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मेरी चालू बीवी-114

Meri Chalu Biwi-114

सम्पादक – इमरान

मेरी कहानी का पिछला भाग :  मेरी चालू बीवी-113

रानी का पति और भी कमीनपने पर उतर आया है- देख, मैं सही बोल रहा था ना, यह तो बिल्कुल रण्डी जैसा चूस रही है, साली कितनी मस्त है यार!

मुझे गुस्सा आ गया, मैंने गप की आवाज के साथ अपने लण्ड को रानी की चूत से बाहर निकाला।

उसने चौंककर मुझे देखा।

मैंने उसके बालों को कसकर खींचा- साले तेरा बाप तो हरामी है ही, तू उससे भी बड़ा हरामी है। कमीने चल, अपने बाप का क़र्ज़ अब तू चुकाएगा, साले चूस मेरे लण्ड को वैसे ही!

और मैंने अपने लण्ड को उसके खुले मुँह में घुसेड़ दिया।

बहुत ही गर्म माहौल हो गया था।

उसने अपनी आँखें फाड़े लण्ड को मुँह में ले लिया, लण्ड उसके हलक तक चला गया।

मैंने उसके बालों को इतने कसकर पकड़ा कि वो कहीं काट ना ले!

रानी को बहुत ही मजा आ रहा था, वो हंस रही थी।

मैंने उसके मुँह में ही धक्के लगाने शुरू कर दिए, उसकी बीवी की चूत से भीगे लण्ड को वो चूसने लगा।

मैं- साले, अब पता चला जब बीवी चुदती है तो कैसा लगता है? और लण्ड चूसने में कितना मजा आता है?
मैंने रानी को अपने चिपका लिया।

उधर सलोनी मामाजी का लण्ड चूसने में लगी थी और इधर मैं उनके बेटा बहु से मजे ले रहा था।

पहले तो मेरे लण्ड से उसको परेशानी सी हो रही थी, फिर अचानक ना जाने क्या हुआ, उसकी आँखे लाल हो गई, वो बड़े प्यार से मेरे अंडकोषों को सहलाते हुए लण्ड को चूसने लगा।

यह देखकर रानी की भी आँखों में चमक आ गई… वो खुद अपने हाथ से मेरे लण्ड को पकड़ उसके मुँह में डालने लगी।

मेरा मजा तिगुना हो गया था!

उधर सलोनी पूरी नंगी उकड़ू बैठी मामाजी के लण्ड को चूस रही थी।

उसके उठे हुए नंगे चूतड़ मुझे साफ दिख रहे थे।

मेरी सीधी बगल में रानी मुझसे चिपकी थी, उसने अपनी ब्रा भी हटा दी थी। उसकी नंगी चूचियों को एक हाथ से मसलते हुए मैं दूसरे हाथ से उसके चूतड़ सहला रहा था और वो अपने पति को मेरा लण्ड चुसवा रही थी।

मेरी शुरू से ही आदत है सेक्सी बातें करते हुए चुदाई करने की, मैं रानी को छेड़ते हुए बोला- क्यों मेरी जान… यह बूढ़ा तो बहुत हरामी है… तुमको भी बहुत चोदता होगा या फिर परेशान करता होगा?

रानी- हाँ सही बोला आपने… यह सब तो नहीं, पर हाँ परेशान बहुत करता है। इनको कई बार बताया पर ये मानते ही नहीं थे… अच्छा हुआ आज इन्होंने सब कुछ अपनी आँखों से देख लिया।

उसका पति केवल गों गों की आवाज निकाल रहा था।
मैं एक सेकंड भी लण्ड उसके मुँह से बाहर आने नहीं दे रहा था।

रानी मेरे चेहरे के आगे ही झुकी थी, उसकी नंगी चूची मेरे होंठों से टकरा रही थी, मैंने उसकी एक चूची को सही से पकड़ कर अपने होंठों के बीच उसके निप्पल को लिया और चूसने लगा।

वो भी यही चाहती थी, इसीलिए ऐसा कर रही थी।

रानी मजे से अपनी चूची चुसवाने लगी।

मैं- तुम बताओ मेरी जान, क्या क्या किया है इसने अभी तक तुम्हारे साथ?

रानी- मुझे तो लगता है हर समय उसकी नजर मेरे अंगों पर ही रहती है। पहले तो विश्वास नहीं होता था पर अब सब कुछ सच लगता है।

मैं- फिर भी बताओ न वो सब कुछ… जरा विस्तार से!

रानी- अब क्या बताऊँ… इनको तो सब पता ही है। मुझे लगता है जैसे कई बार बाथरूम में झाँकने की कोशिश करते हैं, कई बार मैंने मेरे कमरे में झांकते हुए भी पकड़ा है जब मैं कपड़े बदल रही हूँ या फिर ऐसे वैसे बैठी या लेटी हूँ, तब ही ये ताक झांक करते रहते हैं।

मैंने उसकी चूत में उंगली करते हुए पूछा- और क्या तेरी चूत नहीं देखी कभी या फिर अपने हाथ से नहीं सहलाई?

रानी- मैं पूरे पक्के तौर पर तो नहीं कह सकती, वैसे तो मुझे छूने का कोई मौका नहीं छोड़ते… पर हाँ, मेरे होशोहवास में ये सब नहीं किया। हाँ कई बार मुझे ऐसा लगता है जैसे… मेरे सोने पर कोई मुझे छू रहा है, कई बार मेरे कपड़े भी अस्त व्यस्त होते हैं।

मैं- अरे तो हो सकता है कि तुमको कोई गोली दे चोद भी दिया हो बूढ़े ने…

रानी- अब ये तो पता नहीं… पर हाँ कई बार ऐसा तो होता है कि मेरे पेट या चूतड़ पर कुछ चिपचिपा सा हो और किसी ने पोंछा हो!

