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भाभी को अपनी बीवी समझ कर चोदा

Bhabhi Ki apni Biwi Samajh Kar Choda

दोस्तो, मेरा नाम सुमित है. मैं अन्तर्वासना पर पहली बार कोई कहानी लिख रहा हूँ. मैंने बहुत सी कहानियाँ पढ़ी हैं. पर कभी खुद की नहीं लिखी थी. मैं लखनऊ का रहने वाला हूँ और नोयडा में जॉब करता हूँ. इसलिए यहाँ पर किराये पर कमरा लेकर मैं अकेले ही रहता हूँ.

यह बात आज से कुछ महीने पहले की है. मेरी 3 दिन की छुट्टी थी इस वजह से मैं अपने अपने बड़े भैया के घर गया हुआ था. उस समय वहाँ बहुत गर्मी थी.

मेरे भैया एक बड़ी कंपनी में सेल्स मैनेजर हैं. उनके घर में वो, भाभी और उनकी 3 साल की बेटी रहती है. भाभी और मेरी उम्र एक समान ही है तो मैं हमेशा भैया के पैर छूता था और भाभी को गले से लगा लेता था.. जिससे भाभी भी बहुत खुश होती थीं.. और भैया बस डांट कर चुप हो जाते थे.

जब मैं वहाँ गया तो उसके अगले दिन भैया को काम के सिलसिले में 4 दिनों के लिए बाहर जाना पड़ा. वो अगले सुबह 5 बजे निकल गए. मैं भैया को स्टेशन पर छोड़ कर वापिस आ गया और सो गया.

जब मैं उठा तो देखा कि भाभी भी मेरे पास सोई हैं. मैंने पूछा कि आप अपने कमरे में क्यों नहीं सोई तो उन्होंने बताया कि वहाँ बाबू सो रही है तो उसके वजह से उधर एसी नहीं चला पा रही हूँ, क्योंकि उसे ठण्ड लग जाएगी.

मैंने भाभी को बोला- आप मुँह ढक लीजिये, मुझे कम्बल से बाहर निकलना है.
ऐसा मैंने इसलिए कहा क्योंकि मैं हमेशा ही सिर्फ चड्डी पहन कर सोता था.
पर भाभी ने कहा- मैं नहीं करूंगी, आप मेरे देवर हैं. आपसे मजाक करने का मेरा हक है.

अब मैं सोच रहा था क्या करूँ? पर मुझे टॉयलेट जाना था, जो बहुत जरूरी था तो मैं ऐसे ही उठ गया.

आप सब तो जानते ही हैं कि सुबह सो कर उठो तो लंड खड़ा रहता है. जब मैं जमीन पर पैर रख कर खड़ा हुआ तो मेरी नजर लंड पर गई और मैंने तुरन्त एक तकिया लेकर छिपा लिया. मैंने देखा भाभी की नजर मेरे लंड पर ही थी और उनका मुँह हैरत से जैसे खुला ही रह गया था.
फिर मैं वहाँ से टॉयलेट तक भाग कर गया.

थोड़ी देर बाद फ्रेश होने के बाद अब मेरा लंड कुछ शांत सा हो गया था तो मैं बिना शर्म किए कमरे में ऐसे ही आ गया और कपड़े पहनने लगा.
भाभी अब मुझसे कुछ नहीं बोल रही थीं, बस हल्का हल्का मुस्कुरा रही थीं और मेरे लंड की तरफ देख रही थीं.

मैंने उनको चाय बनाने को बोल दिया तो पहली बार उन्होंने नहीं सुनी, शायद कहीं खोई हुई सी लगीं.
तो मैंने उनको हिलाया और कहा- क्या सोच रही हैं भाभी जी.. चाय नहीं पिलाएंगी?

