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भाई की शादी और दीदी की चुदाई

Bhai Ki Shadi Aur Didi Ki Chudai

मैं अन्तर्वासना का एक नियमित पाठक हूँ.. मेरी उम्र 22 साल है। मैं आपको एक रियल कहानी सुनाने जा रहा हूँ।

बात सर्दियों की है.. मेरे भाई की शादी थी.. और सब रिश्तेदार आए हुए थे। मेरी बहन सोनम भी आई थी.. जो मेरे मामा की लड़की है। सोनम बहुत ही सेक्सी है.. वो हमेशा चुस्त कपड़े पहनती है।

सोनम की उम्र 20 साल है.. मगर बहुत ही सेक्सी है.. उसके गोल-गोल आम देखते ही लण्ड खड़ा हो जाता था।

भाई की शादी सर्दियों में थी.. सोनम ने शादी में साड़ी पहनी हुई थी। साड़ी में सोनम को बहुत ठंड लग रही थी। इसलिए वो मेरे साथ आकर खड़ी हो गई।

मैंने सोनम को डान्स करने के लिए कहा और वो मान गई। डान्स करते-करते मैंने सोनम को पकड़ा और उसकी बांहों में बाँहें डाल कर नाचने लग गया।
जैसे-जैसे सोनम मेरे साथ टच होती जा रही थी.. मेरा लण्ड खड़ा होता जा रहा था।

मैंने अपना हाथ सोनम के शरीर पर फेरना शुरू कर दिया.. अब उसे भी ठंड कम लग रही थी, मुझे भी मजा आ रहा था।
रात को जब भाई के फेरे होने लगे.. तो सोनम ने कहा- राज मुझे ठंड लग रही है.. और नींद भी आ रही है।

तब मैं सोनम को कमरे में ले गया.. वहाँ एक रज़ाई थी.. हम दोनों एक ही रज़ाई में घुस गए..
मैंने रज़ाई में सोनम की बाँहों में बाँहें डाल दीं।

सोनम- राज.. ये क्या रहे हो?
राज- सोनम मुझे ना.. ठंड लग रही है.. तुम्हें नहीं लग रही क्या?
सोनम- हाँ यार लग तो रही है.. चलो फिर आज ऐसे ही बाँहें डाल कर सोते हैं।

तभी मैंने सोनम को किस करना शुरू कर दिया। सोनम थोड़ा विरोध करने लगी.. कहने लगी- मैं तुम्हारी बहन हूँ।
मैंने कहा- वो भी तो किसी की बेटी और बहन है.. जिसकी कल भाई चूत मारेगा.. तो मैं क्या ग़लत कर रहा हूँ।
वो हँस पड़ी।

मैंने सोनम की साड़ी खोल दी। अब सोनम को भी मजा आने लग गया था।
सोनम- राज तू किसी को बताएगा तो नहीं ना?
राज- मैं पागल हूँ क्या.. जो किसी को बताऊँगा।

अब सोनम के मैंने सारे कपड़े खोल दिए वो मेरे सामने नंगी खड़ी हो गई थी। मैंने अपने भी सारे कपड़े खोल दिए।
हम एक-दूसरे को चूमने लग गए, अब सोनम मेरा पूरा साथ दे रही थी, सर्दी भी नहीं लग रही थी।

तभी मैंने अपना लण्ड सोनम के हाथ में दे दिया।
सोनम- राज़ तुम्हारा तो बहुत बड़ा है।
राज- क्या बड़ा है?
सोनम- मुझे शर्म आती है बोलने में..
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राज- अब बोलने में शर्म आ रही है.. जब मैं तुम्हारी चूत और गाण्ड में डालूँगा.. तब कितनी शर्म करोगी।
सोनम- नहीं नहीं.. मैं अन्दर नहीं लूँगी। मेरी मासूम सी चूत और गाण्ड तो फट ही जाएगी। तुम बस ऐसे ही मजे ले लो।

मैंने सोनम की एक ना सुनी और उसकी चूत पर क्रीम लगाई और अपना लण्ड चूत में घुसा दिया।

उसकी चूत बहुत टाइट थी, बहुत कोशिश के बाद लण्ड अन्दर गया। मेरे लण्ड से भी खून निकलने लग गया, मैंने फर्स्ट टाइम किसी लड़की की चूत ली थी।
सोनम- आ आ.. मर गई..

