Antervasna - Hindi Sex Stories | नई हिन्दी सेक्स कहानियाँ

रोज नई नई गर्मागर्म सेक्सी कहानियाँ Only On Antervasna.Org

भाभी को पेशाब करते देखा फिर चोदा

Bhabhi Ko Peshab Karte Dekha, Fir Choda

नमस्कार दोस्तो! मैं मिथुन आनंद आप सभी के साथ अपने जीवन की एक अनोखी स्मृति बांट रहा हूँ, इससे पहले मैं बता दूँ कि मैं बिहार प्रान्त का रहने वाला हूँ, मेरी उम्र अभी 22 साल की है, और अभी मेरी शादी नहीं हुई है. मैं पिछले सात साल अन्तर्वासना वेबसाइट का नियमित पाठक हूँ, यहाँ से मुझे बहुत कुछ सीखने को मिला जिसके लिए मैं इस साइट का सदा आभारी रहूँगा।
यह कहानी मेरे और मेरे पड़ोस के भाभी के बीच की है, उम्मीद है आप सभी को पसंद आयेगी।

यह कहानी की शुरुआत आज से करीब आठ साल पहले हुई, भाभी जो कि मेरी पड़ोसन हैं, उनकी उम्र उस वक्त 30 साल के आसपास रही होगी, वह दो बच्चों की मां, रंग बिल्कुल गोरा, शारीरिक बनावट काफी आकर्षक तथा एक कयामत जैसे हुस्न की मालकिन हैं। उनके पति कलकत्ता में कुछ काम करते हैं। सास-ससुर से भाभी की नहीं बनती, इस तरह वह घर में अपने बच्चों के साथ अकेले ही रहती थी।

एक दिन की बात है मैं दोपहर करीब ढाई बजे सो के उठा, मुझे काफी जोर से पेशाब लगा था, मैंने हाफ पैंट और गंजी पहनी थी, अण्डरवीयर न पहनने के कारण मेरा लंड एकदम से पैंट में तना हुआ दिख रहा था।
मैं वही अपने घर के पीछे जाकर मूतने लगा. काफी देर तक पेशाब करने के बाद मैं लंड को हिला हिला के लंड से लगी पेशाब की बूंदों को गिरा रहा था, ऐसा करने में मुझे बहुत मजा आता है और यह एक सामान्य बात भी है।

पर जैसे ही मेरी नज़र सामने पड़ी, मैं हैरान रह गया, मैंने देखा कि मेरी पड़ोसी भाभी एकटक मेरे लंड को निहार रही थी, वो इतनी खो चुकी थी कि हमारी नज़र मिलने के बाद भी देखती रही। पर मैं उस वक्त सेक्स की बातों से अन्जान रहा, मैंने शर्म के मारे जल्दी से अपना लंड अन्दर किया और वहाँ से वापस आ गया।

शाम को भाभी मेरे घर आई तो मैं शर्म के मारे उनसे नज़र नहीं मिला पा रहा था, भाभी ने कुछ देर मेरी मम्मी से बात की, फिर चली गयी।
पर वह मन ही मन अब मेरे बारे में कुछ और सोचने लगी थी।

दो चार दिन बाद जब वह आयी उस वक्त मैं घर में अकेला था, भाभी कुछ अजीब सा मजाक करने लगी, हालांकि हमारे बीच पहले भी मजाक होती थी पर दूर से ही, आज वो मेरे काफी करीब आयी और बार बार मेरा गाल छू रही थी, मुझे भी यह काफी अच्छा लगा और मैं भी उसी के अनुरूप प्रतिक्रिया देने लगा.
फिर वो चली गई.

उसके बाद यह सिलसिला काफी समय तक चला।

एक मैं उनके घर गया तो वो अन्दर खाट पे सोयी थी, मैं भी जाकर उनके कमर के पास उसी खाट पे बैठ गया, हमारी बातें शुरू हुई, कुछ बाद उन्हें खांसी होने लगी, वो अपने हाथ सीना दबाने लगी, इसी में उनके ब्लाउज का एक बटन खुल गया. वो ब्रा नहीं पहनी थी तो भाभी की चुची दिखने लगी थी.

तभी वो फिर जोर से खांसी और मेरे हाथ उठा के सीने पर रख दिया और दबाने का इशारा किया। मैं दबाने लगा; कुछ देर बाद वो शांत हुई पर मैं अपना हाथ नहीं हटाया और वहीं चुची पर फेरने लगा, मुझे इसमें काफी मजा आ रहा था और मेरा लंड तो पूरा तन चुका था.

भाभी मेरी मन:स्थिति से पूर्णतः वाकिफ हो चुकी थी पर उन्हें कोई ऐतराज न था बल्कि वो मन्द मन्द मुस्कुरा रही थी और बोल रही थी- अब तुम शादी करने के लायक हो गये।

मैं उस दिन करीब आधा घंटा वहाँ रुका और इस बीच कई बार उनके चुची और पेट पे हाथ फेरा.