मैं- तुमको कुछ पता नहीं चलता था?

रानी- अरे अक्सर मैं बहुत गहरी नींद ही सोती हूँ ना… और अगर कोई मेरे अंगों को सहलाये तो मुझे बहुत मजा आता है, मैं और भी गहरी नींद में सो जाती हूँ और ऐसे मजा लेती हूँ जैसे कोई सपने में कर रहा हो!

मैंने उसके चूतड़ों को कसकर दबाया- क्या बात है यार… फिर तो जो भी तुम्हारे पास होता होगा, उसको मजा आ जाता होगा?

तभी उसके पति ने कुछ इशारा किया, हम दोनों ने उधर देखा।

ओह! यह तो सलोनी आज पूरे चुदाई के मूड में थी!

मामाजी ने सभी गद्दे एक के ऊपर एक करके सलोनी को उन पर झुका कर खड़ा कर दिया।

उनका लण्ड टनटना रहा था, अब यह पक्का था कि वो सलोनी को नहीं छोड़ने वाले, वो उसको चोदने की पूरी तैयारी कर रहे थे।

मामाजी सलोनी के चूतड़ों के पीछे बैठ अपने दोनों हाथों से उसके मखमली चूतड़ों को चीर कर खोला, वहाँ ढेर सारा थूका, फिर हाथ से उस जगह को चिकना बना दिया।
अब मामाजी ने खड़े होकर अपने लण्ड को सेट किया।

यह पता नहीं चला कि वो चूत में डालने वाले हैं या गांड में!
पर अपना लण्ड सेट कर एक धक्का लगाया उन्होंने!

सलोनी- अह्ह्ह्हाआआ…

सलोनी उचक गई… लण्ड काफी हद तक अंदर चला गया था।

रानी का पति- उफ़्फ़, तू सही कह रही है रानी… इन्होंने तो चोद भी दिया इसको!

मैं- चुप साले… अब देखना कैसे इसका बदला तेरी बीवी से लूँगा।

मैंने रानी को वही अपने आगे घोड़ी बनाया- चल साले, सही से चुदवा इसको, नहीं तो तेरी गांड मारूंगा।

वो बहुत डर गया था, उसने खुद रानी की चूत को गीला किया, मेरा लण्ड तो पहले से ही उसके थूक से लबालब था, रानी के पति ने मेरे लण्ड को पकड़ रानी की चूत में खुद सेट किया।

यह मेरा बहुत पुराना सपना था जो आज पूरा हुआ था कि किसी हसीना का पति खुद अपने हाथों से मेरा लण्ड अपनी सुन्दर बीवी की चूत में डाले!

आज सलोनी के कारण मेरा यह सपना भी पूरा हो गया।

मैंने एक जोरदार धक्का मारा!

आह्ह्ह्ह्हा आआआह…
और मेरा आधे से ज्यादा लण्ड रानी की सुरंग में चला गया।

रानी की चूत इतना पानी छोड़ रही थी कि एक ही बार में पूरा लण्ड निगलने को तैयार थी।

मैंने रानी के चूतड़ों पर हाथ रख एक और धक्के में ही अपना पूरा लण्ड उसकी गहराई तक उतार दिया।

और अब एक मस्त चुदाई का माहौल बन गया था, दोनों कमरों से केवल सिसकारी और चुदाई की आवाजें आ रही थी।

उधर मामाजी सलोनी को पीछे से ही चोद रहे थे।

इधर मैं भी रानी को घोड़ी बनाकर उसके चूतड़ों को दोनों हाथों से पकड़ चोद रहा था।

रानी का पति दोनों ओर देख रहा था और कभी रानी के सर पर हाथ फेरता तो कभी उसकी नीचे को लटकती हुई चूचियों को सहलाता।

मेरे लण्ड में एक अलग ही उबाल आया हुआ था, मन कर रहा था कि यह चुदाई कभी ख़त्म ना हो।

मैं बहुत तेजी से धक्के लगा रहा था, मेरा लण्ड तेजी के साथ रानी की चूत में आ जा रहा था।

तभी मैंने सलोनी को देखा, वो भी जमकर मजा ले रही थी, मामाजी भी लम्बी चुदाई करने के लिए अपना पूरा अनुभव का प्रयोग कर रहे थे।
वो बार बार अपने लण्ड को सलोनी की चूत से बाहर निकाल ले रहे थे, उसके बाद या तो खुद नीचे बैठ सलोनी की चूत अपनी जीभ से चाटने लगते या फिर सलोनी से अपना लण्ड चुसवाते!

और फिर मामाजी ने एक और किलकारी की, उन्होंने सलोनी को गद्दे के ऊपर सीधा लिटाकर उसके दोनों पैर हवा में उठा दिए, सलोनी की चूत सामने खिलकर आ गई, उन्होंने अपना लण्ड एक ही झटके में अंदर डाल दिया!
और फिर से उसको चोदने लगे।

पर मैंने अपना आसन नहीं बदला वरना सलोनी की चुदाई देखने में परेशानी हो जाती।
हाँ, मैंने छेद जरूर बदलने की सोची और मैंने अपना लण्ड रानी की चूत से बाहर निकाल लिया।

कहानी जारी रहेगी।

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