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बैंक वाली सहकर्मी भाभी की प्यासी चुत

Bank Wali Sahkarmi Bhabhi Ki Pyasi Chut

अन्तर्वासना  पढ़ने वाले सभी को नमस्कार.
मैं अभय जालंधर पंजाब से हूँ. मैं अन्तर्वासना का नियमित पाठक हूँ, मैं दिखने में गोरा और 5’10” गठीला और छरहरा शरीर का हूँ, स्मार्ट और डैशिंग हूँ.

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को अपने बहुत प्यार दिया. मुझे बहुत से मैसेज आये. उस सब के लिए आप सब का तहेदिल से शुक्रिया.

यह कहानी है जब मैं लुधियाना प्राइवेट बैंक में लोन विभाग में जॉब करता था. बैंक में हमारी टीम होती थी. मैंने जब जॉब शुरू की तो मेरी टीम में मेरे साथ एक भाभी थी जिसका नाम महक (बदला हुआ नाम) था.
रंग उसका बिलकुल गोरा था, 36 साइज के टाइट मम्मे थे, जब पहली बार देखा तो देखता ही रह गया. उसकी उम्र करीब 38 साल की थी. पर वो दिखने में 30-32 की लगती थी. मतलब कुल मिला कर वो ऐसा आइटम था कि उसके हुस्न से नजरें ही हटें. उनका फिगर अराउंड 36-30-34 का होगा. प्राइवेट बैंक में लड़कियां कैसी होती है. आप सब जानते ही हो.

लोन विभाग में काम करने वालो को मार्केटिंग के लिए बाहर ही रहना पड़ता है, दूर दूर गांवों में जाना पड़ता है. बैंक ने मुझे बाइक दी थी तो बाइक पर वो मेरे साथ बैठ कर जाती थी.
जहाँ कहीं सड़क ख़राब होती या स्पीड ब्रेकर होता था तो मैं उस पर से निकालता था. तब उसके 36 के बड़े बड़े मम्मे मेरी पीठ में दब जाते थे. मैं बता नहीं सकता कि कितना अच्छा लगता था. उस वक़्त ही मेरा 8 इंच लंड उसके मम्मों के छूने से तन जाता था.

एक दिन सुबह बहुत बारिश हो रही थी और जाना भी ज़रूरी था तो हमने बारिश मैं जाने का फ़ैसला किया. उस दिन तो वो गजब लग रही थी. मैं बता नहीं सकता सिर से लेकर पैरों तक बिल्कुल भीग गयी थी, उसकी ब्रा बिल्कुल साफ़ साफ़ दिख रही थी और मम्मे तो जैसे बाइक पे लग रही झटकों के साथ उछल रहे थे.
और उसकी भरी हुई गांड… जब वो चलती थी थी तो देखने वालों की आँखें खुली रह जाती थी.

आज कहानी लिखते वक़्त भी उसको याद किया तो लंड तन गया है. मैं बहुत कोशिश करता था पर वो ज़्यादा भाव नहीं देती थी. शायद ही कोई ऐसा दिन रहा होगा जब मैंने उसके नाम की मुठ ना मारी हो.

उस दिन भारी बारिश की वजह से वापिस आते वक़्त मेरी बाइक बंद हो गयी. हम दोनों वापिस पैदल आने लगे. तो रास्ते में हम बात करने करने लगे.
उसने मुझसे पूछा- तुम्हारी कोई गर्लफ्रेंड है क्या?
मैंने कहा- नहीं. कोई आपके जैसी मिली नहीं.
तो वो हंस पड़ी. मैं समझ गया कि काम बन सकता है. मैंने उसके बारे में पूछा तो उसने बताया कि वो तलाकशुदा है. हमारे बीच आजतक काम के बारे में ही बात होती थी.

मैंने कहा- आप बहुत खूबसूरत हो.
तो वो मेरी तरफ देखने लगी और बोली- नहीं, तुम ऐसे ही बोल रहे हो.
मैंने कहा- नहीं… कसम से.
और दोस्तो, सच में बहुत गजब थी वो.

