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मेरी चालू बीवी-105

Meri Chalu Biwi-105

सम्पादक – इमरान

मेरी कहानी का पिछला भाग :  मेरी चालू बीवी-104
तभी सलोनी मुझसे बोली- सुनो, क्या आप अपना काम 4 दिनों के लिए नहीं छोड़ सकते? देखो ये दोनों ही कल ही साथ चलने के लिए ज़िद कर रही हैं।
मुझे तो खुद शादी में जाने की जल्दी थी, सलोनी को क्या पता कि मैंने वहाँ मस्ती करने का कितना खाका तैयार कर रखा है- हाँ मेरी जान… सब कुछ तुम्हारे लिए ही तो कर रहा हूँ।
और मैंने सलोनी को अपनी बाँहों में जकड़ कर चूम लिया।

पहली बार ऋतु बोली- वाओ भैया… और हमारा किस?
उसने एक शार्ट मिडी पहन रखी थी, मैंने उसकी ओर देखा, उसकी मांसल और गदराई जांघें नंगी दिख रही थी, शैतान ने अपनी टांगों के बीच के गैप को और चौड़ा कर दिया। उसने अंदर सिल्की, चमकदार लाल कच्छी पहन रखी थी, उसकी गोरी-गोरी जांघों से चमकती लाल कच्छी उसको बहुत ही सेक्सी दिखा रही थी।

मैंने भी उसकी कच्छी से चमकती चूत के होंटों को देखकर कहा- चिंता न कर, तेरे भी इन लाल-लाल होंठों को भी चूम लेंगे।
सभी जोर से हंसने लगे।
अब शादी में तो इस फ़ुलझड़ियों के साथ बहुत ही मजा आने वाला था।

उस रात बहुत मजा आया, सलोनी बहुत ही खुश थी.. हमने खूब मस्ती की, सलोनी ने मेरे साथ एक मजेदार चुदाई का आनन्द लिया।
मैंने बहुत कोशिश की और कई बार उससे बात करनी चाही कि वो मेरे साथ सेक्स की बातें करे और मुझे अपने बारे में भी बताये, पर उसने इसमें कोई रूचि नहीं ली, यहाँ तक कि मैंने जब अनु की बात करनी शुरू की जिससे वो किसी दूसरे के साथ सेक्स को नार्मल मानकर खुल जाये, तो यहाँ भी उसने मेरी बात को खत्म कर दिया।

मुझे लगा कि सलोनी हमारे रिश्ते को एक साइलेंट प्यार की तरह चलाये रखना चाहती है, वो हर तरह से जायज-नाजायज सेक्स करना तो चाहती है पर आपस में उसका जिक्र करना नहीं चाहती।
शायद कुछ नारियाँ ऐसी होती हैं जो बहुत हॉट होती हैं, हर तरह से एक रंडी की तरह भी चुदाई करती हैं पर उनके अंदर एक शरीफ औरत हमेशा जिन्दा रहती है।

सलोनी उन्हीं में से एक थी जो बाहर हर तरह की चुदाई करने को तैयार रहती है, उसको पता था कि मैं भी हर किसी के साथ, जो मिल जाए, चुदाई करता था पर इस पर आपस में कोई बात नहीं करनी है, मतलब मुझे देखकर उसने आँख बंद कर लेनी है, और अब लग रहा था कि उसको देखकर भी मुझे भी ऐसा ही करना होगा, पति-पत्नी के सम्बन्धों के बाहर यौनसन्सर्ग को हम दोनों को मूक सहमति देनी है, हमारे आस पास सब कुछ होता भी रहेगा और एक दूसरे की सहायता भी करेंगे पर आपस में इस बारे में बात नहीं करेंगे।