भाभी जैसे लंड के सपने से बाहर निकलीं और चाय बनाने चली गईं.
चाय के बाद मैं रोज के सारे काम करके बाहर घूमने चला गया और जब आया तो देखा भाभी किचन में खाना बना रही थीं. भाभी ने एक पतली सी नाईटी पहनी हुई थी, जिसमें से उनकी गांड और पेंटी दिख रही थी.

मैं वापिस जाने लगा तो भाभी ने मुझे रोक लिया और कहने लगीं- अभी बाहर से आए हो, पर अपनी भाभी को गले नहीं लगाया.
मैं दूसरी तरफ देखता हुआ भाभी के पास गया और उनको गले से लगा लिया.

इस बार मेरे हाथ भाभी की लगभग नंगी पीठ पर थी और भाभी मेरे से बिल्कुल चिपक गई थीं. आज उनके यूं चिपकने से मुझे कामुकता का अहसास होने लगा. मेरा मन बहकने लगा और मेरा हाथ धीरे धीरे भाभी की गांड पर जाने लगा और मेरा लंड खड़ा होने लगा, जिसे भाभी महसूस कर रही थीं.

भाभी ने मेरा हाथ पकड़ लिया और कहा- देवर जी बहक रहे हो क्या?
मैं- नहीं भाभी हाथ फिसल गया था.
मैं वापिस कमरे में चला गया.

फिर भाभी ने खाना बना कर मुझे बुलाया, तो मैंने देखा भाभी ने साड़ी पहन ली है और ब्लाउज़ की जगह सिर्फ ब्रा पहन रखी है.. जिसमें से उनकी गोरी चूचियां दिख रही थीं. मैंने सवालिया निगाहों से भाभी की तरफ देखा तो बोलीं- मुझे गर्मी लगती है तो मैं ब्लाउज नहीं पहनती हूँ.
मैंने भी कुछ नहीं कहा और बस उनकी चूचियों को देख कर लार सी टपकाती आँखें चमका दीं.

भाभी मेरी आँखों में वासना देख कर मुस्कुरा दीं और इठला कर अपनी ब्रा को ठीक करने के बहाने मुझे दिखाने लगीं.

हम दोनों खाना खाने डाइनिंग टेबल पर बैठ गए. खाना खाते वक्त भी मैं सिर्फ भाभी की चूचियों को देख रहा था.
भाभी ने मुझे देख लिया और बोलीं- खाना खा लीजिये, उसके बाद आपको गाढ़ा दूध पिलाऊँगी.

इतना कहने के साथ ही भाभी ने अपनी साड़ी का पल्लू पूरा गिरा दिया. मैं देख कर दंग रह गया और अपना हाथ आगे बढ़ा कर उनकी चुचियों को पकड़ने के लिए हाथ आगे बढ़ा रहा था. तब तक भैया की बेटी भागते हुए आई, भाभी ने उसे अपनी गोद में उठा लिया. मैंने हाथ वापस खींच लिया.

अब मैं खाना खा कर अपने कमरे में चला गया और सिर्फ चड्डी पहन कर चादर में लेट गया. थोड़ी देर बाद भाभी हाथ में गिलास लेकर आईं. गिलास में दूध था.
मैंने भाभी से बोला- मुझे दूध नहीं पीना है.

तो भाभी ने गिलास को टेबल पर रखा और जब झुकी तो उनका पल्लू नीचे गिर गया. जिसे देख कर मेरा लंड खड़ा होने लगा और चादर के ऊपर से भाभी को देखने लगा. जिसे देख कर भाभी मुस्कुराने लगीं और बिना पल्लू उठाये मेरे पास बैठ गईं.

भाभी- देवर जी, अब भी चड्डी में ही सोये हैं क्या?
मैं- हां भाभी, मुझे कपड़े पहन कर नींद नहीं आती.
मैंने लंड के ऊपर तकिया रख लिया.

