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चूत का रसिया-3

Choot Ka Rasiya-3

इस बीच सपना दो तीन थप्पड़ मुझे और श्वेता को मार चुकी थी।

जब देखा कि वो नहीं मान नहीं रही है तो मैंने उसको धक्का दिया।

वो सोफे की तरफ गिरी पर उसने मेरे बाल नहीं छोड़े और मैं भी धड़ाम से सपना के ऊपर ही गिर गया।

इसी हड़बड़ाहट में मेरे बाल सपना के हाथ से छूट गए।

मैं उठ कर भागने लगा तो उसने मुझे पीछे से पकड़ लिया।

और इसी धरपकड़ में उसके हाथ में मेरा लण्ड आ गया। जिसे उसने पकड़ कर मसल दिया।

मेरी चीख उसके घर में गूँज उठी।

मैं उस से छूट कर भागा तो गलती से अंदर वाले कमरे में घुस गया।

उसने बाहर से दरवाजा बंद कर दिया।

मेरी अब पुरी तरह से फट गई थी।
मेरी पेंट भी बाहर पड़ी थी और मैंने अंडरवियर तक नहीं पहना हुआ था।

अगर श्वेता की बुआ ने कॉलोनी के लोगों को बुला लिया तो वो लोग मार मार कर मेरा बुरा हाल कर देंगे।

फिर सोचा कि शायद वो श्वेता की बदनामी के डर से ऐसा ना करे।
पर डर तो था ही।

बाहर से श्वेता के रोने और सपना के चीखने की आवाजें आती रही और मैं अंदर बेड पर पड़ी चादर लपेट कर बेड पर बैठा रहा।
मैं घबराहट के मारे पसीने पसीने हो रहा था, जिंदगी में पहली बार मेरे साथ ऐसा हादसा हुआ था।

करीब दस मिनट के बाद बाहर थोड़ी शांति हुई और कमरे का दरवाजा खुला।

दरवाजा खुलते ही सपना कमरे में आई और मुझे पकड़ कर बाहर ले जाने लगी।

जो चादर मैंने लपेट रखी थी वो बहुत बड़ी थी। सपना के खींचने से मेरी चादर खुल गई और मैं एक बार फिर से नंगा हो गया।

‘तुम श्वेता को प्यार करते हो?’ सपना ने मुझे मेरी पैंट पहनने को दी और साथ ही ये सवाल दाग दिया।

घबराहट के मारे जवाब देते नहीं बन रहा था पर मेरी गर्दन अपने आप ही हाँ में हिल गई।

उसके बाद सपना ने उपदेश देना शुरू कर दिया- अभी तुम लोगों की अपना भविष्य बनने की उम्र है। तुम्हें सेक्स की तरफ अभी से ध्यान नहीं देना चाहिए…
इत्यादि।

मुझे उसके उपदेश पर गुस्सा भी आ रहा था और हंसी भी क्यूंकि मैं उसके जैसी भी कई चूतें चोद चुका था।

खैर लगभग पन्द्रह मिनट चले इस उपदेश के बाद मेरा मोबाइल नंबर लेकर सपना ने मुझे जाने दिया।

मैं भी सर पर पैर रख कर भागा वहाँ से।

अगले एक सप्ताह तक श्वेता ट्यूशन पर नहीं आई।

मैं उसकी सहेली से हर रोज उसके बारे में पूछता पर उसको भी नहीं पता था कि श्वेता क्यों नहीं आ रही है।

मैं घबराया कि कहीं सपना ने श्वेता के मम्मी पापा को तो नहीं बता दिया।
पर फिर एक दिन श्वेता मुझे नजर आई।

श्वेता अभी ट्यूशन पर अंदर गई ही थी कि मेरे मोबाइल पर एक कॉल आई।

नंबर अन्जाना था… मैंने कॉल उठाई तो उधर से एक लड़की की आवाज सुनाई दी- मैं सपना बोल रही हूँ राज… मुझे भूले तो नहीं होंगे तुम..?

‘मैं तुम्हें भला कैसे भूल सकता हूँ… तुम तो मुझे जिंदगी भर याद रहोगी।’

‘राज… मुझे तुम से एक बार मिलकर कुछ बात करनी है… क्या तुम मेरे घर आ सकते हो?’