इसके माने एक अलग ही तरह का ‘साइलेंट लव…’
मैंने भी अब सोच लिया था कि अब केवल छुप कर नहीं देखूँगा, सलोनी को भी अहसास होना चाहिए कि मैंने भी देखकर अपनी आँखें बंद कर ली हैं।
उस दिन सुबह भी कुछ ऐसा ही हुआ, सलोनी रोज की तरह ही दूधवाले के आने पर उठी। रात को जोरदार सेक्स के बाद वो बिल्कुल नंगी मेरे से चिपकी हुई सो रही थी, घण्टी बजने पर उसने मेरे माथे पर एक गर्म चुम्बन लिया और मेरे लण्ड को भी कसकर अपनी मुट्ठी में भींचा, वैसे भी उसकी आदत लण्ड पर हाथ रखकर सोने की है, मैंने भी उसके होंठों को चूमा।

फिर उसने उठकर एक जोर की अंगराई ली और वहीं रखे अपने शार्ट गाउन को उठाकर पहना।

मैंने देखा कि उसका गाउन पीछे से इतना सिकुड़ गया था कि बमुश्किल ही सलोनी के विशाल चूतड़ को ढक पा रहा था।
फिर भी उसने गाउन के ऊपर वाला भाग नहीं पहना और वो बाहर चली गई।

आज उसको अच्छी तरह पता था कि मैं जाग गया हूँ फिर भी उसने बदन ढकने का कोई प्रयास नहीं किया।
पर आज मैं उसको दूध वाले के साथ देखना चाहता था कि वो क्या करती है और उससे किस हद तक खुल चुकी है?
मैं रिलैक्स था, मैंने आराम से ही दरवाजा खोला और उन लोगों को देखने लगा।

सलोनी दरवाजा खोलने के बाद ही रसोई से बर्तन लेने गई, लगता है कि दूधवाले ने सलोनी के पिछले भाग के दर्शन अच्छी तरह से ही कर लिए थे, तभी साला अपनी धोती में हाथ डाल लण्ड वाले भाग को सहला रहा था।
मैंने आज पहले बार ही अपने दूधवाले को ध्यान से देखा, 45-48 साल का थोड़ा मोटा सा बंदा था… सर पर एक चोटी और रौबीली मूछें, शरीर से पहलवान टाइप ही लग रहा था, ऊपर एक बनियान और नीचे धोती पहने हुए था।

इस समय उसका हाथ अपनी धोती के अंदर था, सलोनी के आने पर भी उसने अपना हाथ नहीं निकाला बल्कि धोती को उसने और साइड में कर दिया…
अर…रे यह तो उसने अपना लण्ड नंगा करके धोती से बाहर निकाल लिया।
बैडरूम से तो वो साधारण सा ही नजर आ रहा था, हाँ था बिल्कुल गहरा काला, जिसे वो मुठ के अंदाज में ही अपने सीधे हाथ से आगे पीछे कर रहा था।

सलोनी- ओह, तुम फिर शुरू हो गए… ये सब तुम अपने घर पर ही करके आया करो… अब इन्ही गंदे हाथ से दूध दोगे।
दूधवाला- क्या मैडम जी ?? आप भी कैसे बाता करियो हो… दूध ही तो निकल रहा हूँ… और ये तो आप जैसी गोरी गाय को देखन ही दूध देवे है…
सलोनी- हा हा… मतलब मैं गाय… तो इस सांड ने क्या देख लिया इस गाय का? जो हिनहिनाने लगा?

दूधवाला- अह्ह्ह अह्हा… अरे वही मैडम जी जो बेचारा देख तो लेता है… पर छू नहीं पाता… अह्हा…
सलोनी- वो तो हाँ… इसको वो कुछ छूने की कोई इज़ाज़त नहीं है, देखने को मिल जाती है बस इतना ही बहुत है।
ऐसा लग रहा था कि सलोनी इस दूधवाले से काफी मस्ती करती थी।