भाभी- दूसरे कमरे में बाबू सो रही है तो एसी नहीं चला सकती. क्या आपके साथ सो सकती हूँ?
“पर मैं केवल चड्डी में हूँ.”
भाभी- तो क्या आप कुछ कर देंगे मेरे साथ?
मैं- नहीं भाभी.
भाभी- ठीक है फिर मैं आपके साथ सोऊंगी.

भाभी मेरे पास लेट गईं. अब मैं और भाभी अलग अलग चादर में सोये थे भाभी ने अपना पल्लू हटा रखा था और चादर बस कमर तक ओढ़ रखा था, जिससे उनकी चुचियां मस्त दिख रही थीं.

भाभी- आपकी कोई जीएफ है?
मैं- नहीं भाभी.
भाभी- आप झूठ बोल रहे हैं, अपना फ़ोन दिखाईये, उसमें पक्का जीएफ की फोटो होगी.

मैं भाभी के पास आ गया फ़ोन में फोटो दिखाने के लिए और मेरा चादर मेरे पेट तक हट गया. अब भाभी के हाथ में फ़ोन दे दिया, जिसे भाभी देख रही थी. फिर मेरा हाथ अपने आप भाभी के पेट पर चला गया.

मुझे याद नहीं था कि मेरे फ़ोन में चुदाई की फोटो और वीडियो थी.. जिसे भाभी देखने लगीं. मैंने जल्दी से भाभी से फ़ोन छीना तो भाभी मेरे से बिल्कुल चिपक गईं, उनकी नंगी चुची मेरे सीने से दब गईं.
भाभी ने अपनी चूचियां मेरे सीने से रगड़ते हुए कहा- दिखाईये न फ़ोन.
मैं- नहीं भाभी, इसमें गंदी चीजें हैं.
भाभी- ये गंदी नहीं होतीं, इससे ही तो जिन्दगी आगे बढ़ती है.
मै- नहीं भाभी, आप भैया को बता देंगी.
भाभी- आपके भैया भी मेरे साथ ये करते हैं, पर आज तक दिखाया नहीं है मुझे.. क्या आप भी नहीं दिखाएंगे?

भाभी उदास होकर दूसरे साइड मुँह करके लेट गईं.
मैंने भाभी के हाथ को पकड़ लिया और उन्हें अपनी तरफ घुमा कर उनके हाथ में फ़ोन दे दिया. अपना हाथ उनकी कमर पर रख कर चुदाई की वीडियो देखने लगा.

अब मैं भाभी के ही चादर में आ गया और उनसे चिपक कर भाभी को ब्लूफिल्म दिखाने लगा. भाभी को अच्छा लग रहा था. मेरा लंड भाभी की साड़ी के ऊपर से ही उनकी चूत को चूमने लगा.

अब भाभी गर्म होने लगी थीं, उनकी सांसें तेज तेज चलने लगी थीं. हम दोनों के ऊपर से चादर हट गया था.

मैं- भाभी आपको पसीना आ रहा है. एसी को और ठंडा कर दूँ क्या?
भाभी- हाँ..
मैं- भाभी एसी एकदम कम टेम्प्रेचर पर है.
भाभी- पर मुझे गर्मी लग रही है.
मैं- तो भाभी आप भी कपड़े उतार दो और मेरी तरह चड्डी में लेट जाओ.
भाभी ने मेरी तरफ देखा और मुस्कुरा कर कहा- मैं मोबाइल में चुदाई देख रही हूं.. आप ही मेरी साड़ी निकाल कर अपनी तरह नंगी कर दीजिये.

अब मैं भाभी की कमर से साड़ी निकलने लगा और ऐसा करते वक्त उनकी नाभि को अपनी जीभ से चाट लिया. भाभी ने एक सेकेंड के लिए आँखें बंद कर लीं और फिर मैंने भाभी की साड़ी पूरी निकाल दी.

