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मेरे टीचर ने की मेरी पहली चुदाई-2

Mere Teacher Ne Ki Meri Pahli Chudai- Part 2

मेरी चुदाई कहानी के पहले भाग
मेरे टीचर ने की मेरी पहली चुदाई-1
में आपने पढ़ा कि कैसे मेरे टीचर ने मुझे पास करवाने के बदले में मेरी चूत गांड मांग ली और हम दोनों ने कैसे ओरल सेक्स का मजा लिया.
अब आगे:

टीचर का लंड चूसने के बाद मेरे चेहरे पर काफी वीर्य लग गया था और मैं चेहरा साफ करना भूल गई थी, अभी भी सर का वीर्य मेरे गालों पर लगा था और सूख गया था। वो तो अच्छा हुआ कि आंटी सीधी रसोई में चली गई नहीं तो उनको शक हो जाता।

रास्ते में मुझे अपना चेहरा सख्त सा लगने लगा तो मैंने गाल पर हाथ लगाया। तब याद आया ये सर का वीर्य है जो साफ नहीं किया। सर के घर से हमारे घर आते एक पार्क आता है तो वहां नल चला कर मैंने अच्छे से चेहरा साफ किया फिर घर गई।

मैं घर आकर मम्मी पापा से बोली- आज खाना जल्दी बना देना, आज बहुत पढ़ाई करनी है।
मैं ऊपर आकर सीधा बाथरूम में घुस गई और पूरे बदन के बाल साफ किए और नहा कर लोअर और टी शर्ट पहन ली।

तब मम्मी ने खाने के लिए आवाज लगा दी। मैं नीचे गई और खाना खाते हुए बताया- सर ने कहा है कल सुबह 9 बजे से 2 बजे तक स्कूल में पढ़ाई होगी और फिर सर के घर जाना है फिर 6 बजे के बाद ही आऊंगी! और कोई भी ड्रेस पहन कर जा सकते हैं।

तभी सब ने खाना खा लिया और पापा ने सर से फोन पर बात की तो सर ने कहा- जो बच्चे थोडे़ कमजोर हैं, पढ़ाई में उनको बुलाया है।
पापा को यकीन हो गया कि मैं सही बोल रही हूं।
मैंने दूध का गिलास उठाया और सब को गुड नाईट बोलकर ऊपर अपने रूम में आ गई।

मेरे मम्मी-पापा जल्दी सो जाते हैं, सिर्फ मैं और दीदी ही पढ़ाई के लिए जागती थीं, भाई भी तब जल्दी सो जाता था।
करीब 9 बजे सभी लाईट बंद करके लेट गए।

तभी दीदी मेरे कमरे में आई और बोली- कल को तू भी खुल जाएगी।
मैंने कहा- क्या दीदी? क्या खुल जाऊंगी?
तब दीदी ने बताया कि सर ने उसको भी ऐसे ही बुलाया था और उसके साथ चुदाई की थी।

फिर दीदी ने कहा- तुझे पोर्न मूवी भी दी होगी देखने को… अभी देख ली या देखनी है?
अब छुपाने का कोई फायदा नहीं था और मैंने कहा- देखनी है दीदी।
दीदी ने कहा- देखकर सुबह मुझे दे देना, मुझे भी देखनी है।

यह कह कर दीदी अपने कमरे में चली गई। आधे घंटे बाद मैंने सीढ़ियों का दरवाजा बंद कर लिया और कंप्यूटर चालू करके पैन ड्राइव लगा दी, साथ हैड फोन लगा लिए ताकि आवाज़ न हो। मूवीज़ देखते देखते मैं इतनी गर्म हो गई कि मैंने अपनी लोअर और टॉप निकाल दिया और नंगी बैठकर मूवीज देखने लगी।
मैंने दो मूवीज़ देखी और दो बार चूत में उंगली की। उसके बाद मैंने पैन ड्राइव छुपा दी और लाईट बंद करके लेट गई।

