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गलतफहमी-24

Galatfahami- Part 24

आपने मेरी कहानी    गलतफहमी-23  पढ़ी होगी

मैं अपने बॉयफ्रेंड से अपनी हिंदी चुत चुदाने उसके रूम में आई सजधज कर… लेकिन मैं पहुँचने में आधा घंटा लेट हो गई थी। मैं वहाँ आती ही रहती थी, इसलिए मैंने दरवाजा थोड़ा खटखटाया और सीधे अंदर घुस गई।

अंदर घुसते ही मेरे पाँव ठिठक से गये क्योंकि मैं सुबह से लेकर अब तक यही सोच कर तैयार हुई थी कि मैं जाते ही रोहन के गले लग जाऊंगी, पर यहाँ तो रोहन है ही नहीं, और मुझे उसके रूम के खाली होने की उम्मीद थी पर यहाँ तो रोहन के तीनों रुम मेट लंगर डाले बैठे हैं।
मुझे अपना पूरा प्लान चौपट होता दिखा, मैंने थोड़ी मायूसी के साथ पूछा- रोहन कहाँ है?
मुझे उत्तर थोड़ा रुक कर मिला क्योंकि तीनों ही मुझे आँखें फाड़े देखते रह गये थे. ऐसा नहीं कि उन्होंने मुझे पहली बार देखा हो, पर ऐसी तैयार होने के बाद इस खूबसूरत रूप में पहली बार ही देख रहे थे।

गौरव से मेरी ज्यादा बातचीत थी, तो उसी ने जवाब दिया- तुम बैठो ना, रोहन आता ही होगा।
मैंने मुस्कुरा कर थैंक्स कहा और पास रखी एक चेयर में बैठ गई।

सभी अपने अपने काम में लगे रहे, साथ ही मुझे चाय पानी पूछ कर फार्मेल्टी की। पर सबकी नजर किसी ना किसी बहाने मुझे ही घूर रही थी। सब घर पर कैप्री और बनियान में ही थे, वो अकसर ऐसे ही रहते थे, और मैं हमेशा की तरह चोर नजरों से उनके कसरती बदन को निहार रही थी।

अमित दुबला पतला सा गोरा और लंबा हैंडसम सा दिखने वाला लड़का था, विकास थोड़ा सांवला लगभग 5’4″ हाईट वाला गठीला बदन, और तेज तर्रार लड़का था, गौरव को मैंने शुरू से देखा और जाना था इसलिए वो मेरे लिए सामान्य था, पर दूसरों के लिए वो भी अच्छी हाईट हेल्थ वाला गोरा स्मार्ट लड़का था।

जैसा मैंने पहले भी बताया है कि वहाँ एक ही कमरा है, तो विकास ने अपने दोनों दोस्तों से कहा- अच्छा भाई, अब मैं कॉलेज चलता हूँ!
ऐसा कह कर वो मुझसे थोड़ी ही दूर पर कपड़े बदने के लिए खड़ा हुआ.

मेरी चोर नजर उस पर टिकी थी, उसने अपना कैप्री उतार दिया। हाययय राम…! उसने तो नीचे कुछ पहना ही नहीं था, उसका लगभग आठ इंच का काला लंड जो खड़ा हुआ ही था हवा में लहरा गया। उसका सुपारा लाल था और बहुत बड़ा था।
उसको देखते ही कामुकता वश मेरी चूत में पानी आ गया और चोर नजरों की बजाय उसे खुल के देखने लगी और ऐसे बुत बन गई जैसे किसी ने मुझे अभिमंत्रित किया हो।

तभी अमित ने जानबूझ कर जोर कहा- अबे कुछ तो ख्याल रख, लड़की बैठी है, और तू लंड दिखा रहा है।
उसने इस बात को ऐसे कही थी ताकि मेरी नजर ना भी हो तो मेरी नजर उस पर चली जाये।
विकास ने बिंदास लहजे में कहा- अबे, चोद थोड़ी रहा हूँ, कपड़ा बदल रहा हूँ, और ऐसे भी इसने पहले भी तो लंड देखे होगें, एक और देख लेगी तो क्या बिगड़ जायेगा।