‘क्या बात करनी है, फोन पर ही बता दो?’

‘नखरे मत कर, जो कह रही हूँ वो सुन और जल्दी से अभी के अभी मेरे घर पर आ जा!’

‘देखता हूँ..’ यह कह कर मैंने फोन काट दिया।

दिल किया कि देखूँ तो सही कि क्या बात करना चाहती है।

मैंने जल्दी से कपड़े बदले और बाइक उठा कर चल दिया।

अगले पाँच मिनट के बाद मैं संजय के घर के आगे था।

मैंने बाइक संजय के घर खड़ी की और पैदल ही सपना के घर की तरफ चल दिया।

सपना मुझे बाहर ही खड़ी हुई नजर आई।

मुझे देखते ही उसने मुझे अंदर आने का इशारा किया और खुद अंदर चली गई।
मैं भी चुप चाप अंदर चला गया।

‘क्या बात करनी है?’

‘अरे बैठो तो सही…’

‘मुझे थोड़ा जल्दी है… जल्दी से बताओ क्या बात करनी है?’

सपना मेरे पास सोफे पर आकर बैठ गई और बोली- राज… प्लीज मुझे उस दिन के लिए माफ कर दो… मुझे कुछ ज्यादा ही गुस्सा आ गया था।

मैं उसके बदले तेवर देख कर हैरान हो गया।

‘श्वेता अभी बहुत छोटी है सेक्स के लिए… उसको अभी से ये सब नहीं करना चाहिए… और फिर तुम्हारा वो भी तो इतना भयंकर है… श्वेता की फाड़ ही देते तुम उस दिन..’
सपना धीरे धीरे खुल कर बोलने लगी।

मैं भी पुराना पापी था, मेरी समझ में आ गया था कि सपना क्या चाहती है।

‘क्या तुमने कभी सेक्स नहीं किया है?’

मेरा सवाल सुनकर सपना चौंक गई फिर धीरे से बोली- किया तो है एक बार पर…’

‘पर क्या?’

‘वो कमीना कुछ कर ही नहीं पाया अच्छे से और मैं अधूरी ही रह गई।’

अब किसी बात की गुंजाइश ही नहीं रही थी।

मैंने झट से उसकी जांघों पर हाथ रखा और उसके आँखों में देखते हुए बोला- करना चाहती हो सेक्स मेरे साथ?

उसने शर्मा कर आँखे नीची करते हुए हाँ में सर हिलाया।

उसकी हाँ होते ही मैं सरक कर उसके थोड़ा नजदीक हुआ और अपने हाथ का दबाव उसकी जांघों पर बढ़ाते हुए उसके बदन से चिपक गया।

उसने जैसे ही अपना चेहरा ऊपर उठाया मैंने झट से अपने होंठ सपना के होंठों से मिला दिए।

वो सकपका सी गई पर अब बहुत देर हो चुकी थी।

आज उस दिन की मार का मुआवजा वसूलने का समय था।
मुआवजा बहुत मस्त और गद्देदार था।

मैंने अपना एक हाथ उसके खरबूजे के साइज की चूची पर रखा और मस्त होकर उसके होंठों को चूसने लगा।

वो भी जवानी की आग में जल रही थी।
उसने सलवार कमीज पहन रखी थी।
मैंने बिना देर किये उसकी कमीज और ब्रा उसके बदन से अलग कर दी।

उसकी चूचियाँ बहुत बड़ी बड़ी और मस्त थी।

मैंने उसको सोफे पर ही लेटा लिया और उसकी चूची को मुँह में लेकर चूसने लगा।

सपना मस्ती के मारे दोहरी हो गई थी।

मैंने उसकी चूची चूसते चूसते उसकी सलवार का नाड़ा भी खोल दिया और सलवार नीचे सरका दी।

पेंटी चूत के पानी से गीली हो गई थी सपना की।

मैंने पेंटी को भी नीचे खींचा तो एक क्लीन शेव चूत मेरा इंतज़ार कर रही थी।

डबलरोटी जैसी फूली हुई चूत।
देखते ही लण्ड पेंट फाड़ कर बाहर आने को मचल उठा।

मैंने सपना का एक हाथ पकड़ कर अपने लण्ड पर रखा तो उसने झट से लण्ड को पैंट के ऊपर से ही पकड़ लिया।