मैं उनकी टांगों के बीच बैठ कर उनकी पेंटी, जो चूत पर गीली थी.. उसे देखने लगा. भाभी ने चुदाई वाली वीडियो की आवाज बढ़ा दी.. जिससे मैं और जोश में आ गया और भाभी की चूत को सूँघने लगा. भाभी ने चोर नजरों से मुझे देखा और पैर फैला कर मुस्कुरा दी.

अब मैं भाभी को बांहों में लेकर लेट गया. भाभी ने वीडियो में लंड देख कर बोला- ये कितना बड़ा लंड है.
मैंने बोला- हां भाभी.
तो भाभी ने बोला- बिल्कुल आपके लंड जैसा है.
यह बोलकर भाभी मुस्कुराने लगीं.
मैं शर्माने लगा.

अब भाभी बोलीं- आप बहुत गन्दे हैं खुद तो चड्डी में हैं और मुझे ऊपर की तरफ गर्मी लग रही है.. उसका क्या?
तो मैंने भाभी को बोला- आपके ऊपर वाले आइटम का हुक पीछे है भाभी.

तो भाभी मेरी तरफ गांड करके उल्टा लेट गईं. मैं भाभी की ब्रा खोलने लगा और ब्रा खोल कर उनकी नंगी पीठ देखने लगा उनकी 28 की कमर और 36 की गांड बहुत प्यारी लग रही थी.

भाभी ने नीचे छोटी सी पेंटी पहन रखी था.. जिसमें उनके नंगे चूतड़ बाहर से ही दिख रहे थे. मैं भाभी के चूतड़ सहलाने लगा और हल्का हल्का दबाने लगा. साथ ही भाभी की नंगी पीठ को चाटने लगा.
अब भाभी सीधी लेट गईं और अपनी नंगी चुचियां दिखाते हुए कहने लगीं- अब तो आप दूध पी लीजिये.
मैंने भाभी की चुचियों को पकड़ लिया और बोला- मुझे तो यहां से दूध पीना है.

भाभी ने मेरे होंठों पर होंठ रख दिये और फ़ोन बैड पर गिरा दिया. अब हम दोनों एक दूसरे से चिपक गए और होंठों को चूसने लगे. भाभी ने मेरा लंड पकड़ लिया और मैं उनकी दोनों चुचियों को दबाने में लगा था.

भाभी ने दो पल बाद मुझे दूर किया और सीधा लेट कर बोला- जहां से मन हो, वहाँ से सब पी लीजिये.
मैं- भाभी मैं आपको गन्दा वाला किस करना चाहता हूँ.
भाभी- वो कैसे होता है?
मैं- भाभी जिसमें हम दोनों एक दूसरे के मुँह का पानी पिएंगे!
भाभी- देवर जी मैं बहुत प्यासी हूँ. मुझे आज सब कुछ पिला दीजिये.

मैं भाभी को पकड़ कर उनके होंठों में अपनी जीभ को डाल दिया और उनके मुँह में अपने मुँह का पानी भर दिया. भाभी बैड पर सीधा लेटी हुई थीं तो मैं उनके ऊपर लेट गया और अपना लंड उनकी पेंटी के ऊपर से ही उनकी चूत पर रगड़ कर उनके मुँह में अपने मुँह का पानी डाल रहा था.

भाभी उठने लगीं तो मैं नीचे लेट गया. भाभी ने अपनी दोनों टांगें फैला कर अपनी चूत को मेरे लंड पर रख दिया और अपनी जीभ निकाल कर मुझे दिखाने लगीं. उनकी जीभ से उनके मुँह की रस चू रहा था, जिसे मैं पी रहा था. वो भी मेरे मुँह में अपना मुँह डाल कर मेरी जीभ को चूसने लगीं.

भाभी- मैं तुम्हारा लंड देखना चाहती हूँ जो मुझे सुबह से तड़पा रहा है.
मैं- भाभी मैं भी आपकी चूत देखना चाहता हूँ, जिसकी खुशबू मुझे पागल बना रही है.