अब मैं होश में आई और मैंने नजर फेर ली, पर सच कहूँ तो चूत लंड लेने की तैयारी करने लगी.
पर इतना अचानक मैंने कुछ भी ना सोचा था, तभी अमित ने मुझे सुनाते हुए फिर कहा- अबे ये तो पहले चुद भी चुकी है, तो क्या तू ये कहेगा कि एक और लंड चूत में ले लेगी तो क्या होगा!
अब मैं उठ कर जाने लगी, क्योंकि ऐसा व्यवहार उन्होंने मुझसे पहली बार किया था और मुझे रोहन के आने और उससे रिश्ते खराब होने का डर भी था। वैसे तो मैं पहले ही चली गई होती पर मुझे आज रोहन से चुदना ही था, इसलिए पहले दौर की बदतमीजी बर्दाश्त की थी पर अब और नहीं।

तभी गौरव ने दौड़ कर दरवाजा बंद किया, मेरा हाथ पकड़ के बिठाया और सॉरी कहा, मुझे कुछ देर और इंतजार करने को कहा.. मैं गुस्सा दिखाते हुए मान गई।
लेकिन विकास कपड़े पहने के बजाय ऐसे ही घूमता रहा और मेरी चूत पनियाती रही.

तभी अमित ने भी कपड़े बदलने के बहाने अपना कैप्री उतार दिया, उसका लंड विकास से थोड़ा पतला था, फिर भी लगभग चारू के लंड जितना तो रहा ही होगा। उसके गुलाबी सुपाड़े को देख के मुंह में पानी आ गया।
अब यह बात भी तय थी कि आज ये मुझे चोदने वाले थे। मैं भी तैयार हो ही जाती, पर डर सिर्फ रोहन के आ जाने का लग रहा था और मैं खुद को इस अप्रत्याशित घटना से बचाने की भी कोशिश कर रही थी क्योंकि चूत में चाहे जितनी भी आग हो, तीन अनजान लोगों के साथ अचानक ग्रुप सेक्स के लिए मान जाने के लिए मेरी आत्मा गवाही नहीं दे रही थी।

अब मैं फिर उठ के जाने लगी, तभी गौरव ने एक बार फिर मेरा हाथ पकड़ा और कहा बस पांच मिनट और रुक जाओ, अगर रोहन नहीं आया तो कॉलेज जाते-जाते मैं खुद तुम्हें हॉस्टल छोड़ दूंगा। मैं मन मार कर फिर बैठ गई।
तभी ठीक सामने रखे टेबल के पास जाकर अमित ने मोबाइल उठाया और कॉल करके कहा- हाँ रोहन, और कितना देर लगायेगा?
उधर से क्या उत्तर मिला, मैं नहीं जानती, फिर अमित ने कहा- हाँ कविता आई थी, तुम नहीं थे तो वो वापस चली गई, हाँ तुम आराम से काम निपटा के आना।

और फिर मोबाइल टेबल में रख कर अमित ने कहा कि वो रूम का बिजली बिल भरने गया है, वहाँ भीड़ ज्यादा है वो चार बजे से पहले से पहले नहीं आ सकता।

अब तक विकास मेरे सामने आकर खड़ा हो चुका था, उसका काला भुजंग लंड मेरी आँखों के सामने अकड़ रहा था, उसने कहा- अभी बारह बजे हैं यानि की हमारे पास चार घंटे का टाईम है, और अब तो रोहन के आने का डर भी नहीं है।
उसकी इस बात को सुनकर मैं घबरा सी गई, मुझे लगा कि इसने मेरे मन की बात कैसे पढ़ ली।

तभी उसने मेरी ठोड़ी पकड़ते हुए मुझसे नजर मिला कर कहा- जो काम तुम रोहन के साथ करने आई थी, वो हमारे साथ कर लो।
और एक खिड़की को दिखा के कहा- ऐसे भी मैंने उस खिड़की से कई बार तुम्हारी चुदाई देखी है, तुम रोहन के लंड से खुश नजर नहीं आती हो, तुम और ज्यादा सेक्स चाहती हो। जो तुम्हें हमसे ही मिल सकता है।

अब मेरे पास कहने को कुछ नहीं था, मैं स्तब्ध थी कि कोई मेरी चुदाई भी देखता था और इन बातों के दरमियान ही विकास ने मेरा हाथ पकड़ कर अपने लंड पे रख दिया था, और मेरा हाथ कब उसके लंड को सहलाने लगा था, मुझे खुद को नहीं पता।
आज मैंने जीवन की एक सच्चाई जानी.. कि चूत के सामने अंतरआत्मा की कोई अहमियत नहीं है।