फिर हमारी रोज बात होने लगी. अब वो खुल कर बात करने लगी. किस तरह से उसका तलाक़ हुआ. और फिर एक दिन मौका देख कर मैंने उसे प्यार का इज़हार कर दिया. उसने मुझे कोई जवाब नही दिया. मैं डर गया और सोचा कि शायद उसको बुरा लग गया होगा.

लेकिन थोड़ी देर बाद उसका ‘आई लव यू…’ का मेसेज आया. मैंने भी उसको छेड़ना शुरू कर दिया. जब भी मुझे मौका मिलता तो मैं उसको किस कर देता था, उसके मम्में दबा देता था.
धीरे धीरे हम फ़ोन पर सेक्स करने लगे.

फिर हमें मौका मिला, मेरे घर वाले सब शादी पर दूसरे शहर जा रहे थे, मैं घर पर रुक गया, कह दिया कि काम काफी है, छुट्टी नहीं मिल सकती.

मैंने महक घर आने को कहा पर वो मना कर रही थी. पर मेरे बार बार जिद करने पर वो राजी हो गयी.

जैसे ही रात को मेरे घर वाले निकले तो मैं भी महक को लेने निकल पड़ा. क्या बताऊँ मैं कि मुझे कैसा लग रहा था. ऐसे लग रहा था कि आज बरसों की हसरत पूरी हो जाएगी. सारी रात में और वो एक बिस्तर पर…
मैं ऐसे सोचते सोचते उसके घर पहुँच गया तो उसको फ़ोन किया, वो आई… नाईट ड्रेस में बहुत हॉट लग रही थी. मैंने उसको बाइक पे बिठाया और बाइक बहुत तेज चला के अपने घर लाया.

घर आने के बाद मैं उसको देखने लगा तो वो सिल्क की नाइट ड्रेस में बिल्कुल अप्सरा लग रही थी. फिर हमने एक दूसरे को कस के हग किया. आज मैं उसकी तड़प को, उसकी चाहत को महसूस कर रहा था. उसकी चुचियाँ बिल्कुल तन गयी थी. मानो वो इस क़ैद से आज़ाद होना चाहती हो.

और फिर मैंने धीरे से महक के होंठों पे काट दिया, वो बिल्कुल सिहर उठी. फिर मैं धीरे धीरे अपना हाथ उसकी गर्दन पर घुमाने लगा. वो तो जैसे मदहोश हो रही थी. और मुझे और कस के पकड़ रही थी, वो भी मेरा खुल कर पूरा साथ दे रही थी.

मैंने अपनी जीभ उनके मुँह में डाल दी और जीभ का लड़ना शुरू होने लगा. फिर मैं धीरे धीरे उसके होंठों को चूमने लग गया. उसके होंठ जैसे गुलाब की तरह बिल्कुल कोमल और नाज़ुक थे. पर मैंने उसके होंठों पर कोई रहम नही किया… मैं ज़ोर ज़ोर से उसके होंठ चूम रहा था और वो भी ज़ोर ज़ोर से मेरे होंठों को अपने मुख में ले रही थी.

जैसे आप सब जानते हैं कि लड़की के बदन के सबसे कामुक हिस्से कान और गर्दन होती हैं तो मैं उसकी गर्दन और कान को चूमने लगा और हल्का हल्का काटने लगा. वो तो अब प्यासी मछली की तरह तड़पने लगी और ज़ोर से सिसकारियाँ लेने लगी और उसने भी अपना हाथ मेरे लंड पे रख दिया.

मेरा लंड तो पहले से ही पूरा तन चुका था. कुछ ही देर में हम दोनों बहुत गर्म होने लगे और एक दूसरे को पागलों की तरह चूम रहे थे। मेरा एक हाथ उसकी कमर पर था और दूसरे हाथ से उसके बूब्स को दबा रहा था। उसकी साँस बहुत तेज हो गयी थी और वो मेरे हाथ को अपने मम्मों पर दबा रही थी.

