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मेरी चालू बीवी-90

Meri Chalu Biwi-90

सम्पादक – इमरान

मेरी कहानी का पिछला भाग :  मेरी चालू बीवी-89
फिर कुछ फ्री होने के बाद मैंने सलोनी को फोन करने की सोची मगर तभी नलिनी भाभी की कॉल आ गई।

मैं सोच ही रहा था कि वो जरूर मुझसे नाराज होंगी कि मैंने दोबारा उनको कॉल क्यों नहीं किया पर उधर से कोई वैसी आवाज तो नहीं आई, उन्होंने कुछ नहीं कहा।

मैं अभी हेलो कहने ही वाला था कि मुझे लगा जैसे वहाँ कोई बात कर रहा हो… यह तो सरप्राइज़ था मेरे लिए !

अरे, यह नलिनी भाभी तो मेरे ही फ्लैट में थी और सलोनी भी स्कूल से वापस आ गई थी, वो दोनों आपस में बात कर रही थी, नलिनी भाभी ने शायद यह सोचा होगा कि ये बातें मुझे भी सुना दें… ग्रेट नलिनी भाभी !

नलिनी भाभी के इस कमाल का मैं कायल हो गया थाम उन्होंने सच में कमाल ही कर दिया था… जो मजा मुझे इस समय मिल रहा था… इसका सारा श्रेय केवल और केवल नलिनी भाभी को जाता है।

अब बस इतना देखना था कि क्या नलिनी भाभी अपने कमाल से सलोनी से उसके सेक्सी राज निकाल पाएँगी या नहीं।

वो दोनों आपस में बात कर रही थी, मैं ध्यान से दोनों की बात सुनने लगा।

नलिनी भाभी- अरे कुछ तो शर्म कर लिया कर, जब देखो बेशर्मो की तरह नंगी खड़ी हो जाती है?

सलोनी- हा हा हा क्या भाभी.. आप भी ना… अब आप से क्या शर्माना? मेरे पास ऐसा क्या है जो आपके पास नहीं है।

नलिनी भाभी- हा हा… वो तो सही है… फिर भी… एक तो तेरे अंकल भी ना… जब देखो तब… एकदम से आ धमकते हैं, उनसे तो शर्म कर लिया कर !

मैं उनकी बात सुन ही रहा था कि रोजी फिर से मेरे केबिन में आ गई। वो कुछ बोलने वाली ही थी कि मैंने उसको चुप रहने का इशारा किया और फोन स्पीकर पर कर लिया।

थैंक्स गॉड… उसको समझ आ गया, उसने कोई अन्य प्रश्न नहीं किया।

अब वो भी ध्यान से उन बातों को सुनने लगी, उसके माथे पर हल्की शिकन जरूर थी पर अभी उसने कोई प्रश्न पूछना व्यर्थ समझा, यह उसकी समझदारी थी।

सलोनी- अरे तो उनसे क्या शर्माना भाभी… बेचारे कितनी मदद करते हैं मेरी… हा हा हा… फिर थोड़ा बहुत इनाम तो उनको भी मिलना चाहिए ना !

नलिनी भाभी- हाँ, तुझे ऐसे नंगी देखने के बाद, पता है मुझे कितना परेशान करते हैं?

सलोनी- हाय… सच भाभी… फिर तो आपको मेरा अहसान मानना चाहिए… हा हा हा हा… मेरे कारण आपको कितना मजा आता होगा…

नलिनी भाभी- हाँ हाँ, मुझे सब पता है… मेरे मजे के चक्कर में तू कितना मजा ले रही है।

सलोनी- ह्हह्हाआ बिल्कुल नहीं भाभी… अंकल को तो मैंने छुआ तक नहीं… हाँ बस उन्होंने ही थोड़ा बहुत… पर मेरे दिल में तो उनके लिए बहुत इज़्ज़त है… मेरे लिए तो वो बिल्कुल पिता समान हैं।

नलिनी भाभी- अरे उनकी छोड़… वो तो तू चाहे कुछ भी कर… वो जो तू कल रात कैसे… बिल्कुल नंगी… उस लड़के के साथ… पूरी कॉलोनी में घूम रही थी… और क्या पूरे शहर में भी ऐसे ही नंगी घूम रही थी? बता ना… क्या क्या किया उस लड़के के साथ… और अंकुर कहाँ था?? तुम रात भर अकेले उस लड़के के साथ… बता न.. क्या क्या हुआ??

