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मेरी चालू बीवी-53

Meri Chalu Biwi-53

इमरान

मेरी चोदन कहानी के पिछले भाग आपने पढ़ा  :  मेरी चालू बीवी-52

अंकल- अरे नहीं बेटा… तू कहे तो मैं तुझको बिना पेटीकोट के ही साड़ी बांधना सिखा दूँ… पर आजकल साड़ी इतनी पारदर्शी हो गई हैं कि सब कुछ दिखेगा…

सलोनी- हाँ हाँ आप तो रहने ही दो… चलो मैं ये दोनों कपड़े पहन कर आती हूँ ! फिर आप साड़ी बांधकर दिखा देना…

उसने पेटीकोट और ब्लाउज हाथ में लिये..
अंकल- अरे रुक ना… कहाँ जा रही है बदलने?

सलोनी- अरे बाथरूम में, और कहाँ? आप साड़ी ही तो बांधोगे ना.. ये पेटीकोट और ब्लाउज तो मुझे पहनने आते हैं..
अंकल- जी हाँ, पर साड़ी के साथ पेटीकोट और ब्लाउज मैं फ्री पहनाता हूँ…

अब तुम सोच लो पेटीकोट और ब्लाउज भी मुझ ही से पहनोगी, तभी साड़ी भी पहनाऊँगा… हा हा हा…
सलोनी- ओह ब्लैकमेल… मतलब साड़ी पहनाने की फीस आपको एडवांस में चाहिए…
अंकल- अब तुम जो चाहे समझ लो… मेरी यही शर्त है…
सलोनी- हाँ हाँ… उठा लो मज़बूरी का फ़ायदा… अच्छा जल्दी करो अब..
मेरे पतिदेव कभी भी आ सकते हैं..

उसने अपना मोबाइल को चेक करते हुए कहा…
एक बार तो मुझे लगा कि कहीं वो मुझे कॉल तो नहीं कर रही…
मैंने तुरंत अपना मोबाइल साइलेंट कर लिया…

अंकल सलोनी के हाथ से ब्लाउज ले खोलकर देखने लगे..
सलोनी ने अपने टॉप के बटन खोलते हुए बोली- अब ये कपड़े तो मैं खुद उतार लूँ या ये भी आप ही उतारोगे?
अंकल- हाँ, रुक रुक… आज सब मैं ही करूँगा…
और सलोनी बटन खोलते खोलते रुक गई…

अब अंकल ने ब्लाउज को अपने कंधे पर डाला और बड़े अंदाज़ से सलोनी के टॉप के बाकी बचे बटन खोलने लगे… और सलोनी ने भी बिना किसी विरोध के अपना टॉप उतरवा लिया।

शुक्र है भगवान का कि उसने अंदर ब्रा पहनी थी जो बहुत सेक्सी रूप से उसके खूबसूरत गोलाइयों को छुपाये थी मगर ‘लो वेस्ट जींस’ में उसका नंगा सुतवाँ पेट और ऊपर केवल ब्रा में कुल मिलकर सलोनी सेक्स की देवी जैसी दिख रही थी…

सलोनी होंठों पर मुस्कुराहट लिए लगातार अंकल की आँखों और उनके कांपते हाथों को देख रही थी और अंकल की पतली हालत को देखकर मुस्कुराते हुए वो पूरी शैतान की नानी लग रही थी।

अंकल ने जैसे ही ब्रा को उतारने का उपक्रम किया कि तभी सलोनी जैसे जागी- अरर…अई इसे क्यों उतार रहे हैं? ब्लाउज तो इसके ऊपर ही पहनओगे ना?

अंकल- व्व…वो… ह…हाँ.. पर क्या तुम ब्रा नहीं बदलोगी?
सलोनी- वो तो सुबह भी देख लूंगी, अभी तो ऐसे ही पहना दो…

मैं केवल यह सोच रहा था कि चलो ऊपर का तो ठीक ही है पर नीचे का क्या होगा??

नीचे तो उसने कुछ नहीं पहना है, जींस उतरते ही उसकी चूत, चूतड़ सब दिखाई दे जायेंगे… क्या यह मेरी सलोनी ऐसे ही खड़ी रहेगी?

मैं अभी सोच ही रहा था कि… अंकल ने सलोनी की जींस का बटन खोल दिया !
तब भी सलोनी ने फिर थोड़ा सा विरोध किया- …अरे अंकल पहले ब्लाउज तो पहना ही देते, फिर नीचे का…

अंकल ने जैसे कुछ सुना ही नहीं… चाहते तो जींस की चेन दोनों भाग को खींच कर खुल जाती… मैंने भी कई बार खोली है.. पर अंकल जींस की चेन को अपने अंगूठे और उँगलियों से पकड़ बड़े रुक रुक कर खोल रहे थे…

चेन ठीक सलोनी की फूली हुई चूत के ऊपर थी..

और शतप्रतिशत उनकी उंगलियाँ सलोनी की नंगी चूत को स्पर्श हो रही होंगी…

इसका पता सलोनी के चेहरे को देखकर ही लग रहा था.. उसने मदहोशी से अपनी आँखें बंद कर ली थी और उसके लाल रक्तिम होंठ काँप रहे थे…

चेन खोलने के बाद अंकल ने उसकी जींस दोनों हाथ से पकड़ पहले सलोनी के चूतड़ से उतारी और फिर सलोनी के जांघों और पाँव से !

सलोनी ने भी बड़े सेक्सी अंदाज़ से अपना एक एक पैर उठा उसे दोनों पैरों से निकलवा लिया।
इस दौरान अंकल की नजर ऊपर सलोनी की चूत और उसकी खुलती बंद होती कलियों पर ही थी…

मेरे बेडरूम में अंकल की सांसें इतनी तेज चल रही थी जैसे कई मील दौड़ लगाकर आये हों…
और अब सलोनी अंकल के सामने कमरे की सफेद रोशनी में केवल छोटी मिनी ब्रा में पूरी नंगी खड़ी थी…
अब शायद उसको कुछ शर्म आ रही थी.. उसने अपनी टांगों को कैची की तरह बंद कर लिया था।

अंकल ने मुस्कुराते हुए ही पेटीकोट उठाया और उसको पहनाने लगे…
अब मुझे अंकल बहुत ही शरीफ लगने लगे…

एक इतने खूबसूरत लगभग नग्न हुस्न को देखकर भी अंकल उसको बिना छुए, बिना कुछ किये, कपड़े पहनाने लगे !
वाकयी बहुत सयंम था उनमें…

अंकल ने ऊपर से पेटीकोट ना डालकर सलोनी के पैरों को उठवा कर नीचे से पहनाया और बहुत ही सेक्सी अंदाज़ से सलोनी के साथ चुहल करते हुए उसके पेटीकोट का नाड़ा बाँधा…
फिर उन्होंने सलोनी को ब्लाउज पहनाते हुए कई बार उसकी चूची को छुआ और बटन लगाते हुए दबाया भी !

मैं बुरी तरह बैचेन हो रहा था और सोच रहा था कि क्या ताऊजी ने भी सलोनी को ऐसे ही छुआ होगा?
या इससे भी ज्यादा?

क्योंकि उस शादी से पहले एक बार भी हमारे घर ना आने वाले ताऊजी उस शादी के बाद 3-4 बार चक्कर लगा चुके हैं…
अब यह राज तो सलोनी या फिर ताऊजी ही जाने !

इस समय तो अरविन्द अंकल बहुत प्यार से बताते हुए सलोनी के एक एक अंग को छूते हुए उसको साड़ी का हर एक घूम सिखा रहे थे !

कहानी जारी रहेगी।
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