दूधवाला- ठीक है मैडम जी जैसी आपकी मर्जी, वैसे एक बात बोलूँ… आपकी चुनमुनिया है गजब की, उस जैसी सुन्दर और मुलायम मैंने आज तक नहीं देखी, बस एक ही बार अपने छूने दिया था, कितनी गर्म और रुई जैसी थी।
सलोनी- हा हा… बस अब जल्दी करो… और हाँ आज एक किलो ही देना, फिर चार दिन मत आना, हम लोग बाहर जा रहे हैं।

दूधवाला- ओह.. ये का कह रही हो मैडम जी… आपके बिना अब हमार इसका दिल कहाँ लागेगा, और वो नीचे भी सभी जा रहे हैं।
सलोनी- हाँ, मुझे भी उन्हीं के साथ शादी में जाना है।
दूधवाला- ओह, ये तो बहुत ही बुरी खबर है हमार लिए..
वो अभी भी अपना लण्ड हिलाये जा रहा था।
सलोनी- ओह, आज तुम्हें क्या हुआ? जल्दी क्यों नहीं करते, मुझे अभी बहुत काम करने हैं।

दूधवाला- अब काय करे मैडम जी.. आज तो अपनी दिखा भी नहीं रही… और फिर… अह्ह्ह अह्हा
सलोनी- ओह तुम मानोगे थोड़ी ना… लाओ, मैं जल्दी से निकाल देती हूँ।
और मेरे देखते ही देखते सलोनी ने उसके लण्ड को अपने हाथ से पकड़ लिया।
दूधवाला- आह्हाआआ बस यही तो मैं कह रहा था… अह्ह्हाआआ अह्ह्हाआआ जब आप अपने हाथों से करे हैं तो मजा आ जात है… अह्हा ह्हह्हाआह्ह
सलोनी- और अब ये सब तू अपनी घरवाली के साथ करके आया कर… बेकार में दूसरी को देख लार टपकाता रहता है।

दूधवाला- अह्ह्ह्ह्हा अह्ह्ह्ह्हाआ कहाँ मैडम जी… आप आःह्हाआ अह्हा और कहाँ वो काली कलूटी… अह्हा अह्हा उसकी वो काली और चौड़ी सी… उसको देखकर तो मेरा लौड़ा खड़ा भी ना होबे अब… आह्हा अह्ह्हाआआआ।
सलोनी- तो वो भी किसी से भिड़ी है क्या??

दूधवाला- मोहे कआ पता नाही… भिड़ी तो होबे ही… वो साला दो लोंडे… मुस्टंडे जो रखे हैं… उहनी से भिड़बाटी होए ससुरी… जब देखो उन्ही के पास मिले है…
सलोनी उसके बिल्कुल पास खड़ी थी… और अपने एक हाथ में दूध का बर्तन लिए और दूसरे हाथ से उसके लण्ड को हिला रही थी।

तभी उस दूधवाले ने अपना हाथ सलोनी के पीछे उसके चूतड़ों पर रख दिया, मैंने साफ़ साफ़ देखा कि उसने सलोनी के सिमटे हुए गाउन को और ऊपर तक कर दिया और सलोनी के चिकने चिकने नंगे चूतड़ों पर अपनी मोटी सी भद्दी हथेली को चारों ओर घुमाया।
सलोनी ने एक हल्का सा झटका दिया- ऐऐऐ ऐआआआ ये क्या हो रहा है?? तुझे इधर उधर हाथ रखने को मना किया है ना…

दूधवाला- ओह मैडम जी जरा सा रखने दो ना.. जल्दी से हो जायेगा… आह्ह्हा अह्ह्ह्ह अह्हा वरना कहाँ मिलती है इतनी चिकनी… जिस दिन से आपकी चुनमुनिया को छुआ है… तबसे ससुरी रुई भी उसके आगे बेकार लागे है।
सलोनी- अच्छा उसको तू छोड़… उस दिन भी तूने धोखे से ही हाथ मार दिया था… यह बता तूने अपनी आँखों से देखा क्या अपनी लुगाई को उन छोरों के साथ?