अब मैं यंत्रवत उनकी याज्ञा का पालन करने लगी। पहली बार हाँ में मेरा सिर हिलते ही गौरव और अमित ने यश कहते हुए एक दूसरे को हाथ देकर ताली बजाते हुए जीत का जश्न मनाया।
और गौरव ने भी अपना कैप्री उतार फेंका, उसका लंड भी सात इंच के आसपास ही था, ना गोरा ना काला सुंदर सा सुपारा, उसकी नसें स्पष्ट नजर आ रही थी।
तीन बेहतरीन लंड मिलने की खुशी में मेरी चूत ने भी खुशी के आंसू बहा दिये थे।

अमि पास आ गया और मेरी पीठ सहलाते हुए मेरी तारीफ किये जा रहा था, यौवन का नशा मेरे ऊपर बहुत जल्दी हावी होने लगा था.
उन्होंने मुझे हाथ पकड़ कर खड़ा किया, तब तक गौरव भी पीछे से मेरी कमर और कूल्हे सहलाने लगा।
मेरी धड़कन बढ़ी हुई थी इसलिए हर आते जाते सांस के साथ मेरा सीना फूल जाता और फिर सामान्य हो जाता था, मतलब मेरा तन अब मेरे काबू में नहीं था, मेरे उरोज उछल-उछल कर शायद खुद कह रहे थे, कि आओ हमें मसलो।

मेरे तन से मादक खुशबू आ रही थी, वो लोग मुझे सूंघने लगे, मैं अभी भी छुईमुई सी थी, क्योंकि मेरा संकोच अभी भी बाकी था। अब अमित ने भी मेरा एक हाथ पकड़ कर अपने लंड पर रखवा लिया, अब मेरे दोनो हाथ में लाजवाब लंड थे और मैं उन्हें सहला रही थी।

अमित ने थोड़ा सामने आकर मेरे मुंह में अपनी जीभ डाल दी, हम एक दूसरे का मुंह जीभ से टटोलने लगे, गौरव ने पीछे से मुझे सहलाते हुए कहा- यार बड़ी अजीब बात है ना, लड़कियां इतनी नाजुक होकर भी, बेरहमी से कुचला जाना पसंद करती हैं और मर्दों की बेरहमी खुशी से सह भी लेती है। अब इस कविता को ही देख लो ना, इसके शरीर पर अगर फूल से मार पड़े तो घाव हो जाये, पर अभी ये हम तीनों के खड़े विशाल लंड अपनी चूत में लेने को तैयार है।

उसकी तारीफ करने का यह अंदाज मुझे बहुत पसंद आया। उसने मेरी तारीफ करते हुए मेरे कपड़े के ऊपर से ही मेरी गांड और जाँघों पर अपना लंड फिराना शुरु कर दिया, उसकी इस हरकत से मैं और मदहोश हो उठी।
अब तक कपड़े के नाम पर केवल मेरा दुपट्टा उतरा था, जिसे उठते वक्त मैंने खुद निकाल कर चेयर पर रख दिया था।

अब गौरव ने पीछे से हाथ डालकर कपड़ों के ऊपर से ही मेरे मम्मों को सहलाना शुरू किया, अमित ने मेरे पेट और कमर को सहलाना शुरू किया, तभी विकास ने सीधे मेरी चूत को टटोलना शुरू किया।
तीन नये लड़कों के हाथों का ऐसा स्पर्श मुझे सातवें आसमान पर पहुँचा रहा था।

मेरे हाथों ने उनके लंडों पर दबाव बढ़ा दिया, उसे उन लोगों ने मेरी उत्तेजना का इशारा समझा और अगले ही पल उन्होंने अपने बनियान भी निकाल फेंके।
उनके गठीले शरीर को देख कर मैं तड़प उठी और ना चाह कर भी मैंने विकास का सीना चूम लिया, उसी समय अमित ने मेरी कुरती को उतारना चाहा मैंने लंड छोड़ कर हाथ ऊपर करके उसको मदद की. तभी विकास नीचे बैठ गया और उसने सलवार का नाड़ा खोल दिया, मेरी सलवार तुरंत नीचे सरक गई, विकास ने मेरी दोनों जाँघों को दबाते हुए मेरी सुंदर नाभि को चूम लिया, मेरी आँखें बंद हो गई।
और उसने इस्स्सस्स् करते हुए कहा- क्या कयामत की खूबसूरती है यार, और क्या चिकनापन है। आज तक हमने कितनी ही लड़कियों को चोदा है पर इसके जैसी कभी नहीं मिली।
उसने मेरे कूल्हों पर एक चपत लगाई, और चूत को पेंटी के ऊपर से काट लिया।