उस दिन मैं वापस अपने घर आया और सो गया, मेरी आँखों के सामने वह अनोखा दृश्य घूमने लगा, मन बार बार एक ही बात पूछ रहा था कि वापस क्यूं आया?
यही बात सोचते मेरा लंड पूरा तन गया.
तभी मेरा हाथ मेरे लंड पे पहुंचा, मैं उसे सहलाने लगा, मुझे और मजा आने लगा, तब मैंने पैंट अन्दर हाथ डाला, फिर मुझे और मजा आने लगा. ऐसा करते करीब 15 मिनट बाद मेरे लंड से माल निकालने लगा, मैंने जल्दी जल्दी उसे गमछे से पौंछा.

यह मेरा पहला हस्तमैथुन था, मुझे काफी मजा आया.
फिर उसके बाद तो भाभी के नाम की मैंने न जाने कितने बार मुठ मारी।

फिर एक दो दिन बाद मैं सुबह सुबह अपने छत पे घूम रहा था, तभी भाभी अपने घर के पीछे आयी और अपनी साड़ी ऊपर करके मूतने के लिए बैठे गयी. भाभी की गांड देख मेरा रोम रोम सिहर उठा, मैंने जल्दी से अपने चारों ओर देखा कि कोई मुझे देख नहीं रहा है; फिर उनकी गांड देखने लगा; मेरा लंड फिर तन चुका था.

पर जब भाभी पेशाब कर के उठी तो भाभी ने मुझे देखते देख लिया, फिर वो अन्दर चली गयी मैं भी नीचे आकर सीधे बाथरूम में गया उनके बारे सोचते ब्रश किया नहाया, नहाते समय मैंने उनके नाम की फिर एक मुठ मारी।

उस दिन दोपहर को उन्हें फिर मुझे बुलाया, मुझे लगा आज तो सुबह वाली बात के लिए पक्का डांटेगी… और हुआ भी कुछ ऐसा ही… उन्होंने कहा कि ऐसा करते अगर कोई देख लेता तो क्या होता?
मैंने उनको आश्वासन दिया कि अब ऐसा नहीं होगा.

फिर उनका छोटा बेटा जो करीब डेढ़ साल का था, वो जग गया, भाभी ने अपना ब्लाऊज खोला, अपनी मांसल चुची बाहर निकाली और उसे दूध पिलाने लगी. मैं भाभी की चुची को देखने लगा, वो भी मुझे देख रही थी।
जब उनका बेटा सो गया तो मुस्कुराते हुए मुझसे बोली- मैं इसे ढक लूं या और देखना है तूने?
मैं कुछ नहीं बोला और उनके पलंग पे जा के बैठ गया और उनकी चुची छूने लगा.
वो मजाक में मुझे गाली दे रही थी.

भाभी ने अपना हाथ बढ़ा कर मेरा लंड पकड़ लिया, तभी मैंने झुक कर उनके होंठों को चूमा, फिर चूसने लगा. वो इसमें मेरा पूरा साथ दे रही थी.

फिर मैं उठा और उनके बेटे को उठा कर दूसरी ओर लिटा दिया और इस ओर से उनके ऊपर लेट कर फिर उनके होंठ चूसना चालू कर दिया और एक हाथ से उनकी चुची मसलने लगा।

अब हम पूरे जोश में थे, मैं अपना लंड भाभी की चुत के ऊपर ही रगड़ रहा था.
काफी देर तक ऐसा ही चलता रहा, फिर मेरा माल निकल गया और मैं भाभी के ऊपर निढाल होकर पड़ा रहा।

जब मैं उठा तो देखा कि माल निकलने के कारण मेरी पैंट भी गीली हो चुकी थी.
भाभी यह देख कर हंसने लगी.
मैं बोला- अब ऐसे में मैं घर कैसे जाऊँगा, कोई देखेगा तो पूछेगा कि वहाँ क्या चल रहा था.

तो भाभी बोली- कुछ नहीं होगा, इसे अच्छे से पौंछ लो, थोड़ी देर में सूख जायेगा.
मैं कुछ नहीं बोला तो वो एक पेटीकोट देते हुए बोली- इसी से पौंछ लो… या ये भी मुझसे ही करवाओगे?
मैं बोला- आप ही पौंछ दो न!

तब मैं बिछावन से नीचे उतरा और मेरी पैंट नीचे सरका दी और भाभी मुझे मजाक में ताने मारते हुए पौंछने लगी.

इस बीच मेरे लंड फिर खड़ा हो गया तो भाभी बोली- क्यों? ये नहीं मानेगा क्या?
और हाथ से मेरी मुठ मारने लगी, थोड़ी देर बाद वो मेरा लंड मुह में लेकर चूसने लगी।

इस बार मुझे काफी मजा आया, मैं पूरी तरह से मदहोश हो चुका था और अंत में मैं भाभी के मुँह में ही झड़ गया.
फिर मैं कहाँ मानने वाला था, कहा- भाभी, अब तेरी चुत में करना है.
तो वो नहीं मानी.