भाभी घूम कर 69 में हो गईं और मेरी चड्डी निकालने लगी.. साथ में मैं भी उनकी पेंटी निकालने लगा.
फिर हम दोनों ने एक साथ बोला- वॉव, क्या माल है.

मैं भाभी को और भाभी मुझे देख कर हंसने लगे. फिर मैंने भाभी की चूत को सूंघना शुरू कर दिया. भाभी मेरे लंड को अपनी उंगलियों से सहला कर देख रही थीं. जैसे ही मैंने भाभी की चूत को किस किया भाभी मेरे ऊपर से उतर गईं.
मैंने पूछा- क्या हुआ?
तो भाभी ने कहा- मुझे तुम्हारे लंड का साइज़ देखना है.
मैंने पूछा- कैसे?

भाभी नंगी ही गांड मटकाते हुए दूसरे कमरे में गई और एक स्केल लेकर आईं, उससे मेरा लंड नापने लगीं. वो स्केल बस 6 इंच वाला था तो मेरा सुपाड़ा और थोड़ा सा लंड अभी बाहर था. फिर भाभी ने किसी तरह बचा हुआ लंड नाप लिया. बाद में जोड़ कर बताया कि लंड 8 इंच का है.
मैं सोच रहा था कि ये भाभी क्या कर रही हैं?

फिर भाभी मेरे लंड को किस करने लगी जो मुझे अच्छा लग रहा था. अब भाभी मेरे लंड को चाटने लगीं और मुँह में लेकर चूसने लगीं. मैंने भाभी को खींच लिया और उनको घुमा कर अपने मुँह पर चढ़ा लिया. मेरी जीभ बाहर निकली हुई थी जो सीधा भाभी की चूत में घुस गई. भाभी की ‘आह..’ निकली और वो मेरे लंड पर गिर गईं, जिससे मेरा लंड उनके मुँह में गले तक घुस गया. अब उनको लंड चूसने में मजा आने लगा और मुझे भाभी की चूत चाटने में.

मैंने भाभी को फिर से पलटा कर 69 में किया और उनके ऊपर आ गया. उनके मुँह को लंड से चोदने लगा, साथ में उनकी चूत को चूसने लगा. अब मैं भाभी की गांड को भी चाट रहा था, जिससे भाभी बहुत उत्तेजित हो गईं और चूत उछाल उछाल कर झड़ने लगीं.

उनकी चूत का रस बाहर आने लगा, जिसे मैं जीभ से रगड़ कर चाटने लगा. भाभी से ये बर्दाश्त नहीं हुआ और उनकी चूत से सुसु बाहर आने लगी.

मैंने सोचा अगर भाभी उठ गईं तो फिर मजा नहीं आएगा.. इसलिए मैंने उनकी चूत पर मुँह लगा लिया और उनका सुसु भी पीने लगा.

वो मुझे हाथ से हटा रही थीं, लेकिन मेरी मजबूत पकड़ के कारण कुछ कर नहीं पाईं. उनके गले में मेरा लंड भी फंसा हुआ था, सो वे कह भी नहीं पाईं.

जब भाभी पूरी तरह से खाली हो गईं तो मैं दुबारा उनकी चूत चाटने लगा. अब भाभी को अच्छा लगा और वो भी मेरा लंड चाट कर गीला करने लगीं. मुझसे भी बर्दाश्त नहीं हो रहा था, मैं उनको चोदना चाहता था.

मैं उठ गया और भाभी के टांगों के बीच आकर उनकी चूत पर लंड रगड़ने लगा. भाभी मेरे हाथों को पकड़ कर अपनी कमर उछालने लगीं.

भाभी- देवर जी अब मत तड़पाओ.. चोद दो अपनी भाभी को..
मैं- भाभी, भैया नहीं चोदते हैं आपको?
भाभी- वो काम में बिज़ी रहते हैं.. मुझे चोदे हुए 3 महीने हो गए.
मैं- तो भाभी आपकी चूत तो चिपक गई होगी?
भाभी- हां बस मूतने के लिए छेद खुला है… थोड़े दिन में वो भी बंद हो जाएगी.