वो ज़ोर-ज़ोर से चीखने लगी, तभी मैंने उसके मुँह पर हाथ रखा ‘मरवाओगी क्या.. अभी सब आ जायेंगे।’
‘आपने तो पूरा डाल दिया.. आप बहुत गंदे हो.. अब प्लीज़ थोड़ा सा तो बाहर निकाल लो.. मैं सांस नहीं ले पा रही हूँ।’

मैंने अपना लण्ड बाहर निकाला और देखा कि उसकी चूत से खून निकल रहा था और वो रो रही थी।
मैंने सोनम को चूमा और कहा- प्लीज़ चुप हो जाओ।
फिर उसने मुझे अपने गले लगा लिया और कहने लगी- प्लीज़ इस बार थोड़ा धीरे-धीरे डालना।

फिर मैंने धीरे से डाला और अब सोनम भी मेरा साथ देने लगी।
इस तरह मैंने उसकी चूत का स्वाद ले लिया।

अब मैं उसकी गाण्ड मारना चाहता था। मगर वो मना कर रही थी। थोड़ी देर के बाद वो मान गई..
मगर एक शर्त पर
सोनम- मेरी एक शर्त है..
राज- बोलो..
सोनम- आप ना, धीरे-धीरे अन्दर डालेंगे..

राज- तुम मुझे ‘आप’ क्यों कह कर बात कर रही हो? मुझे राज कहो.. या तुम कहो।
सोनम- नहीं कह सकती..
राज- ऐसा क्यों..?
सोनम- क्योंकि अब आप मेरे पति हो आज से आज मैंने अपना सब आपको दे दिया.. आज से हम पति-पत्नी हैं।

उसकी यह बात सुनते ही मैंने उसकी गाण्ड में लण्ड लगा दिया और डालने लग गया।
सोनम- आह.. आह.. हू हू आह.. कितने प्यारे हो आप आ आह..
फिर मैंने एक ही झटके में पूरा अन्दर कर दिया।

सोनम- आ आआआअ.. ऊऊ.. ईईईई.. प्लीज़ थोड़ा धीरे.. अब तो मैं आपकी ही हूँ.. सारी रात.. जितनी बार मर्ज़ी हो.. ले लेना.. मैं नहीं मना करूँगी.. मगर थोड़ी रफ़्तार कम करो।

फिर मैंने धीरे-धीरे सोनम की गाण्ड मारी, झड़ने के समय मैंने अपन सारा वीर्य उसकी चूत में डाल दिया।

इसी तरह हम रात को एक-दूसरे को जकड़ कर सो गए। जब सुबह हुई तो हमने कपड़े बदले.. सोनम एक तंग सी पजामी डालने लगी। मैंने तभी सोनम को पीछे से पकड़ा और अपना लण्ड घुसा दिया। अचानक लौड़ा घुसने से सोनम चीख पड़ी।

‘आह..हहा.. हाय मार दिया..’
उसकी चीख से बाहर से आवाज आई।
पापा- क्या हुआ सोनम?
हम दोनों सम्भले।

सोनम- पापा कुछ नहीं.. ठोकर लग गई पैर में..
पापा- ठीक है बेटा..

सोनम धीरे से बोली- राज.. मैं अब आपकी ही हूँ.. मैं कहाँ मना कर रही हूँ.. मगर कम से कम बता तो देते.. आप भी ना..
तभी सोनम ने मुझे किस किया और हमने मजे से चुदाई की।

एक हफ्ते तक मैं सोनम की रोज दिन में.. रात में.. चार से पाँच बार लेता रहा।
अब तो सोनम की चाल भी बदल गई थी.. मैंने उसे इतना पेला जो था।

अब उसकी शादी हो गई है.. तब भी वो हमेशा मुझे अपना पति मानती है।
पर मैं उसके बिना अकेला रह गया।
sdheeraj1989@gmail.com

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