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जेम्स की कल्पना -3

James Ki Kalpna-Part 3

लगभग एक साल लगे कल्पना को इस घटना पर थोड़ा थोड़ा बात करने लायक नॉर्मल होने में। उसके बाद टुकड़ों में सुन-सुनकर मैंने घटनाओं की कड़ियाँ जोड़ीं। जेम्स और कल्पना ने मिलकर उस दिन उस कमरे में जो किया था वह कुछ इस तरह था :

दरवाजा बंद करके जेम्स घूमा तो एक क्षण ठहर गया, पलंग के सिरहाने थोड़ा सा पीठ टिकाकर तिरछे बैठी कल्पना नजर नीची किए अपने पैरों की ओर देख रही थी जहाँ उसकी उंगलियाँ फर्श को कुरेद रही थीं।
पति के जाने के बाद जेम्स उसे अभी भरपूर नजर से देख रहा था।

यौवन से भरपूर लड़की…
लड़की ही लगती है, उम्र में बड़ी होने के बावजूद… कसे बदन की… ताजगी और सुंदरता से भरी!
उसके अपने शब्दों में एकदम ‘हॉट’ ‘सेक्स’ और ‘फकिंग’ के लिए ही बनी हुई।
दो सुडौल पाँव, नीली जींस में कसे, उनके बीच की जगह छिपी हुई, ऊपर शरीर पर नीले शर्ट की पतली मादक परत…
कद में ज्यादा लम्बी नहीं, जोड़ी लगने लायक… लुकिंग ग्रेसफुल!

उसके मन में आया कि इस पहले मिलन के अवसर पर भेंट करने के लिए एक फूल ले लेता तो अच्छा रहता। लेकिन क्या करता, अस्पताल से जल्दी में आना पड़ा था।

कल्पना ने एक क्षण को सिर उठाया तो नजरें मिल गईं और फिर तुरंत ही झुक गईं।
इस एक क्षण का मिलना और झुक जाना जेम्स को बहुत ही अच्छा लगा, उसने उसी क्षण में अपनी मुसकुराहट दिखला दी।

वह उससे मिलन के लिए कब से तरस रहा था, कब से वह उसकी आवाज सुनकर, उसकी फोटो देखकर ‘गर्म’ हो रहा था। आज जब वह सामने मिली तो ‘गर्मी’ पर काबू पाना मुश्किल होने लगा।

उसके पति के साथ बात करने तक में वह किसी प्रकार ठहरा रहा था, लेकिन कमरे में उसके साथ अकेले होते ही उसकी उत्तेजना सनसनाकर उफन गई, साँस फूलने लगी।
उसने कमरे की खिड़कियाँ बंद कीं, परदे फैला दिए और पलंग पर आकर उसके पास बैठ गया।
कमरे में केवल ट्यूबलाइट की रोशनी रह गई।

‘हाऊ आर यू?’ वह आकर पास बैठ गया।
‘फाइन…’ सिर झुकाई कल्पना का उत्तर आया।
उसके बालों की सोंधी गंध ने जेम्स को आकर्षित किया।
‘बहुत दिन से मिलने का वेट कर रही थी। अब चांस मिली।’ जेम्स की अपने किस्म की हिंदी का नमूना, जिसे कल्पना ने फोन पर काफी बार सुना था।

जेम्स का गला सूख रहा था, उसने मेज पर से बोतल लेकर पानी का घूँट लिया।
‘आने में कोई प्रॉब्लम तो नहीं हुआ? बहुत लम्बा जर्नी है।’ उसने कल्पना का हाथ अपने हाथ में लिया। कोमल हाथ के स्पर्श से उसके लिंग में रक्त दौड़ गया।
‘नहीं… हाँ…’

उसके झुके चेहरे के नीचे छाती पर शर्ट के बटनों का खिंचाव देखकर जेम्स अंदर के भराव का अंदाजा लगा रहा था। उसने कितनी बार कल्पना से टॉपलेस या खाली ब्रा में फोटो मांगी थी, पर कल्पना ने साड़ी-ब्लाउज पहनी फोटो से आगे कुछ नहीं दिया था। उसको ही देखकर कितनी बार हस्तमैथुन कर चुका था।

‘तुम दोनों हस्बैंड-वाइफ बहुत सुंदर है। वेरी हैण्डसम पेयर(बहुत सुंदर जोड़ी!)’ जेम्स हिन्दी में ‘आप’ और ‘तुम’ के बारे में अनिश्चित रहता था।
‘थैंक्स! आप लोग भी सुंदर हैं।’ कल्पना ने चेहरा उठाया, नजर मिली, इतने पास से कि फिर झुक गई।