लण्ड हाथ में आते ही वो भी जोश में आ गई और मुझे धक्का देकर साइड में लेटा दिया और खुद मेरे ऊपर आ गई।

उसकी दोनों बड़ी बड़ी चूचियाँ मेरी आँखों के सामने झूलने लगी।

मैं उसकी चूचियों से खेलने लगा और वो मेरे कपड़े उतारने में व्यस्त हो गई।

मात्र दो मिनट में ही उसने मुझे बिल्कुल नंगा कर दिया और मेरे लण्ड को हाथ में पकड़ कर मसलने लगी।

मैंने उसको चूसने के लिए कहा तो उसने झट से मेरा लण्ड अपने होंठों में दबा लिया और चूसने लगी।

मैं उसकी चूत में ऊँगली डाल कर अंदर बाहर करने लगा।
उसकी चूत आग उगल रही थी।
सचमुच बहुत प्यासी लग रही थी वो।
पानी पानी होती चूत में से जैसे भांप निकल रही थी।

कुछ देर लण्ड चूसने के बाद वो उठी और मेरे सर के दोनों तरफ टाँगें करके बैठ गई और अपनी चूत उसने मेरे मुँह पर रख दी।

उसकी जांघें थोड़ी भारी थी।

जब उसने अपनी चूत मेरे मुँह पर रखी तो मेरी तो जैसे साँस ही रुक गई।

पर मैं भी अब पूरी मस्ती में था तो जीभ निकाल कर उसकी चूत चाटने लगा।

जीभ चूत पर लगते ही वो जोर जोर से सीत्कारने लगी, उसकी आँखें बंद हो गई थी मस्ती के मारे।

कुछ देर बाद मैंने जब मेरा लण्ड अकड़ कर मुझे परेशान करने लगा तो मैंने उसको अपने ऊपर से उठाया और नीचे जमीन पर बिछे गलीचे पर ही लेटा लिया।
उसकी जांघों को अलग करके मैंने एक क्षण के लिए उसकी चूत को देखा और फिर अपने लण्ड का सुपाड़ा उसकी चूत के मुँह पर टिका दिया।

‘राज… अब और ना तड़पा… मैं मर जाऊँगी… डाल दे जल्दी से अंदर… फाड़ दे मेरी चूत…’ सपना अब लण्ड लेने के लिए मचल रही थी।

मैंने भी सोच लिया था कि आज इसकी चूत फाड़ कर ही दम लूँगा।
मैंने अपनी गाण्ड थोड़ी ऊपर को उचकाई और एक जोरदार धक्के के साथ लण्ड का सुपाड़ा सपना की चूत में उतार दिया।

सुपाड़ा चूत में जाते ही सपना की एक जोरदार चीख कमरे में गूंज गई।

वो तो मैंने उसके मुँह पर हाथ रख लिया नहीं तो पूरे मोहल्ले को पता लग जाता कि सपना चुद गई।

मैंने उसकी चीख पर ध्यान नहीं दिया और एक और जोरदार धक्का लगा कर करीब तीन इंच लण्ड उसकी चूत में उतार दिया।

सपना दर्द के मारे बिलबिला उठी।

सचमुच बहुत टाईट चूत थी सपना की।
मेरा लण्ड भी जैसे किसी शिकंजे में फस सा गया था।
लड़की सच में ही ढंग से नहीं चुदी थी अब तक।

मैंने एक बार फिर से अपना लण्ड सुपाड़े तक बाहर निकाला और एक जोरदार धक्के के साथ फिर से चूत में घुसा दिया।

सपना एक बार फिर छटपटा कर रह गई।

अब तो मुझे उसके उस दिन वाले थप्पड़ याद आ रहे थे और मन ही मन सोच रहा था कि आज साली से अच्छे से बदला लूँगा।

दो और मस्त धक्को के साथ मैंने पूरा लण्ड सपना की चूत में फिट कर दिया।

‘राज… छोड़ दे मुझे… फट गई मेरी तो… छोड़ मुझे…’ सपना पूरा जोर लगा रही थी मुझे अपने ऊपर से हटाने के लिए।

मेरी कमर पर उसके नाखून गड़ गए थे।
कोई कच्चा खिलाड़ी होता तो कब का पस्त हो गया होता पर मैंने सपना को जकड़ रखा था।