मैंने भाभी की चूत का चुम्बन करना शुरू कर दिया और एक उंगली भाभी की चूत के अन्दर डालने लगा पर उंगली बहुत मुश्किल से अन्दर जा पा रही थी.

मैं समझ गया कि भाभी की चूत टाइट है इसलिए मैंने उनसे पूछा- भाभी सरसों का तेल है?
भाभी ने कहा- किचन में है.

मैंने सरसों का तेल लाकर भाभी की चूत पर लगाया और थोड़ा थोड़ा अन्दर को भी डाल दिया. अब मैंने भाभी की चूत पर लंड रख दिया.
मैं- भाभी थोड़ा बहुत दर्द होगा.
भाभी- तीन महीने की तड़प से अच्छा है आज दर्द सह लूं. प्लीज देवर जी चोद दीजिये अपनी भाभी को.

मैंने भाभी को कस कर पकड़ लिया और उनके होंठों को अपने मुँह में भर लिया.. और एक जोरदार झटका मारा. मेरा लंड भाभी चूत को फाड़ता हुआ घुस गया. भाभी की आँखें फैल गई. उनके नंगे जिस्म को एसी में भी पसीना आने लगा और उनकी आंखों से आंसू बहने लगे.

अब मैं भाभी को किस करने लगा और उनकी चुचियों को दबाने लगा. उनके निप्पलों को उंगलियो में पकड़ कर मसलने लगा, जिससे भाभी को अच्छा लगने लगा और भाभी ने अपनी जीभ मेरे मुँह में डाल कर मेरे जीभ को चूसना शुरू कर दिया.

अब भाभी अपनी कमर हिलाने लगीं तो मैं झुक कर भाभी के निप्पल को चूसने लगा. भाभी से बात करने लगा.
मैं- भाभी आपकी चूत बहुत टाइट है.
भाभी- मेरी चूत को फाड़ कर ढीला कर दो देवर जी.
मैं- भाभी, आप नंगी होकर बहुत खूबसूरत लगती हो.
भाभी- मुझे इतना चोदो कि मैं हर टाईम नंगी ही रहूँ.
मैं- और भैया आयेंगे तब?
भाभी- तब रात को आपके पास आऊंगी नंगी होकर सोने.. क्योंकि आपके भैया को एसी से प्रॉब्लम होती है.

ये बात मुझे बहुत अच्छी लगी और मैं भाभी को हल्का हल्का चोदने लगा. मेरी नंगी भाभी मेरी पीठ को सहलाने लगीं और जोर जोर से बोलने लगीं- देवर जी फाड़ दो मेरी चूत को.. आह आह चोदो मुझे देवर जी.

मैं भाभी को चोद रहा था और भाभी से बोल रहा था- लो भाभी अपने देवर का लंड अपनी चूत में पूरा खा लो..
भाभी बोलीं- बहुत मजा आ रहा है उम्म्ह… अहह… हय… याह… आपका बहुत मस्त लंड है.

कुछ देर मस्ती से चुदाई करने के बाद मैंने भाभी से बोला- भाभी, आप कहो तो बाकी का आधा लंड भी घुसा दूँ?
भाभी की आँखें फैल गईं और बोलीं- क्या? अभी बस आधा ही घुसा है???
मैंने बोला- हाँ भाभी.
तो भाभी ने कहा- सूखी हुई धरती पर बाढ़ आ गई. अब तो ठोक दो मेरी चूत को.. फाड़ दो देवर जी.

मैंने कमर पीछे की.. और जोर का झटका मारा तो बचा हुआ लंड भी घुस गया और भाभी की चीख निकल गई.
भाभी रोती हुई बोलीं- मुझे चोदो जोर से.. मत रुको देवर जी.. मैं आज बहुत चुदना चाहती हूँ.