ಸುಂದರ ಮಹಿಳೆಇಂದು.ನಾನು ಅವಳ ಫಕ್ ಹಾಗಿಲ್ಲ (सुंदर माहिले. इन्दु नानु अवला फक हागिल्ला – सुंदर औरत, आज मैं इसको फक करूंगा।)
‘अभी आप डायना को नहीं देखा।’ उसने खिसककर पैंट में सख्त हो गए लिंग को एडजस्ट किया।
‘वो भी तो आ रही है ना, देख लेंगे।’
‘तुम उससे बहुत सुंदर है और sexy. Really, this is not a joke (सचमुच, यह मजाक नहीं है।) तुमारा फोन पर voice भी very sexy था।’

‘सेक्सी…’ कल्पना ने यह शब्द पहले भी सुना था। डायना से भी अधिक सेक्सी होने की प्रशंसा अजीब लगी।

‘में तुमारा फोटो देख के बहुत excited थी। लेकिन सामने में you are more sexy looking than….’ कहते कहते जेम्स की साँस और तेज हो गईं।
कल्पना को चुप रहते देखकर उसने पूछा- क्या में तुमको पसंद नहीं हुआ?
‘नहीं नहीं!’ कल्पना के मुँह से हड़बड़ाकर निकला।

‘तो ठीक है…’ कहते हुए उसने कल्पना की ओर होंठ बढ़ा दिए। ज्यादा औपचारिकता बरतने का उसके पास धैर्य नहीं था, उसने उसके चेहरे को पकड़कर अपनी ओर खींचा। होंठों से होंठ टकराए और कल्पना ने दबाव में मुँह खोल दिया।
कल्पना का मन था अभी और बात होती, थोड़ा समय बीतता, लेकिन वह जिस तरह हाँफने लगा था, उसके लिए संभव नहीं था।

दो जोड़ी होंठों की परतें जल्दी ही एक-दूसरे से गीली हो गईं। कल्पना ने सह लिया, हालाँकि जेम्स की गंध और स्वाद बुरे नहीं थे।
जब वे अलग हुए तो कल्पना ने पाया कि वह भी थोड़ी हाँफ रही है। यह एक अनुभवी पुरुष का चुम्बन था, इसका असर नहीं होना मुश्किल था।

जेम्स की साँस धौंकनी की तरह चल रही थी। उसने उसकी शर्ट की ओर हाथ बढ़ाया। कल्पना कुछ अकबकाई सी पीछे हुई। अभी वह चुम्बन ही मान-मनुहार से न दे पाने का अफसोस कर रही थी कि जेम्स जल्दी जल्दी उसके बटन खोलने लगा। जहाँ बटन फँसी वहाँ लगभग तोड़ते हुए-सा बढ़ गया। वह ज्यादा परिष्कृत था भी नहीं, और जो कुछ परिष्कार था वह एक जवान ‘सेक्सी’ औरत को देखकर जवान मर्द में बनाए रखना मुश्किल था।

कल्पना को अजीब लग रहा था, यह क्या हो रहा है?
एक गैर मर्द का इस तरह से ‘हमला’?
मगर उसकी बेकाबू उत्तेजना और कुछ परवाह नहीं करने वाली लगभग रूखी-सी हड़बड़ी उसे दूसरे स्तर पर नई भी लग रही थी। यह उसके पति से कितना अलग है।

शर्ट खींचकर जेम्स ने उसी तेजी से उसकी पैंट की बेल्ट खोली और बिस्तर पर पीछे ठेलकर गिरा दिया। उसने उसके पाँव उठाए और पैंट पैरों से बाहर खींच दी।
सिर्फ ब्रा-पैंटी में देखकर जेम्स की आँखें जलने लगीं – जैसे लहकते आग के सामने से किसी ने पर्दा हटा दिया हो।

कल्पना के मन में कहीं आकांक्षा थी कि वह उसके बेहद खूबसूरत और महंगे ब्रा-पैंटी सेट की तारीफ करेगा मगर जेम्स ने जल्दी-जल्दी अपनी शर्ट-पैंट, गंजी-चड्डी उतारी और बिस्तर पर चढ़ गया।
उसका तना हुआ लिंग देखकर कल्पना को अजीब लगा।
यही उसमें ‘घुसने’ वाला था।
वह सिहर गई।

कोई पूर्व काम-क्रीड़ा नहीं।
अंधे आवेश में उसने कल्पना की कमर में हाथ डालकर पैंटी इस जोर से नीचे खींची कि अगर कल्पना कमर उठाकर सहयोग नहीं करती तो वह फट ही जाती, हालाँकि उस वक्त भी कल्पना हाथ से रोक रही थी।