करीब दो मिनट रुकने के बाद मैंने धीरे धीरे लण्ड अंदर बाहर करना शुरू किया।
वो मेरे हर धक्के पर दर्द से कराह उठती थी।

धीरे धीरे लण्ड ने चूत में अपनी जगह बना ली और अब लण्ड थोड़ा आसानी से अंदर बाहर होने लगा।

अब मैंने भी धक्कों की स्पीड बढ़ा दी।

शुरू के पाँच मिनट तक दर्द से तड़पने के बाद अब सपना भी चुदाई का मज़ा लेने लगी थी।

वो भी हर धक्के का जवाब अब अपनी मोटी गाण्ड उठा उठा कर दे रही थी।

मस्त गद्देदार चूत चोदने में मुझे भी बहुत मज़ा आ रहा था।

दोनों ही पसीने पसीने हो गए थे।

‘चोद मेरे राजा… उस साले ने तो प्यासी छोड़ दी थी तू तो प्यास बुझा दे मेरे राजा… चोद जोर से चोद… फाड़ दे मेरे राजा..’
अब सपना मस्ती में बड़बड़ाने लगी थी।
दर्द भरी आहेँ अब मस्ती भरी सिसकारियों और सीत्कारों में बदल गई थी।

मैं उसके दोनों खरबूजों को अपने पंजों में पकड़ कर उसकी चूत पर उछल उछल कर धक्के लगा रहा था।

सपना की चूत ने खुशी में आँसू बहाने शुरू कर दिए थे और पानी पानी हो गई थी।

हर धक्के के साथ अब फच्च फच्च की मधुर आवाज सुनाई देने लगी थी।

‘आह्ह… चोद… चोद मेरे राजा… मैं अब आने वाली हूँ… मेरी चूत झड़ने वाली है राजा…. जोर से मार धक्के निकाल दे सारी गर्मी..’
सपना अब झड़ने वाली थी।

वो अब खूब उछल उछल कर लण्ड चूत में ले रही थी।
कमरे में मस्त चुदाई चल रही थी।

आठ दस धक्कों के बाद ही सपना का शरीर अकड़ गया और उसकी चूत का लावा मेरे लण्ड को गर्म एहसास देता हुआ और मेरे अंडकोष को भिगोता हुआ उसकी जांघ से होता हुआ उसकी गाण्ड को गीला करने लगा था।

मैं अभी नहीं झड़ा था सो मैंने धक्के लगाने जारी रखे।

चुदाई लगभग दस मिनट और चली।
और फिर हम दोनों ही झड़ने को तैयार थे।

दोनों ही तरफ से जबरदस्त धक्के लग रहे थे।

दोनों ही एक दूसरे को पछाड़ने की कोशिश में थे।

और फिर लण्ड ने चूत पर विजय पाई।
चूत एकबार फिर पानी पानी हो गई।
लण्ड भी बेचारा चूत की हार देख नहीं पाया और उसने भी गर्म गर्म लावे से चूत की सींच दिया।

चूत मेरे वीर्य से लबालब भर गई थी।

सपना ने मस्ती में मुझे अपनी बाहों और टांगों में जकड़ लिया था।
वो मेरे वीर्य की आखरी बूँद तक का एहसास करना चाहती थी।

सपना के चेहरे पर पूर्ण संतुष्टि के भाव स्पष्ट नजर आ रहे थे।

दस मिनट हम दोनों ऐसे ही एक दूसरे से लिपटे पड़े रहे।

फिर सपना ने उठ कर मेरे लिए दूध गर्म किया और हम दोनों ने ही गर्म दूध का आनन्द लिया।

श्वेता कमसिन कली थी पर सपना भी उस से किसी भी नजर से कम नहीं थी।

श्वेता तो नहीं मिली पर उसकी बुआ ने मेरे लण्ड पर अपनी चूत की मोहर लगा दी थी।

छोड़ा तो मैंने श्वेता को भी नहीं पर उसके लिए मुझे करीब चार पाँच महीने इंतज़ार करना पड़ा।

वो कहानी फिर कभी… आज के लिए इतना ही…
आपनी कीमती राय इस कहानी के बारे में जरूर बताना।
आपका अपना दोस्त राज आपके मेल की इंतज़ार में…
मेल आईडी तो याद है ना…

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