उसके ऐसा करते ही मेरे हाथ उसके बालों पर चले गया, और मैंने अपना चेहरा आहहह करते हुए एक ओर घुमा लिया, तभी अमित ने मेरी गर्दन को चूम लिया, गौरव तो पहले ही अपने लंड से मेरी जांघों को सहला रहा था, उनका हर स्पर्श मुझे कामोत्तेजना के शिखर पर पहुँचा रहा था। पर मुझे लगा कि उनके लिए मेरे रेशमी ब्रा पेंटी और उन कपड़ों में गजब की खूबसूरती का कोई मोल नहीं है, वो बस चूत में लंड डाल के पानी निकालना चाहते हैं.

मैं ऐसा सोच ही रही थी कि तभी विकास उठ खड़ा हुआ, उसने अमित और गौरव को मुझसे थोड़ा अलग किया और कहा- कसम से यार.. तुम तो बला की खूबसूरत लड़की हो..! और रोहन से चुदने के लिए ऐसे तैयार होकर आई हो जैसे कोई आसमान से अप्सरा उतर आई हो। इन रेशमी गुलाबी ब्रा पेंटी में लिपटा तुम्हारा गुलाबी शरीर के हर हिस्से को चाटने चूमने को जी कर रहा है।

आप भी यह बात समझ लें, जब तक किसी लड़की का मन प्रफुल्लित ना हो और वो आत्मविश्वास से लबरेज ना हो, वो संभोग का चरम सुख नहीं दे सकती। पर अब तो मैं आत्मविश्वास से भरी जा रही थी और सेक्स और कामुकता के नये आयाम रचने वाली थी।

उसकी बातों में अमित और गौरव हाँ-हाँ कर रहे थे, मैं खुश होकर ख्वाबों की दुनिया में गोते लगाने लगी।

उसी समय सभी एक साथ मुझ पर टूट पड़े, अब विकास ने मेरे उरोजों का बेदर्दी से मर्दन किया, जबकि मेरी ब्रा पेंटी अभी तक उतरनी बाकी थी।
अमित नीचे बैठ कर मेरी पेंटी को साईड करते हुए उसमें जीभ डालने की कोशिश करने लगा, मैं तड़प उठी, मेंरे रोयें खड़े हो गये.
तभी अमित ने फिर कहा- वाह… चूत का रस भी इतना गर्म और लजीज है कि मन तो करता है कि इसे जिन्दगी भर चाटता ही रहूँ।

उसकी बातें सुन कर गौरव भी नीचे बैठ गया, और मेरी जांघों और पिंडलियों को चाटने चूमने लगा।

अब विकास मेरे पीछे चला गया और मेरी ब्रा की हुक खोल दी, उसने ब्रा तन से अलग नहीं किया, ऐसे ही लटके रहने दिया, मेरे दोनों हाथ अमित और गौरव के बालों को सहला रहे थे।
तब विकास ने पीछे से ही अपनी दो उंगलियां मेरी पीठ पर फिराई उसकी उंगलियां मेरे कंधे से होते हुए रीड की हड्डी की वजह से बने खूबसूरत गढ्ढे पर फिसल रही थी, मेरी कमर में गाल के जैसा डिंपल बन जाता था, उसने उंगलियां वहाँ घुमाई और फिर ये सारे उपक्रम उसने अपनी जीभ से करने शुरू कर दिये.

मेरी उत्तेजना का कोई ठिकाना ना था, मैं इसस्सस कर उठी, वासना के मारे आँखें लाल हो गई, मैं बिना नशा किये भी मदहोश होने लगी.
विकास के अंदर सेक्स की ऐसी कला होगी, मैंने सपने में भी नहीं सोचा था।

तभी उसने एक और गजब ढा दिया, उसने मेरे कंधों को सहलाते हुए अपने पंजे मेरे पंजों तक पहुंचाये फिर पंजों को पकड़ कर उठाया और मेरी बड़ी उंगली को मुंह में डालकर चूसने लगा.
अब मेरे होंठ पूरी तरह सूख गये, मैंने होंठ गीला करने के लिए उन पर जीभ फिराई और मुंह के थूक को गटका, जो मेरी गले की नलियों से उतरता हुआ स्पष्ट नजर आया होगा।
मुझे पानी की प्यास नहीं थी, लंड की प्यास थी। अब मैं लंड चूसे बिना नहीं रह सकती थी।

मैंने अपनी लटकती ब्रा खुद उतार फेंकी और पेंटी भी उतारने लगी, जिसे अमित ने मदद करके मेरे पैरों से बाहर कर दिया।

अब एक साथ तीनों की आवाज आई- आययय हाययय… सचमुच में तुम लाजवाब हो कविता, ऐसे मम्में हमने आज तक किसी के नहीं देखे हैं, बिना दाग धब्बों वाली त्वचा, भूरे घेरे के बीच उठे हुए काले निप्पल, इतने सुडौल कसे हुए उरोज तो अप्सराओं के भी नहीं होंगे!
ये बातें विकास कह रहा था.