मैंने फिर उसकी नाइट ड्रेस उतार दी. गोरे बदन पर वो 36 साइज़ के बूब्स के उपर काले रंग की ब्रा और पेंटी कैसी लग रही होगी… आप सोच सकते हो.

फिर मैंने उसको बिस्तर पे लिटाया और उसकी ब्रा के ऊपर से बूब्ज को चूसने लगा. महक बिल्कुल सहम उठी थी. कई सालों के बाद कोई उसके बदन से इस तरह खेल रहा था.
वो कहने लगी- कभी उसके पति ने भी उसको इस तरह से प्यार नहीं किया.

फिर वो कहने लगीं- तुम भी अपने कपड़े निकाल दो.
मैंने कहा- आप ही निकाल दीजिए.
महक ने मेरे कपड़े उतार दिए और और लंड को देख कर चौंक गयी, कहने लगी- इतना बड़ा लंड, मैंने आज पहली बार देखा है… मेरे पति का तो इससे आधा था और पतला भी.
मैंने कहा- आज तुम्हें जवानी का असली मज़ा दूँगा.

वो कहने लगी- आज तो मेरी चूत की खैर नहीं!
और वो मेरे लंड को अपने हाथों में लेकर खेलने लगी. मुझे भी बहुत मज़ा आ रहा था, मैंने भी एक झटके में उसकी ब्रा खोल दी. ऐसे लगा जैसे किसी ने कबूतरों को आज़ाद कर दिया हो. वो उछल के मेरे सामने आ गये. बड़े बड़े आम जैसे तने हुए गोरे बूब्स और उनके ऊपर से काले रंग के तने निपल्स मानो उन बूब्स को नज़र से बचाने के लिए हो.

मैंने उसी वक़्त उसके बूब्स को मुख में भर लिया और ज़ोर ज़ोर से चूसने लगा. वो भैन की लौड़ी भी मदहोश हो रही थी और मेरे सिर को अपने बूब्स पे दबा रही थी. मैं ऐसे बूब्स चूस रहा था जैसे कोई बच्चा बूब्स चूसता है. और साथ में मैं उसके बूब्स को थोड़ा थोड़ा काटने लगा.

फिर मैं उठकर रसोई से शहद ले आया, वो महक के बूब्स पर फैला दिया और ज़ोर ज़ोर से चूसने लगा. उसकी प्यास को मैं महसूस कर रहा था. फिर उसने शहद की शीशी में मेरा लंड डाला और उसको अपने मुख में लेकर चूसने लगी जैसे कोई बच्चा लालीपोप चूसता है.

मैं जैसे स्वर्ग में था और फिर मैंने वो शीशी महक के बदन पे उड़ेल दी और उसके बदन को बेतहाशा चूमने लगा.
महक ने कहा कि पहली बार इस तरह से किसी ने उसके बदन को चूमा है.

फिर महक के दिमाग़ में एक तरकीब आई, उसने पूछा- आइस क्रीम है क्या?
मैंने कहा- है.
तो बोली- लेकर आओ और मेरे बदन पर आइसक्रीम लगा के खेलो.

मैंने वैसा ही किया, आइसक्रीम लाकर बूब्स पे लगा दी. उसके गरम बदन से ठंडी ठंडी आइस क्रीम चूसने का अलग ही मज़ा था. आइस क्रीम ठंडी थी कि वो बेड की चादर को अपने हाथों से नोचने लगी. फिर मैं उसके बूब्स पर हाथ से मसलने लगा और उसकी उफनती जवानी को और तड़पा रहा था.

