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कुंवारी चूतों का मेला-2

Kunvari Chuton ka Mela-2

कहानी का पिछला भाग : कुंवारी चूतों का मेला-1

फिर एक दिन सभी ने निर्णय लिया कि घर के अंदर हम पाँचों में से कोई भी एक कपड़ा भी नहीं पहनेगा, यदि कोई भी कपड़े पहने हुए दिख गया तो उसे 500/- का फाइन भरना पड़ेगा।

एक दिन शांति और शिखा ने मुझसे पूछा- विशु, हमारी एक सहेली और उसकी भाभी को तुम्हारा लंड चाहिए… तो क्या तुम उन दोनों को चोदना चाहोगे?
क्योंकि तुम्हारे महाबली लंबे और मोटे लंड के बारे में बताया कि तुम्हारे लंड में बहुत ताक़त है और तुम्हारा वीर्य भी बहुत स्वादिष्ट है इसलिए हमने तुम्हारे बारे में अपनी सहेली और उसकी भाभी को बता दिया तब से उन दोनों की चूत खुजा रही है।

मैंने कहा- ठीक है।

शिखा, शांति, मोनिका और शालू के साथ क्लास में कई लड़कियाँ पढ़ती थी जो चारों की सहेलियाँ भी थी, उन्ही में से एक थी काजल। एक दिन मैं सुबह के समय जब सोकर उठा तो मेरे फ़ोन पर एक कॉल आई और मैंने बात की उधर से एक लड़की की आवाज आई- मैं काजल बोल रही हूँ कमला नगर से।

मैंने कहा- जी कहिये, मैं क्या कर सकता हूँ आपके लिए?

तो उसने कहा- मैं आपसे मिलना चाहती हूँ।

मैंने कहा- बताइये कहाँ मिलना है?

तो वो बोली- आज, अभी, 10 बजे तक आ जाओ !

और अपना पता मुझे नोट करवा दिया।

मैंने अपनी बाइक उठाई और सीधा उसके दिये हुए पते पर पहुँच गया।

मैंने कॉलबेल जब बजाई तो गेट खोलने के लिए एक छोटी सी बच्ची आई तो मैंने उससे पूछा- मुझे काजल जी से मिलना है।

तो उसने कहा- आप यहाँ बैठिये, मैं उन्हें अभी बुलाती हूँ।

करीब 5 मिनट इंतज़ार करने के बाद काजल आई।

उसने मुझसे बैठने के लिए कहा और चाय कॉफी के लिए पूछा।

मैंने कहा- आप मुझसे क्या बात करना चाहती थी जिसके लिए आपने मुझे यहाँ बुलाया है?

तो उसने तुरंत अपनी भाभी ऋतंभरा को आवाज दी।
थोड़ी देर बाद ऋतंभरा भी आ गई तो काज़ल ने मेरा परिचय ऋतंभरा से शालू के जीजू के रूप में करवाया और मुझे बताया- मेरी भाभी महिला मंडल व्यापार प्रकोष्ठ की सदस्या हैं।

मैंने उनसे पूछा- घर के बाक़ी सदस्य कहाँ हैं?

तो काजल ने बताया- भैया बिजनेस के सिलसिले में एक महीने के लिए अमेरिका और गए हैं।

मैंने पूछा- आपके यहाँ किस चीज़ का बिजनेस होता है?

तो बताया- हमारी 10-12 कंपनियों का ग्रुप है जिनमें से कुछ आगरा में हैं और कुछ फरीदाबाद में हैं। जिनमें से आगरा वाली फॅक्टरियों को भैया-भाभी देखते हैं और फरीदाबाद वाली फॅक्टरियों को पापा सँभालते हैं।