लेकिन उसी वक्त उहहह आहहह करते हुए अमित ने कहा- ऐसी बुर तो पोर्न फिल्मों में भी देखने को नहीं मिलती, अभी तक मैं भले ही चूस रहा था, पर मेरा मुंह इतनी खूबसूरत बुर को चाट रहा है इसका मुझे जरा भी अनुमान नहीं था.
गौरव भी बोल ही उठा- भाई, अब जरा मुझे भी चाट लेने दे, फूली हुए मखमली नाजुक सी बुर कभी कभी ही देखने सूँघने और चाटने को मिलती है।

पर यकीन कीजिए, मेरा ध्यान उनकी तारीफों पे बिल्कुल नहीं था, मैं तो उनके लंडों को चूसना चाहती थी, अब तक तो सिर्फ उन्होंने ही मेरा लुत्फ उठाया था, अब बारी मेरी थी।
मैं उन तीनों के बीच बैठने लगी, गौरव समझ गया मैं क्यों बैठने वाली हूँ, तो वह लेट गया और मैंने उसके मुंह में अपनी चूत दे दी चाटने के लिए, और मैंने अपना पहला वार अमित पे किया, मैं उसकी गोली से लंड चाटना शुरु किया.

हालांकि वहाँ पसीने की गंध थी पर मैं भी अभयस्थ खिलाड़िन थी, इसलिए फर्क पड़ने का सवाल ही नहीं उठता, मैंने ऐसा करते हुए लंड के छेद में जीभ घुमाई, मुझे वीर्य रूपी अमृत का अनुमान हुआ, तो मैंने उस मोटे लंड के छोटे छेद में अपनी जीभ घुसाने का पूरा प्रयत्न किया, पर असफल होने लगी तो मैंने लंड को पूरा निगलने जैसा बर्ताव किया और अपने गले तक लंड डालकर चूसने लगी.

मैंने एक हाथ से विकास का लंड भी थाम रखा था, उन दोनों ने अपने एक-एक हाथ से मेरे मम्मों को राहत पहुंचाने का काम जारी रखा।

गौरव मेरी चूत चाट रहा था, खा रहा था, या काट रहा था.. ये वो ही जाने, पर मेरी चूत अब किसी गर्म भट्टी की तरह जलने लगी थी। अब मैंने अमित को इशारा किया, वो इशारा समझ कर लेट गया, और मैं उसके लंड के ऊपर चूत सेट करके बैठ गई, फिर मैंने एक लय में खुद के ऊपर भार डालना शुरु किया, अमित का लगभग तीन इंच से ज्यादा मोटा गुलाबी चमकदार सुपारा मेरी चूत की दीवार को रगड़ता हुआ, मेरी बुर में पेवस्त होने लगा।
मैं भी पक्की खिलाड़िन थी, मैंने चूत में लंड पूरा नहीं डाला, उसके आधे लंड पर हल्के-हल्के उछलती रही.

तब तक मेरे सामने विकास और गौरव अपना लंड चुसवाने के लिए पोजिशन में आ गये थे, विकास ने मेरे खुले रेशमी बाल पकड़ कर मेरा मुंह उठाया और अपना लंड पेल दिया। उसका लगभग तीन इंच मोटे लंड के ऊपर लगा चार इंच मोटाई वाला लाल सुपारा मेरे मुंह को भर गया। फिर भी वो बेरहम होता नजर आ रहा था, मैं भी पूरे शवाब पर थी, मैंने कैसे भी करके उसका तीन चार इंच लंड मुंह में ले लिया और चूसने लगी।

पर उतना मोटा लंड़ लंबे समय तक मुंह में रखना मेरे बस का ना था, ऐसे भी मैं रंडी तो थी नहीं, नाजुक सी बीस इक्कीस साल की लड़की और कितना हुनर दिखाती… मैंने विकास का लंड मुंह से निकाल कर हाथों से आगे पीछे करना शुरू किया, और गौरव का लंड मुंह में ले लिया.