दूधवाला- हाँ मैडम जी… रोज ही भरी दोपहर में जब हमारी भैसों को नहलाने जावत है… तो वो तो भैंसों को मलत है… और वो दोनों हरामजादे उसको मलत हैं…
सलोनी- क्यों… क्या वो कपड़े पहनकर नहीं जाती वहाँ?

दूधवाला- अरे कहाँ ससुरी… केवल एक छोटा का अंगोछा लपेट रहत… वो भी ससुरे निकल देवें और बाद में वहीँ भैसों से टिकाकर चोदव भी उसे… हरामजादे… मादरचोद साले…
सलोनी- देख तू यहाँ गाली तो बक मत… और क्या दोनों एक साथ करते हैं उसको?

दूधवाला- और नहीं तो क्या… कभी एक लगव तो कभी दूसरा… दोनों ही खूब चोदव उसको… अह्ह्हाआ अह्ह्हाआ अब मैडम जी उसकी उस काली भोंसड़ी की तो याद दिलाओ नाहि… उसकी तो याद करते ही बैठने लगाव है हमार… कहाँ आपकी ये रसभरी, मन करत है ..कि बस मुहं में ही भर लूँ..
और उसने अपना दूसरा हाथ आगे से सलोनी की दोनों जाँघों के बीच घुसा दिया।

सलोनी- ओह देखो अब तुम जरुरत से ज्यादा ही करने लगे… अह्हा निकालो अपना हाथ वहाँ से!
दूधवाला- अह्हा ह्हाआ अह्हाआ अह्हा ह ह्हाआ ह ह्ह्ह्ह्हाआ बस्स्स हो गया मैडम जी… बस्स जरा सा तेज आह्ह आआअ…
सलोनी भले ही मना कर रही थी, पर उसने अपना कोई हाथ नहीं हटाया था, वो आगे और पीछे दोनों तरफ से ही सलोनी को सहला रहा था।
और तभी उसके लण्ड से एक तेज पिचकारी निकली…

दूधवाला- अह्ह्ह्हाआआआ अह्हा कमल हो गया मैडम जी… अह्ह्हाआआ अह्हा अह्हा क्या मजा आया… अह्हाआआआ
सलोनी ने अपने हाथों से ही सहलाकर उसके लण्ड को साफ कर दिया- चल अब छोड़ सब कुछ जल्दी से दूध दे… और जा यहाँ से… अपनी जोरू की रासलीला देख वहाँ जाकर।
दूधवाला- अह्हा अह्ह्ह हाँ मैडम जी, सच आप बहुत अच्छी हो!
और फिर दूधवाला दूध देकर चला गया।

मैं भी सिगरेट जलाकर उसी समय बाहर निकला, फर्श काफी गन्दा था पर मेरे सामने ही सलोनी ने बिना कुछ कहे कपड़ा लाकर फर्श को साफ़ कर दिया और कहा- रोज ही दूध गिरा जाता है, पता नहीं कैसे काम करता है।
मैं भी उसकी बात को समझ गया पर क्या कहता?

मैं- हाँ मेरी जान, सही से दूध अपने बर्तन में लिया करो, ऐसे बेकार मत किया करो।
और मुस्कुरा दिया, वो भी मुस्कुरा रही थी।

मैं- अच्छा कितने बजे निकलना होगा?
सलोनी- शायद दोपहर के बाद ही… ऐसा करते हैं हम अपनी गाड़ी लेकर ही निकलते हैं।

मैं- ठीक है, देख लेना, और कोई आना चाहे तो ! मैं ऐसा करता हूँ ऑफिस जाकर सब काम सेट करके आ जाता हूँ।
सलोनी- ठीक है.. पर जल्दी आ जाना।
और मैं जल्दी से तैयार होकर ऑफिस के लिए निकल गया यह सोचता हुआ कि बहुत मजा आने वाला था शादी में…!!!
कहानी जारी रहेगी।

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