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मैं सैंडविच बन कर चुदी-2

Mai Sandwitch Ban Kar Chudi-2

आपने मेरी कहानी
 मैं सैंडविच बन कर चुदी-1
पढ़ी होगी अगर नहीं पढ़ी तो पढ़ लीजिए.

जब ये सब हो रहा था तो वीरेन ने मेरा हाथ पकड़ा और उसने अपना तना हुआ लिंग पकड़ा दिया।
मैंने अपना हाथ झटक दिया और अनुराग से कहा- अनुराग, अपने दोस्त को समझाओ, ये क्या कर रहा है?
‘अरे यार.. तो क्या हो गया.. तुमने ‘बाइ वन गेट वन फ्री’ के बारे में नहीं सुना..! अब हम एंजाय कर रहे हैं, तो पास बैठे उसका दिल भी तो करेगा… चिल यार.. उसका भी मन बहला दे… बुरा मत मान।’ अनुराग ने बड़ी ढीठपने से कहा।
मैंने भी सोचा कि इसमें बुरा भी क्या है। जब मैंने दोबारा अनुराग का लिंग मुँह में लिया, तो वीरेन अपना लिंग फिर मेरे हाथ में पकड़ा दिया। मैंने पकड़ लिया और उसका लिंग भी सहलाने लगी।
दो मिनट के बाद अपना लिंग मेरे मुँह से बाहर निकाला, तो वीरेन ने मुझे अपनी तरफ खींचा और अपना लिंग मेरे मुँह से लगा दिया। मैंने उसका लिंग मुँह में लिया और चूसने लगी और अनुराग का लिंग सहलाने लगी।
अब वीरेन की हिम्मत बढ़ गई और उसने भी मेरे मम्मों को दबाने शुरू कर दिए। अब मैं कभी अनुराग का तो कभी वीरेन का लंड चूस रही थी।
मेरी अपनी चड्डी पूरी तरह से भीगी हुई थी। मैं चाहती थी कि अब तो ये दोनों चाहें मुझे यहीं ठोक दें, पर सिनेमा हॉल में यह सम्भव नहीं था।
दोनों मेरे मम्मों को दबा रहे थे और मेरी सिलेक्स में हाथ डाल कर मेरी योनि और चूतड़ सहला रहे थे। इंटरवल से पहले मेरा पानी छूट गया।
इंटरवल के बाद फिर वही कहानी शुरू हो गई। दोनों ने फिल्म के दौरान दो-दो बार अपना पानी छुड़वा दिया, पर मेरी प्यास नहीं बुझी।
मैंने अनुराग से कहा- यार तुम लोग तो दोनों दो-दो बार मज़े ले गए, पर मेरा कुछ नहीं बना, मेरी तो हालत बहुत खराब है, मैं क्या करूँ?
अनुराग बोला- डोन्ट वरी डार्लिंग, नेक्स्ट टाइम तेरी ही प्यास बुझाएंगे.. और दोनों मिल कर बुझाएंगे.. बोल मंज़ूर है?
‘मंज़ूर है, पर ज़्यादा लेट मत करना, अब बर्दाश्त नहीं होता..!’
ठीक तीन दिन बाद अनुराग ने बताया कि कल हमारे घर में कोई नहीं होगा, तुम सुबह तैयार हो कर स्कूल के लिए निकलना, पर मैं तुम्हें उस से पहले ही अपने घर ले जाऊँगा। स्कूल से छुट्टी और घर में जा कर सेक्स करेंगे।
मैं तो झट से तैयार हो गई।
जिस दिन का प्रोग्राम था, उस दिन सुबह पापा के सेफ्टी रेज़र से अपने ऊपर-नीचे के सारे बाल अच्छी तरह साफ़ किए। अपनी योनि को अच्छी तरह से धोकर साफ़ किया। चड्डी में भी पर्फ्यूम लगाया। उस दिन शर्ट के नीचे से सिर्फ़ ब्रा पहनी अंडरशर्ट नहीं पहनी, ताकि ज़्यादा सेक्सी लगूँ और स्कूल ड्रेस पहन कर घर से ऐसे निकली जैसे स्कूल ही जा रही हूँ।
घर से थोड़ी दूर जाते ही मुझे अनुराग मिला, उसकी बाइक के पीछे बैठ कर मैं उसके घर पहुँची।
घर पहुँच कर हम सीधा बेडरूम में गए। वहाँ वीरेन पहले से ही था।
मैंने पूछा- अनु, यह वीरेन यहाँ क्या कर रहा है?
‘अरे, यह भी आज स्कूल नहीं गया!’
वीरेन बोला- मैं तुम्हारी रखवाली करूँगा।
मुझे कोई ऐतराज़ नहीं था।
हम दोनों बेड पर लेट गए, अनुराग ने मुझे बाँहों में भर लिया और दोनों ने चूमा-चाटी शुरू की।
होंठों के बाद एक-दूसरे की जीभ चूसने लगे। अनुराग कभी मेरे मम्मों तो कभी मेरे कूल्हे सहला रहा था। मेरी स्कर्ट उसने पूरी ऊपर उठा दी थी। मेरी ग्रे स्कर्ट के नीचे से मेरी सफ़ेद चड्डी पूरी तरह से बाहर दिख रही थी।
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अनुराग ने मेरी शर्ट के बटन खोल दिए और मेरी शर्ट उतार दी। फिर मेरी ब्रा भी उतार दी। मैंने कोई विरोध नहीं किया, उसके बाद मेरी स्कर्ट और चड्डी भी उतार दी।