ऋतंभरा ने मुझसे पूछा- विशु जी, जैसा कि मुझे आपके घर में रहने वाली चार लड़कियों ने बताया कि आपका हथियार बहुत लंबा और मोटा है और काफी देर बाद ढेर सारा बीज उगलता है? और हम दोनों मिलकर आपके लंड का प्रचार करें तो हमने उन चारों से यही कहा कि हम कैसे मानें कि उनके लंड में बहुत दम है। अगर वाकई उनके लंड में दम है तो वो हमें एक बार अपने लंड का डेमो दें। यदि पसंद आया तो आगे तो रेफर करुँगी अन्यथा नहीं।

मैंने मन ही मन सोचा कि ये लड़कियाँ मेरा कितना खयाल रखती हैं, मेरे लंड के लिए क्लायेंट ढूंढ रही हैं और मुझे पता भी नहीं।

खैर मैंने ऋतंभरा से पूछा- आपको कैसा डेमो चाहिए?

तो उसने मुझसे सीधे कहा- पहले हमें अपना लंड दिखाओ।

मैंने भी देर न करते हुए तुरंत अपनी पेंट की ज़िप खोलकर अपना लंड खोलकर ऋतंभरा के हाथ में पकड़ा दिया कुछ देर में ही फीमेल के हाथ का स्पर्श पाकर वो जल्दी ही लोहे की रॉड की भान्ति तन गया और उसका सुपाड़ा फूल के बहुत मोटा हो गया।

जब लंड अपनी असली रंगत पर आया तो ऋतंभरा और काजल की आँखों में गुलाबी सी चमक आ गई।

कुछ देर वो मेरे लंड के ऊपरी खाल को दो उंगली और एक अंगूठे के सहारे से आगे पीछे करने लागी।

करीब 20 मिनट तक जोर जोर से हिलाने पर भी बीज नहीं निकला बल्कि उसका हाथ हिलाते हिलाते थक गया और दर्द करने लगा तो उसने मुझसे पूछ लिया- तुम्हारा बीज कितनी देर बाद निकलेगा?

तो मैंने कहा- अभी आप और 20 मिनट तक भी हिलाओगी तो भी मेरा बीज नहीं निकलेगा, यह मेरा वादा है आपसे!

तो ऋतंभरा को कहना ही पड़ा- विशु जी, वाकई आपके लंड में बहुत दम है, यह तो चूत या गाँड के परखच्चे उड़ा सकता है लेकिन विशु जी, एक बात का विशेष ध्यान रखने की है कि अभी आप जवान हो इसलिए आपके लंड में बहुत जान है लेकिन जब रोज़ाना लड़की को चोदोगे तो तुम्हारा लण्ड कमज़ोर हो जायेगा और एक समय वो आएगा कि तुम्हें तुम्हारी घरवाली भी तुम्हें घास नहीं डालेगी। क्योंकि लड़की या औरत उस लड़के या आदमी से खुश रहती है जो उसकी चूत का भुर्ता बना दे। इसलिए सोच लो कि तुम्हें खुद से ज्यादा इसका ध्यान रखना पड़ेगा।

मैंने कहा- बात तो सही है, मैं इसका हमेशा ध्यान रखूँगा।

मैं ऋतंभरा और काजल से बात कर ही रहा था कि दरवाजे की घंटी बजी।

मेरी तो डर के मारे गाँड फट गई, मैंने झट से अपना लंड पैंट के अंदर किया पर वह बैठने के बजाय और ज्यादा फूल गया।
देखा तो पता चला कि कोई शरारती बालक था जो घंटी बजाकर भाग गया था।

ऋतंभरा ने कहा- विशु जी क्या मैं आपके लंड को प्यार कर सकती हूँ? वैसे तो मैंने आज तक किसी का भी, यहाँ तक कि अपने पति तक का लंड मैंने नहीं चूमा है क्योंकि मेरे पति का लंड मुश्किल से 4.5 – 5″ का पतला सा है लेकिन आपका तो मुझे दूना लग रहा है।
मैंने कहा- ठीक है!

और अपना लंड पैंट से दुबारा निकाल लिया तो काजल ने ऋतंभरा से कहा- भाभी जब हमें कीमत ही देनी है तो इनको पूरा नंगा करो।

ऋतंभरा काजल की बात मानते हुए मुझसे बोली- विशु जी, यदि आप बुरा न मानें तो हम आपका पूरा शरीर नंगा देखना चाहते हैं।

मैंने कहा- ठीक है, देख लो!