जेम्स उसपर चढ़ गया और… इससे कोई फर्क नहीं पड़ता था कि कल्पना ने खुद टांगें फैलाईं कि जेम्स ने उन्हें जबरदस्ती फैलाया। जेम्स के हिंसक से व्यवहार और और उसके फन काढ़े लिंग को देखते हुए और कोई रास्ता था भी नहीं।
भय और लाज से मुंदती आँखों के बीच वह उसे जितना देख पाई थी उसमें यह उसे अपने पति की अपेक्षा बड़ा और मोटा लगा था।

जेम्स ने उसकी दरार में लिंग टिकाया और छिद्र खोजने लगा। योनि-होठों में नहाने का गीलापन बचा हुआ था और इस परिस्थिति की कामुक प्रत्याशा ने उनमें चिकनापन लाना शुरू कर दिया था।
लिंग वहाँ पहुँचकर अंदर सरकने लगा।
कल्पना हैरानी से सिर उठाकर देख रही थी कि कैसे वह कमर से नीचे बिल्कुल नंगी है और उसकी योनि में एक बड़ा-सा साँवला लिंग जोर लगा-लगाकर घुसता जा रहा है।

बालरहित उभार पर चल रही यह क्रिया ट्यूबलाइट की रोशनी में साफ दिख रही थी। वह जेम्स के चेहरे को देख रही थी जो उसकी तरफ से बेपरवाह जल्दी से पूरा अंदर धकेल देने में जुटा था।
और कुछ ही सेकंडों और झटकों की तो बात थी, उसके गोरा मांसल उभार साँवले हल्के बालयुक्त पेड़ू से ढक गया।

कल्पना को अंदर सख्त भराव महसूस होने लगा। यह उसके पति से निश्चय ही बड़े साइज का था।उस पर चढ़ी हुई योनि लिंग के साथ धड़कने लगी। कल्पना का मन विद्रोह करने लगा, यह क्या हो रहा है। क्या इसी के लिए इतनी दूर आई है? यह तो मशीन जैसा चालू हो गया।
योनि में लिंग की रगड़ में रूखापन तो नहीं था पर वह अभी इतनी गीली भी कहाँ हुई थी। जेम्स ने मौका ही नहीं दिया था।
ठक ठक ठक! जेम्स पल भर में ही पूरे वेग में आ गया। लिंग ने बस एक य़ा दो बार पूरे राह की लंबाई नापी थी और वह क्षण जब पुरुष को अपने ऊपर अधिकतम धैर्य रखकर अधिकतम कोमलता दिखानी चाहिए और स्त्री को उसके लिए फैलने का मौका देना चाहिए, जेम्स जल्दी-जल्दी चोट करने लगा था।

ओफ, यह जल्दबाज लड़का, फोन पर भी उतावली दिखाता था, ‘हाइ’, ‘हाउ आर यू’ के बाद सीधे सेक्स पर आ जाता था, जबकि कल्पना कुछ इधर-उधर की, दोस्ती के लिए बातें करना चाहती।
इस मशीनी संभोग में आनंद कहाँ। वैसे, लिंग का आकार, उसके भराव का एहसास और धक्कों की तीव्रता पति से बढ़-चढ़कर थे और इसकी चोटों की मार से तन हिचकोले खा रहा था लेकिन मन कहीं दूर अछूता पड़ा था।

हम्फ… हम्फ… हम्फ… कुछ ही सेकंड हुए कि जेम्स हाँफता हुआ उसके अंदर छूटने लगा।
अटपटेपन और शर्म से घबराकर कल्पना ने आँखें मूंद लीं।
यद्यपि वीर्य की अचानक आई चिकनाई ने योनि में घर्षण के एहसास को बेहतर बना दिया था, पर यह बेहद संक्षिप्त था। जेम्स हिचकियाँ खाता समाप्त होकर बगल में लुढ़क गया।

कल्पना अलग पड़ी थी। योनि बाढ़ से भरे खेत की तरह बह रही थी और मन बिन बारिश के खेत की तरह सूखा। वह यों ही सोचती पड़ी रही। सब कुछ यंत्रचालित सा एक झोंके में हो गया था।
न चाहते हुए भी उसकी आँख गीली हो गई। औरत की नियति : पुरुष उसको भूखे भेड़िए की तरह ही देखता है।

जेम्स उससे लिपटा पड़ा हुआ था, उसकी साँसें कल्पना के नंगे कंधे और गर्दन पर पड़ रही थीं।

कहानी जारी रहेगी।
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