सलोनी- हा हा… ओह अरे… थोड़ा रुको तो भाभी… आप तो एकदम से… सवाल पर सवाल… सवाल पर सवाल… हा हा हा… अरे अभी-अभी थककर स्कूल से आई हूँ… जरा रुको तो !

नलिनी भाभी- हाँ वो तो लग ही रहा है… लगता है बहुत मेहनत की है स्कूल में तेरी इस डिबिया ने, बड़ी लाल हो रही है.. जैसे खूब पिटाई हुई हो इसकी किसी तातकवर डंडे से… हा हा !

सलोनी- अरे वाह… भाभी ..कह तो आप बिल्कुल ठीक रही हो… हा हा…

मैंने सोचा कि लगता है दोनों खूब मस्ती कर रहे हैं।

नलिनी भाभी- और यह क्या… तू स्कूल भी कच्छी पहनकर नहीं जाती?

सलोनी- अरे वो मैं कहाँ पहनती हूँ वैसे भी… मुझे आदत ही नहीं है। और हाँ भाभी, अगर कच्छी पहनकर जाउंगी तो फिर मजा कैसे करुँगी?

नलिनी भाभी- तू तो पूरी बेशर्म होती जा रही है।

सलोनी- झूठ भाभी.. मैं तो पहले से ही हूँ… वो तो अब आप बेशर्म होती जा रही हो… हा हा.. बोलो मैं सही कह रही हूँ ना… अच्छा आप बताओ.. आपने मेरे पति का सही से ध्यान रखा था ना… और मधु को क्यों वापस भेज दिया? कहीं कुछ ऐसा वैसा तो नहीं किया ना आपने मेरे भोले भाले पति के साथ… हा हा हा…

नलिनी भाभी- हाँ बस एक तू भोली है और वो तेरा पति भोला है… और बाकी सब ही टेढ़े हैं? मैं ऐसी वैसी बिल्कुल नहीं हूँ… पूछ लेना अपने उस भोले से… हाआंन्नणणन…

सलोनी- अर्रर… आप नाराज क्यों होती हो मेरी प्यारी भाभी… मैं तो ऐसे ही कह रही थी… और अगर दिल हो तो कर भी लेना.. सच, मैं कुछ नहीं कहूँगी… मुझे अच्छा ही लगेगा।

नलिनी भाभी- कितनी बेशर्म होती जा रही है तू?

सलोनी- अरे इसमें बेशर्मी की क्या बात है… अगर मेरे प्यारे पति को और मेरी प्यारी भाभी… दोनों को अच्छा लगे तो मैं तो खुद उनका डंडा आपकी इस मुनिया में डाल दूँ… हा हा…

नलिनी भाभी- चल दूर हट मेरे से… मुझे ये सब पसंद नहीं… तू ही डलवा… अलग अलग डंडे… चल ये सब बातें छोड़.. मुझे वो बता ना?

सलोनी- आए ओये ओये… ये क्या बात हुई… वैसे तो आपको ये सब पसंद नहीं… और ये बता ..वो बता… जब पसंद नहीं तो ये सब क्यों पूछ रही हो… जाओ मैं कुछ नहीं बताती !