मैं भाभी को तेज तेज चोदने लगा. अब भाभी को और मजा आने लगा. वो खुद कमर हिला हिला कर चुदवाने लगीं और अपनी चूत का रस निकालने लगीं. मैं भाभी को धकापेल चोद रहा था. उनकी गीली चूत से ‘फच फच..’ की आवाज गूंजने लगी.
वो मुझसे ‘चोदो जोर से.. चोदो..’ बोल कर चुदवाने लगीं.

भाभी की चूत बहुत टाइट थी तो मेरा लंड भी अब झड़ने की कगार पर आ गया. मैंने पूछा- कहां निकालूँ भाभी?
तो उन्होंने बोला- मुझे एक बेटा चाहिये. अन्दर ही निकाल दो.

मैंने भाभी की चूत को अपने वीर्य से भर दिया और उस टाईम दुबारा भाभी झड़ गईं. हम दोनों एक दूसरे के नंगे जिस्म को सहलाने लगे और मैं उनके निप्पल को चूसने लगा. अभी भी मेरा लंड भाभी की चूत में ही घुसा हुआ था.

भाभी रोने लगीं.
मैंने पूछा- क्या हुआ?
भाभी- मेरी चूत को ये अहसास देने के लिए शुक्रिया.
मैं- भाभी आप रो क्यों रही हैं?
भाभी- इसलिए क्योंकि आपके भैया मुझे नहीं चोद रहे हैं वो बस काम में बिज़ी रहते हैं. मैं भूल गई थी कि चुदाई भी कुछ होती है.
मैं- भाभी आपके आंसुओं को पोंछने के लिए ये देवर आ गया है.
मैं भाभी की आंसुओं को चाटने लगा.

भाभी मुस्कुरा दीं और मेरे होंठों को किस करके ‘थैंक..’ बोला. फिर भाभी उठ कर दूसरे कमरे में जाने के लिए कहने लगीं तो दर्द के साथ मेरा लंड उनकी चूत से निकला.. जिस पर उनकी चूत का रस लगा हुआ था.

भाभी ने मेरा हाथ पकड़ कर उठाया और मेरा लंड पकड़ कर मुझे बाथरूम में ले गईं. जहां मैंने भाभी की चूत को और भाभी ने मेरे लंड को धोया. हम दोनों लोग नंगे ही एक दूसरे को सहलाते हुए नहाए.

फिर मुझे चाय पीनी थी, तो भाभी से बोला.. तो वे चाय बनाने के लिए जाने लगीं और अपनी साड़ी पहनने लगीं.
मैंने भाभी की साड़ी को पकड़ लिया- भाभी, जब तक भैया नहीं आते आप नंगी ही रहोगी.
भाभी ने मुझे मुस्कुरा कर देखा और पूछा- कोई आ गया तो?
“तो गाउन पहन लेना.. जिसमें सब छिप जाए.. और जब वो चला जाए तो फिर नंगी हो जाना.”

भाभी को अच्छा लगा और उन्होंने मुझे किस किया, फिर नीचे झुक कर मेरा लंड मुँह में भर लिया और एक मिनट लंड चूस कर वो नंगी ही किचन में चाय बनाने चली गईं.

मैं नंगा ही सोफे पर बैठ कर टीवी देख रहा था. फिर भाभी नंगी ही आकर मेरी गोद में बैठ गईं और टीवी देखने लगीं मैं उनकी चूत पर दवा लगाने लगा, जिससे उनको दर्द कम हो जाए.

फिर रात हुई और रात में क्या हुआ ये आपको अगली बार बताऊंगा.. अभी बस इतना ही!
धन्यवाद.
सुमित शुक्ला
shukla2090@gmail.com

Updated: April 5, 2018 — 5:17 pm
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