गौरव का लंड गोरा था मोटाई लगभग ढाई इंच रही होगी, सुपारा लंड की मोटाई से बहुत ज्यादा नहीं था, पर सुपारा बहुत लंबी दूरी तक फैला था, पर उस साले का लंड साफ नहीं था, उसके सुपारे के कोने में सफेद-सफेद लंड का ही मैल जमा था और कुछ बूँदें वीर्य की थी लेकिन पेशाब की गंध के अलावा पसीने की भी गंध आ रही थी. अगर उसने मुझे शुरू में चूसने कहा होता तो मैं शायद ही चूसती, पर अब मुझे खुद लंड चूसने का मन था, तो ये गंध भी मुझे रिझा रही थी।

मैं सफाई पसंद लड़की होने के बावजूद पता नहीं उस समय उस गंदे लंड को ही क्यों ज्यादा पसंद कर रही थी, मैंने उस लंड़ को बड़ी ही शिद्दत से चूसा, जड़ से लेकर टोपे तक चाटा और गले तक डाल कर चूसती रही।
ऐसा शायद इसलिए था क्योंकि मैं मन ही मन प्लान कर रही थी कि मुझे कौन सा लंड कहाँ लेना है, मैंने विकास और अमित के लंड को चूत के लिए और गौरव का लंड अपनी गांड के लिए सोच रखा था।

अभी तक मैं अमित के आधे लंड पर ही कूद रही थी, अमित ने कोशिश की कि वो मेरी चूत में जड़ तक लंड पेल दे पर मैंने ऐसा नहीं करने दिया.

अब मैं दो लंड एक साथ लेना चाहती थी, इसलिए मैंने गौरव को इशारा करके गांड में लंड डालने कहा, तो सबने मुझे चौक कर देखा और कहा- अरे यार, ये साली तो हर तरफ से चुदी हुई है.
लेकिन गौरव को रोक कर विकास मेरी गांड फाड़ने आगे बढ़ गया, मैं डर के मारे गिड़गिड़ा उठी- नहीं विकास, प्लीज तुम नहीं..! वहाँ मैंने रोहन के छोटे लंड से ही करवाया है, मैं तुम्हारा नहीं सह पाऊंगी। आओ मैं तुम्हारा लंड चूसुंगी, वहाँ गौरव को ही डालने दो।

विकास को शायद तरस आ गया तो वो मान गया, उसने मेरे गुलाबी गालों पर, जो अब लाल हो चुके थे, एक चपत लगाई और लंड मेरे मुंह में दे दिया.

उधर पीछे गौरव ने मेरी गांड पर अपना लंड दो बार घिसा और अपना सुपारा मेरी गांड में उतार दिया. गौरव का लंड विकास से भले ही छोटा हो पर रोहन से काफी बड़ा था, मैं तड़प उठी… दर्द के मारे छटपटाना चाहती थी पर तीन कसरती बदन वालों की जकड़ में छटपटा पाना भी मुश्किल था और मुंह में बड़ा सा लंड था तो चीख भी ना पाई, बस आंसू बहे जो गालों पर ढलक गये, और उस कमीने ने तो चुदाई दो मिनट रोकी भी नहीं, बस पेलता ही चला गया.

कुछ देर मैं दर्द के कारण सारे मजे भूल गई, लेकिन जब गांड में गौरव का लंड घुस रहा था तब मैं उससे बचने के लिए कमर को सामने खींच लिया पर सामने तो अमित का लंड घुसा था, जो मेरी इस हरकत से जड़ तक घुस गया, अब चूत गांड और मुंह तीनों में ही जड़ तक ठुकाई हो रही थी।

दर्द थोड़ा कम हुआ और अब मैं आनन्द के सागर में डूबने लगी ‘उम्म्ह… अहह… हय… याह… आहह ओह इससस कम आन, आई लव यू…’ और जाने क्या क्या हमारे मुंह से निकल रहे थे, उन तीनों ने मेरी तारीफ में पाताल से लेकर आकाश तक पुल बांध दिये।
ऐसी मजेदार चुदाई पाकर मैंने मुंह से विकास का लंड निकाल कर कहा- वाह..! आज तो सच में मजा आ गया।
तभी विकास ने कहा- पिक्चर अभी बाकी है मेरे दोस्त!

जी हाँ अभी उन्माद और कामुकता के शिखर तक जाना बाकी है! उम्मीद है आप सबका सहयोग मिलता रहेगा।

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