लेकिन नींद नहीं आ रही थी, आज जो हुआ उसको सोच कर गर्म हो रही थी और कल की होने वाली चुदाई के बारे सोच कर दिमाग को सेक्स चढ़ रहा था. सोचते सोचते मैं इतनी गर्म हो गई कि पता ही नहीं चला कब हाथ चूत पर चला गया और उंगली चूत के अंदर। मैंने एक बार फिर चूत में उंगली की और फिर आँखें बंद करके लेट गई।

उसके बाद कब नींद आ गई कुछ मालूम नहीं।

एक बार सुबह चूत में उंगली की थी, फिर सर ने चूत चाट कर मुझे झडा़ दिया आब तीन बार फिर चूत में उंगली करके झड़ गई। इतनी बार झड़ने के बाद ऐसी अच्छी नींद आई कि सुबह 6 बजे अलार्म की आवाज से आंख खुली नहीं तो रात में मेरी कम से कम चार पांच बार नींद खुलती थी।

अगले दिन मैं नहा कर तैयार हो गई। मैंने नीले रंग की टाईट जींस और हरे रंग की बॉडी फिट शर्ट पहन ली, नीचे हरे रंग की ब्रा एवं पैंटी पहन ली। मैंने चोटी बनाई और सैंडिल काले सैंडिल पहन कर जाने को तैयार हो गई।
जब जाने लगी तो मम्मी ने कहा- कपड़े तो अच्छे लग रहे हैं पर सैंडिल मैच नहीं कर रहे, इसके साथ सफेद अच्छे लगेगें।
मैंने कहा- सफेद थोडे़ टूटे हुए हैं।

मेरा और मम्मी के पैर का साईज़ एक ही है। मैंने कहा- मम्मी, आपके पास भी सफेद सैंडिल हैं वो पहन लूं?
मम्मी ने कहा- उनकी हील बहुत ऊंची है, गिर मत जाना।
मैंने मम्मी के सैंडिल पहनते हुए कहा- अब मैं बच्ची नहीं हूं, पहन कर चल सकती हूं।

सैंडिल पहन कर आईने में फिर से खुद को देखा कि ऊंची हील से मेरी गांड और भी बाहर को उभर आई थी और बूब्ज़ भी मस्त लग रहे थे।
मैं सर के घर के लिए निकल पडी़। जहां से भी निकलती, सब लड़के और मर्द मेरी हिलती हुई गांड को देख कर मजा ले रहे थे। कुछ बाईक सवार लड़कों ने बार बार चक्कर भी लगाए, हैलो कहा, एक बार रुक कर बात करने को कहा लेकिन मैंने किसी को जवाब नहीं दिया सीधा सर के घर पहुंच गई।

तब जाकर लड़कों ने पीछा छोडा़.

सर के घर का दरवाजा खुला था और सर कमरे में खड़े कोई किताब देख रहे थे। मैं बिल्कुल बेशर्म बन कर दबे पांव सर के पीछे आ गई और कसकर सर को पीछे से बांहों में भर लिया। मेरे बूब्ज़ सर की पीठ में दब गए।
सर ने कहा- आ गई मेरी शिल्पा जान!
तो मैंने कहा- जी सर।
सर ने कहा- क्या सर सर लगा रखी है अब तो जानूं बुलाओ।
मैंने कहा- ठीक है जानूं डार्लिंग!

और मैं पीछे से सर की गर्दन चूमने लगी और सर के मुंह से आहें निकलने लगीं। मैं अपने बूब्ज़ सर की पीठ पर मसलते हुए सर के कान को चूसने लगी और सर के जिस्म में ऐसा लग रहा था जैसे आग निकल रही हो।

सर ने कहा- जानेमन, सामने आकर चेहरा तो दिखा दे।
मैं सर के सामने कमर पर हाथ रख कर खड़ी हो गई और कहा- लो देख लो डार्लिंग।
सर ने कहा- आज बहुत सेक्सी लग रही हो… लेकिन एक कमी है।
सर ने मेरी चोटी खोल दी और बाल खुले छोड़ दिए।

