा था।

मैंने सोनी को उठा कर….

दूसरे भाग में समाप्त !

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