उसके बाद मैंने उसके कपड़े उतारे। उसने सिर्फ़ जीन्स और टी-शर्ट पहनी थी। जीन्स उतरते ही उसका तना हुआ लिंग बाहर आ गया। उसने भी शेव कर रखी थी, जिस कारण उसका लिंग ज़्यादा बड़ा लग रहा था। उसने मुझे नीचे बिठाया, मैं उसका इशारा समझ गई। मैंने नीचे बैठ कर उसका लिंग मुँह में ले लिया और चूसने लगी। इसी दौरान वीरेन मोबाइल पर हम दोनों की वीडियो शूट कर रहा था।
फिर अनुराग ने मुझे दीवार के साथ लगा कर खड़ा किया और नीचे बैठ कर मेरी योनि में मुँह लगा दिया और अपनी जीभ से चाटने लगा।
यह मेरे लिए बर्दाश्त से बाहर की बात थी। खैर… थोड़ी देर चाटने के बाद उसने मुझे बेड पर लिटाया।
‘संजू, क्या तुम इसके लिए तैयार हो?’
मैंने ‘हाँ’ में सर हिलाया, तो उसने अपना लिंग मेरी योनि पर रखा। मुझे थोड़ा डर भी लग रहा था, पर खुशी इस बात की ज़्यादा थी कि आज मैं भी सेक्स कर रही हूँ।
फिर अनुराग ने धीरे से अपना लिंग अन्दर को धकेला, एक ज़ोरदार दर्द का अहसास हुआ ‘अ..या..या..’ मेरे मुँह से चीख निकली।
पर अनुराग ने उसकी परवाह नहीं की, वो थोड़ा पीछे हुआ और फिर अन्दर धकेला, और दर्द हुआ, पर मैंने उसे मना नहीं किया। थोड़ी देर बाद उसका पूरा लिंग मेरे अन्दर था।
मेरी आँखों से पानी निकल रहा था, ऐसे लगता था जैसे किसी ने मुझे बीच मे से चीर दिया हो, एक मोटी लोहे की छड़ मेरे जिस्म के अन्दर डाल दी हो।
मैंने दर्द को सहा और अनुराग का पूरा साथ दिया। वो फिर आगे-पीछे होने लगा।
मुझे लग रहा था जैसे कोई मुझे अन्दर से छील रहा है, पर ये अहसास भी बड़ा प्यारा था।
फिर वीरेन भी पूरी तरह से नंगा होकर के हमारे साथ आ गया। उसने अपना लिंग मेरे मुँह में दे दिया।
अब एक लिंग मेरे मुँह में था और दूसरा मेरी योनि में था। पहले मुझे अनुराग ने चोदा और अपना सारा माल मेरे बदन पर छुड़वा दिया।
फिर वीरेन मेरे ऊपर आ गया और अनुराग मेरी वीडियो बनाने लगा।
वीरेन ने मुझे बड़े प्यार से चोदा। उसका स्टाइल भी मुझे अच्छा लगा।
पहले मेरे पानी छूटा और उसके बाद वीरेन ने मेरे मुँह के ऊपर अपना माल गिराया, थोड़ा सा ज़बरदस्ती पिलाया भी।
फिर हम नहाने चले गए, तीनों एक साथ नंगे नहाए। नहाने के दौरान भी उन्होंने मुझे जी भर के प्यार किया, अपने हाथों से मुझे नहलाया, मेरे पूरे बदन पर साबुन लगाया और मैंने भी ऐसा ही किया। मुझे सैंडविच बना कर एक मेरे आगे से रग़ड़ रहा था तो दूसरा पीछे से धकापेल करने में लगा था।
स्कूल तीन बजे बंद होता था, सो सुबह नौ बजे से लेकर दोपहर तीन बजे तक हम बिल्कुल नंगे रहे और उस दिन दोनों ने मेरी जाम कर ठुकाई की।
सारे घर में हम सारा दिन बिल्कुल नंगे रहे और जिसका जब दिल करता, जहाँ दिल करता, कोई मेरे मुँह में डालता तो कोई मेरी योनि में डाल कर ठोकता, कोई मम्मों को चूसता, कोई दबाता। उस एक दिन को हमने हनीमून की तरह मनाया।
मैं एक दुल्हन, वो दो दूल्हे..!
मैंने अनुराग की मम्मी का मेकअप का सामान यूज किया और तरह-तरह से सजधज कर हमने सेक्स का आनन्द उठाया।
उस दिन उन दोनों ने मुझे तीन-तीन बार ठोका और मेरी 6 बार बजाई। जो थोड़ी-थोड़ी देर के लिए शौकिया तौर पर अन्दर-बाहर डालते रहे वो अलग।
जब मैं घर वापिस आई तो मेरा पूरा बदन टूट रहा था। घर आ कर मैं निढाल हो कर बिस्तर पर गिर गई और आज दिन भर जो मैंने किया, उसके बारे में सोचने लगी और यह सोचने लगी कि कल स्कूल जा कर मैं अपनी सहेलियों के सामने क्या शेखी बघारूँगी।
मुझे आप अपने विचार यहाँ मेल करें।
alberto62lopez@yahoo.in

 

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