मेरा तो दिल धक रह गया, अरे यह क्या कह रही है? ऐसे तो कुछ भी पता नहीं चलेगा।

नलिनी भाभी- अरे मेरी बन्नो… नाराज क्यों होती है?? पसंद नहीं होता तो वैसी ही तेरे पास बैठी रहती… वो तो तू जैसे बात कर रही है, तो मैंने कहा। चल अब ज्यादा नखरे मत कर और जल्दी से बता कि कल रात क्या गुल खिलाये तूने?

सलोनी- अरे वो तो भाभी कल आपके चहेते… अंकुर की ही मर्जी थी… उन्ही के कारण कल मुझे कितने लोगों के सामने नंगी रहना पड़ा…

नलिनी भाभी- क्या मतलब??

सलोनी- अरे बता रही हूँ ना…

और उसने पहले बिल्कुल वही कहानी सुनाई जैसे होटल में क्या-क्या हुआ… और फिर पुलिस वाले की भी… हाँ उसने एक नई बात बताई… जिसे सुन मैं चोंक गया… अमित ने बताया था कि इंस्पेक्टर ने ज्यादा कुछ नहीं किया था… मगर साले अमित ने झूठ बताया..

सलोनी के अनुसार उस इंस्पेक्टर ने बहुत मजे लिए…

मैं आश्चर्यचकित था कि 15 मिनट में ही उसने सलोनी को इस कदर भोग लिया था।

मेरी समझ में यह भी आ गया था कि केवल मेरे सामने ही वो चुदवाना पसंद नहीं करती है बल्कि मेरे पीछे उसको चुदवाने से कोई परहेज़ नहीं है, उसको लण्ड अपनी चूत या गांड में डलवाने में मजा ही आता है।

उसके अनुसार इंस्पेक्टर ने कुछ देर तक तो उससे अपना लण्ड चुसवाया… फिर उसकी चूचियों को मसला और लण्ड भी चूचियों के बीच रखकर रगड़ा… फिर सलोनी उसके लण्ड को चूत में लेना चाहती थी मगर उसने चूत को उंगली से चोदते हुए मना कर दिया कि उसको और यह भी कहा- …तुम जैसी रंडियों की ढीली ढाली चूत मारने में नहीं बल्कि गांड मारने में मजा आता है।

और इंस्पेक्टर ने सलोनी को जीप में ही घोड़ी बनाकर पीछे उसके गांड में अपना लण्ड डाल दिया।

सलोनी ने यह भी बताया कि उसको बहुत दर्द हुआ… जिस समय अमित उसको बचाने आया उस समय उस इंस्पेक्टर का लण्ड सलोनी की गांड में था… अमित ने खुद इंस्पेक्टर को धक्का देकर उसका लण्ड बाहर निकाला था… फिर अपने रुमाल से सलोनी की गांड को साफ़ करके अपना कोट उसको पहनाया था।

मुझे अमित पर बहुत गुस्सा आया कि साले ने मुझे बताया क्यों नहीं और उस इंस्पेक्टर को क्यों छोड़ दिया… और फिर सलोनी पर भी गुस्सा आया कि उसने मुझे क्यों नहीं बताया?

फिलहाल तो मैं उसकी बातें सुन रहा था…

नलिनी भाभी- चल अच्छा हुआ कि फिर भी बच गई तू… वरना अभी तो वो दूसरा भी था… पता नहीं बीच सड़क पर और क्या-क्या होता…

सलोनी- हाँ भाभी सच… मैं अमित भैया का अहसान कभी नहीं भूल सकती… मुझे बहुत दर्द सहने से बचा लिया था उन्होंने…

नलिनी भाभी- तो उनका अहसान तूने कैसे उतारा… उस बेचारे अंकुर को तो तुमने रात भर पुलिस स्टेशन भेज दिया… और अकेले यहाँ दोनों… हम्म्म?