सर मुझे गोद में उठा कर अपने कमरे में ले आए और मुझे आईने के सामने खड़ी कर दिया। सर ने कहा- अब कंघी से बाल अच्छे से संवार लो!
और खुद बैड पर बैठ गए।

मैंने बाल ठीक करके कमरे को देखा, वहां पर एक सोफा सैट, डबल बैड, बड़ा टेबल और बडा सा एलसीडी था। कमरे में एसी लगा हुआ था और सुंदर सा पंखा चल रहा था। कमरे से मीठी मीठी महक आ रही थी जो मुझे मदहोश कर रही थी।

सर ने कहा- हां तो शिल्पा, आज चुदाई की पढ़ाई करते हैं।
मैंने कहा- वो तो ठीक है सर… लेकिन मैंने सुना है पहली चुदाई में दर्द होता है और खून भी निकलता है।

सर थोडा़ सा हंस दिए और बोले- शिल्पा, मैं कोई अनाड़ी नहीं हूं, बहुत लड़कियों की सील तोड़ चुका हूं, तेरी बड़ी बहन की सील भी मैंने ही तोड़ी थी।
मैंने कहा- मुझे पता है सर कि दीदी की पहली चुदाई आप ने ही की थी और उसको बहुत मजा आया था, तभी तो मैं चुदाई के लिए मान गई।
सर ने कहा- तुम घबराओ मत, जब एक बार चूत के अंदर लंड जाएगा तो दर्द होगा। जब तक मेरा पूरा लंड अंदर नहीं जाता तब तक सहन कर लेना उसके बाद स्वर्ग दिखाई देगा।
मैंने कहा ठीक है सर, कोशिश करुंगी लेकिन अगर मैं निकालने के लिए बोलूं तो भी मत छोड़ना।
सर ने कहा- तुम न भी कहती तो भी नहीं छोड़ता।

सर ने दिल के आकार की लाल रंग की गोलियों का पत्ता निकाल कर टेबल पर रख दिया और खुद बाहर चले गए। मैंने उसको उठा कर देखा तो उसके पीछे ***100 लिखा हुआ था। मैंने सोचा सर की कोई दवा होगी तो वहीं पर रख दिया।

टीचर जी एक गिलास में पानी लेकर आए और दो गोलियां निकाल लीं।
सर ने मुझे मुंह खोलने को कहा और मेरी जीभ पर गोली रख दी। सर ने मेरे होंठों को पानी का गिलास लगा दिया और गोली खाने को कहा। मैंने आधे गिलास से गोली अंदर कर ली।
तभी सर ने बाकी बचे पानी से दूसरी गोली खुद खा ली।

मैंने कहा- सर पानी मेरा जूठा था!
तो सर बोले- मुझे मालूम है पानी तुम्हारा जूठा था। लेकिन अब क्या फर्क पड़ता है अब हमारे होंठ एक दूसरे से मिल जाएंगे और एक दूसरे के होंठों का रस पिएंगे तो कैसी जूठ रह गई।

सर ने मुझे बैड पर टांगे ऊपर रखकर ठीक से बैठने को कहा।

जैसे ही मैं सैंडिल उतारने लगी सर ने रोक दिया, सर ने कहा- सैंडिल के साथ ही ऊपर आ जाओ, इसमें बहुत सेक्सी लगती हो।
मैंने कहा- सर चादर गंदी हो जाएगी!
तो बोले- नई चादर बदल देंगे. वैसे भी मुझे ही चादर धोनी पडे़गी।

मैंने कहा- क्यों सर, आपके तो कपड़े धोने वाली काम करती है।
सर ने कहा- अरे पगली, तेरी सील टूटने का बाद इस पर खून लग जाएगा। ऐसे ही रख दी तो तेरी आंटी को शक हो जाएगा।

मैं हंस दी और कहा- आज के बाद वो मेरी आंटी नहीं रही मेरी सौतन बन जाएगी।
सर भी हंस पडे़ और बोले- बिल्कुल सही कहा शिल्पा।

जवान स्कूल गर्ल की चुदाई कहानी जारी रहेगी.
jindalshilpa700@gmail.com

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