कहकर मैंने अपने सभी कपड़े उतार दिये।

काजल एकदम चिल्लाकर बोली- भाभी, इनके लंड के साथ साथ टट्टे भी कितने बड़े हैं।
और मेरे टट्टे टटोलने लगी जो बीज से भरे थे।

ऋतंभरा ने मेरा लंड झट से मुँह में ले लिया और काजल ने टट्टे।
दोनों ही ऐसे ही चूस रही थीं जैसे जन्म ज्न्म की प्यासी हो।

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मैंने ऋतंभरा के मुँह से तुरंत ही लंड बाहर निकाला और कहा- अगर आपको मेरा लंड चूसना है तो आप लोगों को भी कपड़े उतारने होंगे।

ऋतंभरा ने झट से कहा- हम क्यों उतारें? आपको जरूरत है, आप उतारिये।

मैंने भी फुर्ती से दोनों को नंगी कर दिया।
आय हाय… क्या बदन था ऋतंभरा का !
उसके सामने कुंवारियाँ लड़कियाँ फेल नज़र आ रही थी क्योंकि उसके चूचे एकदम तने हुए गोल और उसकी कमर एकदम स्टाइलिश सुराही के समान, उसकी चूत जिस पर हल्के हल्के भूरे रंग के रोंये थे।

मैं तो सकते में आ गया कि पता नहीं यह शादीशुदा है या अब तक अनचुदी कुँवारी है।

मैंने यह जानने के लिए उसकी चूत में उंगली डाली तो मेरी पूरी उंगली चली गई फिर मैंने दो उंगलियाँ डाली तो दो भी चली गई।

उसके बाद जैसे ही मैंने तीन उंगलियाँ डाली तो ऋतंभरा की हल्कि सी चीख निकल गई।

मैं समझ गया कि इसने बहुत ही छोटे लंड से चुदवाया है।

उसके बाद मैं उसे गोद में उठाकर बिस्तर पर ले गया।

फिर मैंने उसे बेतहाशा चूमना शुरू कर दिया।

सबसे पहले मैंने उसके होंठ, गाल, गर्दन और पेट को बारी बारी से चूमा फिर उसके बाद मैंने उसके कान के पास पीछे की ओर किस किया और सीधे उसके चूचों पर आ गया, मैं एक हाथ से दबाने लगा और दूसरे हाथ से मुँह में लेकर चूसने लगा।

कुछ देर बाद ऋतंभरा ने मेरा मुँह अपने चूचों पर दबा दिया और सिसियाने लगी।

इधर काजल देख देख कर ही बिना हाथ लगाये गरम हो गई और मेरा लंड चूसने लगी जिससे मेरा लंड बहुत ज्यादा टाइट हो गया और काजल के मुँह में आसानी से नहीं घुस पा रहा था इसलिए वो सिर्फ सुपारे की ऊपरी खाल को हटाकर जीभ से चाट रही थी।

फिर धीरे धीरे मैं ऋतंभरा की चूत पर आ गया और अपनी जीभ को नुकीला करके उसके क्लीटोरियस को चाटने लगा।

जैसे ही मैंने अपनी जीभ ऋतंभरा की चूत पर रखी तो वह एकदम ऐसे सिहर गई जैसे उसे 1100 वाट का करंट लगा हो और फिर उसकी चूत में तीन उंगली डालकर आगे पीछे करने लगा।

मैंने करीब इस क्रिया में 15 मिनट लिए होंगे कि ऋतंभरा का बदन हिचकोले खाने लगा, इसके साथ ही वो मेरे सर को अपनी चूत पर दबाने लगी।

कुछ समय पश्चात उसका शरीर ऐंठने लगा और वो आह आह करते हुए मेरे मुँह पर झड़ गई लेकिन फिर भी मैं लगातार उसकी चूत चाटता रहा।