सलोनी- अरे नहीं भाभी… उनको तो मैंने ही जल्दी बुलवा लिया था… अगर उस इंस्पेक्टर को केस के चककर में पड़ते तो पता नहीं आज भी हम वहीं होते… और हमारी बदनामी वो अलग।

नलिनी भाभी- फिर भ कुछ तो हुआ होगा बता ना?

सलोनी- उनको वहीं छोड़ मैं डरी हुई सी अमित भैया के साथ उनकी गाड़ी में आई, वो बहुत मजाक कर रहे थे जिससे मैं नार्मल हो जाऊँ… फिर मुझे पता चला कि वो तो मुझे पहले से ही बहुत पसंद करते हैं… उन्होंने बताया कि उनकी बहुत पुरानी इच्छा पूरी हो गई… मुझे नंगी देखने की… उनकी प्यारी और मजाकिया बातें सुन मुझे बहुत अच्छा लगा और मैं जल्दी ही नार्मल हो गई…

फिर उन्होंने ही कहा कि भाभी आज मजा करते हैं… वो चाहता था कि मैं पार्किंग से यहाँ तक नंगी ही आऊँ…

मैंने बहुत मना किया… पर उसने ज़िद पकड़ ली और फिर अपना कोट भी वापस मांग लिया।

फिर मैंने भी सोचा कि रात को इस समय कौन सा कोई जगा होगा, सब तरफ अँधेरा ही था, अमित तो मुझे पहले ही नंगी देख चुका था… बस मैंने उसकी यह इच्छा भी पूरी कर दी… सच भाभी बहुत मजा आया… एक दिन आप भी यह ट्राई करना… वो तो हमारे पास चाबी नहीं थी, वरना आपको भी कुछ पता नहीं चलता।

नलिनी भाभी- रहने दे… तेरे अंकल तो कब से तेरी राह देख रहे थे… उन्होंने तेरे को पूरा कंपाउंड का चक्कर लगाकर… नंगी ऊपर आने तक सब देख लिया था।

सलोनी- हाँ वो तो उन्होंने मुझे बता दिया था… अब चलो उनकी तो कोई बात नहीं… वो तो अपने ही हैं ना.. हा हा…

नलिनी भाभी- और यह भी तो हो सकता है कि कुछ और लोगों ने भी देखा हो… हो सकता है कोई और भी अपनी बालकोनी से देख रहा हो?

सलोनी- हा हा सच भाभी.. तो चलो यह उसका इतनी रात तक जागने का इनाम हो गया होगा… हा हा..

नलिनी भाभी- फिर तुम दोनों ने अकेले फ्लैट में क्या किया, वो तो बता?
सलोनी- अरे बस अब रहने भी दो ना भाभी, वो सब बाद में बता दूंगी।
नलिनी भाभी- नहीं मुझे अभी सुनना है बता ना !

मैंने रोजी की ओर देखा, वो आँखे फाड़े, मुँह खोले सब सुन रही थी।

उसकी समझ में आ तो गया होगा कि मैं किसकी बात सुन रहा हूँ क्योंकि उन्होंने मेरा ज़िक्र भी छेड़ा ही था।

अब उसकी क्या प्रतिक्रिया होती है, यही देखना था।

सलोनी- ओके बाबा, बताती हूँ… मुझे भी अमित भैया पहले से ही बहुत पसंद हैं ..इसीलिए मैंने भी सोच लिया था… कि उनकी सभी इच्छा पूरी करुँगी…

नलिनी भाभी- और तेरे अमित भैया की क्या इच्छा थी?

सलोनी- क्या भाभी आप भी… मुझ जैसे लड़की को नंगी देखकर एक लड़के की क्या इच्छा हो सकती है… हा हा…

नलिनी भाभी- तो तुम दोनों ने सब कुछ कर लिया?
सलोनी- ह्म्म्म बताती हूँ ना, रुको तो…
और कुछ देर के लिए वहाँ चुप्पी सी छा गई।

अब क्या राज खोलने वाली है सलोनी…????
कहानी जारी रहेगी।

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