मैंने काफी अनुरोध किया पर बात नहीं बन पाई, फिर मैं अपना घर आ गया।

फिर एक दिन शाम को वो मेरे घर आई, मैं उस वक्त छत पर था, वो भी कुछ देर नीचे रुकने के बाद छत पर आ गई. फिर हम लोगों के बीच मजाक होने लगा.
थोड़ा थोड़ा अंधेरा हो चुका था जिनका मैंने फायदा उठाया, पहले तो मैंने उन्हें छूना शुरू किया, फिर एक हाथ उनके कमर के पास से साड़ी के अन्दर घुसा दिया.

मेरा हाथ भाभी की चुत तक पहुंच चुका था, मैंने पाया कि भाभी ने अपनी चुत के बाल बनाये हुए थे, भाभी की चुत बिल्कुल चिकनी थी.
फिर मैंने एक उंगली भाभी की चुत में अन्दर घुसा दी, पर भाभी ने जोर से मुझे धक्का दिया, जिससे हमारे बीच कुछ फासला हो गया और मेरा हाथ भी बाहर निकल गया.

फिर वो बोली- ऐसा क्या छत पे करते हैं क्या? कोई देख ले तो पता भी है क्या होगा?
थोड़ी ही देर बाद वो नीचे चली गयी।

फिर क्या था… यह बात तो साफ हो चुकी थी कि अगर व्यवस्था सही से हो जाये तो फिर इसे आसानी से चोदा जा सकता है पर अब एक ही समस्या थी कि ऐसी व्यवस्था किया कैसे जाए।

इस रोज से मैं पूरा पागल हो चुका था, मुझे किसी भी तरह अब उन्हें चोदना ही था। इस उलझन में मैंने न जाने कितने बार मुठ मारीं.

आखिर चार दिन बाद जाकर मुझे एक मौका मिला, मेरे घर के लोग सामान की खरीदारी करने बाज़ार जा रहे थे, जो मेरे घर करीब पांच किलोमीटर दूर है, उस मैं घर पर अकेला रहने वाला था, मेरा पूरा ध्यान अब योजना बनाने पर था कि अब कैसे क्या करना है।

सुबह करीब ग्यारह बजे सब लोग बाजार की ओर निकल गये, मेरी तैयारी भी पूरी हो चुकी थी.

करीब बीस मिनट बाद मैं अपने घर की छत पे गया तो देखा कि भाभी के यहाँ पास की कुछ महिलाएँ बैठीं थी और बात चीत चल रही थी।
फिर मेरे दिमाग में एक आईडिया आया, मैं उनके घर गया और कहा कि मेरी दीदी आपको बुला रही और जल्दी आने को कहा है!

इतना कह कर मैं एकदम सभ्य लड़के की तरह अपने घर आ गया.

थोड़ी देर बाद भाभी भी आ गई, और पूछने लगी- दीदी कहाँ है?
तो मैंने कहा- अन्दर कुछ काम कर रही हैं!

भाभी अन्दर आ गई, फिर मैं भी उनके पीछे ही आया और दरवाजे का पर्दा गिरा के दरवाज़ा अन्दर से बन्द कर दिया.

मुझे अन्दर देख कर भाभी पूछने लगी कि घर में तो कोई भी नहीं है?
तो मैंने कहा- इसीलिए तो आपको बुलाया है भाभी!

फिर मैं उनसे लिपट कर चुम्मा चाटी करते हुए उनको बिछावन तक ले आया। फिर उनके होंठ और चुची को खूब चूसा, भाभी ने अपने हाथ से मेरा लंड पकड़ रखा था.
फिर धीरे धीरे कर हम दोनों ने एक दूसरे के कपड़े उतार दिए, उसके बाद भाभी ने लंड मुँह में ले लिया और मैं उनकी चूत पे हाथ फेरने लगा.

ऐसा करते हम दोनों 69 के पोजीशन में आ गये। हम दोनों एक दूसरे के मुख में झड़ चुके थे, फिर मैं उठ सीधा हुआ और अपना लंड भाभी की चूत रख दिया. तीन चार बार वहीं रगड़ा, फिर अन्दर पेल दिया. भाभी की चुत गीली और फैली हुई थी जिससे मेरा लंड एक बार में अन्दर चला गया.

काफी देर तक अन्दर बाहर करने के बाद मैं उनकी चुत में ही झड़ गया।

उसके बाद हम दोनों एक दूसरे को काफी जोर से लिपट के करीब दस मिनट तक पड़े रहे।

उस दिन मैंने फिर दो बार भाभी से सेक्स किया, फिर चुत चुदाई करवा कर भाभी वो अपने घर चली गयी।

फिर जब भी हम दोनों को मौका मिला हम दोनों ने उसका पूरा फायदा उठा के चोदन किया।

दोस्तो, यह मेरी ज़िन्दगी की पहली चुदाई थी। आपको कैसी लगी पढ़ कर?
maithunaanad@gmail.com

Updated: May 5, 2018 — 10:06 am
Antervasna - Hindi Sex Stories | नई हिन्दी सेक्स कहानियाँ © 2018