कुछ देर बाद ऋतंभरा फिर से गर्म हो गई और मुझसे कहने लगी- विशु जी अब बर्दाश्त नहीं हो रहा है… मुझे इतना क्यों तड़पा रहे हो? अब डाल भी दो अपना मूसल जैसा लंड।

मैं भी देर न करते हुए ऋतंभरा की टाँगों के बीच आ गया और अपने लंड को ऋतंभरा की चूत पर रगड़ने लगा और सही वक्त देखकर लंड को छेद पर टिका कर एक पूरी ताकत के साथ करारा सा झटका लगा दिया जिससे ऋतंभरा की एक जोरदार चीख निकल गई।

लेकिन मैंने उसकी कोई परवाह न करते हुए लगातार 5-6 धक्के पूरी ताकत के साथ लगाये जिससे ग्राउंड फ्लोर पर काम करने वाली नौकरानी भागी भागी आई और उसने मेरे द्वारा की जा रही ऋतंभरा की चुदाई देखने लगी।

चुदाई देखते देखते वो भी अपने कपड़े उतार कर मैदान में कूद पड़ी और कहने लगी- भाभी, मैं भी चुदना चाहती हूँ।

जब पूरा लंड ऋतंभरा की चूत में घुस गया तो मैं थोड़ी देर के लिए रुक गया और धीरे धीरे धक्के लगाने लगा।

जैसे ही ऋतंभरा का दर्द कुछ कम हुआ तो मैंने अपना लंड ऋतंभरा की चूत से सुपाड़े तक पूरा बाहर खींचकर दुबारा पूरी ताकत के साथ धकेल दिया।

इधर ऋतंभरा ने भी नीचे से कूल्हे मटकाना शुरू कर दिया।

ऋतंभरा को ज्यादा मज़ा आये इसलिए मैंने उसकी टाँगें अपने कंधे पर रख ली जिससे मेरा पूरा लंड उसकी चूत में घुस रहा था।
इस कारण वो जल्दी झड़ गई।

इसी प्रकार से मैंने ऋतंभरा को अलग अलग आसनों में करीब 50 मिनट तक चोदा उसके बाद मेरा सब्र भी जवाब दे गया तो मैंने ऋतंभरा से कहा- मैं झड़ने वाला हूँ, बताओ कहाँ निकालूँ अपना बीज?
तो उसने कहा- नहीं विशु जी चूत में मत झड़ना, अगर आपने बीज चूत में ही डाल दिया तो मैं प्रेग्नेंट हो जाऊँगी इसलिए आप मेरी चूत में नहीं, मेरे मुँह में अपना बीज निकालना, जिससे मैं आपका बीज पी भी लूँगी।

10-15 धक्कों के बाद मैंने अपना लंड ऋतंभरा की चूत से निकालकर उसके मुँह में दे दिया और फिर उसके मुँह में अपना बीज भर दिया।

फिर उसने मेरे लंड को तब तक चूसा जब तक मेरे बीज की एक एक बूँद नहीं निचुड़ गई।

फिर मैं थकान की वजह से ऋतंभरा के ऊपर गिर पड़ा।

इसी तरह से मैंने काजल और नौकरानी की चुदाई की और एक एक बार तीनों की गाण्ड भी मारी।

इस काम में मुझे शाम के 4:00 बज चुके थे।

जब मैं वहाँ से चलने को हुआ तो ऋतंभरा ने मुझे हज़ार हज़ार के दस नोट दिए और कहा- जब भी हमारी याद आये तो चले आना।

इसके बाद उन सबने मेरे लंड का ऐसा प्रचार किया कि आज मेरे पास करीब 500 से ज्यादा क्लाइंट हैं।

तो बताइये दोस्तो, आपको मेरी सच्ची कहानी कैसी लगी?

यदि आप लोग मुझे अपना प्यार दोगे तो शायद मैं अपनी और भी कहनियाँ आप तक पहुँचा सकूँ।

 

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