भैन की लौड़ी बार बार मुझे चूत दिखा रही थी पर मैं आज उसी जवानी का पूरा मज़ा उठना चाहता था, उसको पूरा तड़पाना चाहता था कि आज की चुदाई उसके लिए एक यादगार चुदाई हो. उसकी चूत बार बार उछल रही थी मानो मुझे बुला रही हो कि ‘मेरी आग बुझा दो.’

फिर जैसे मैंने उसकी चूत मैं हल्की सी उंगली की तो वो बिल्कुल सिहर उठी और मैं उसकी चूत को चाटने लगा.
‘उफ्फ…’ क्या गर्म चूत थी उसकी.

मैं फ्रिज से आइस क्यूब ले आया और वो महक की चूत के छेद में घुसा दिया. वो तो जल बिन मछली की तरह तड़पने लगी थी, उसके मुँह से बस ‘उम्म्ह… अहह… हय… याह… आअहह ऊओह प्लीज़ मज़ा आ रहा है… और करो…’ किए जा रही थी.

वो बिल्कुल गर्म हो गयी और भैन की लौड़ी अपनी चूत को मेरे चेहरे पर ज़ोर ज़ोर से दबाने लगी और कहने लगी- खा जाओ इसे भोसड़ी के. पूरी चूत खा जाओ. आज से मैं सिर्फ़ तुम्हारी गुलाम हूँ. आज इस चूत की आग बुझा दो. चूस साले मेरी चुत… आह कितना मजा आ रहा है, साले तू इस वक्त मेरा चोदू है… भोसड़ी के… तू कुछ भी बोल पर मेरी चुत को जरा जोर से चाट… आह… मजा आ रहा है…
मैंने कहा- साली मादरचोदी… ले अब तू मेरा कमाल देख भैन की लौड़ी…
वो बोली- हां दिखा मादरचोद क्या दिखाएगा…

उसकी चूत की खुशबू किसी कुँवारी लड़की की चूत की तरह थी.

अब वो कहने लगी- अब सब्र नहीं होता… डाल दे मादरचोद डाल अपना लंड मेरी चूत में… मिटा मेरी प्यास.

और फिर मैंने अपने लंड का सुपारा उसकी चूत के मुख पे रख दिया. उसने भी अपनी टाँगें खोल कर मेरे लंड का स्वागत किया और मैंने अपने लंड का सुपारा उसकी चूत के मुंह पर रख दिया और झटका मारा.
जैसे ही सुपारा अंदर गया, उसने मुझे रुकने का इशारा किया तो मैं भी रुक गया. उसे दर्द होने लगा था, इतने सालों के बाद कोई उसके चूत के छेद को भेद रहा था.

थोड़ी देर बाद मैंने एक जोरदार झटका मारा तो साली चीखने लगी, उसने कस कर चादर को पकड़ लिया, बोली- बाहर निकाल इसे मादरचोद हरामी फाड़ दी मेरी चूत मादरचोद… हरामी बाहर निकाल…
पर मैं कहाँ सुनने वाला था… मैंने झटके मारने बंद नहीं किये. उसकी आँखों में आँसू आ गये, वो ज़ोर ज़ोर से चीखने लगी तो मैंने अपने होंठों को उसके होंठों पे रख दिया. साली होंठों को बहुत बुरी तरह काट रही थी.
उसके मुँह से गालियाँ सुनकर मुझे और जोश आ गया, मुझे तो ऐसे लग रहा था जैसे मैं स्वर्ग में हूँ, मैं अपना लंड आगे पीछे कर रहा था.

फिर उसे भी मज़ा आने लगा और वो बोलने लगी- मेरे रज्जा कहां थे तुम अभी तक… ऐसा कामसुख तुमने मुझे पहले क्यों नहीं दिया… प्लीज़ फक मी हार्ड… उऊहह यसस्स्स… यस… फक्क फक…
वो बड़बड़ाये जा रही थी.

मैंने अब अपनी स्पीड बढ़ा ली थी. उसके चूचे तो झूला झूल रहे थे.

वो बके जा रही थी- आआआहह यस्स… प्लीज़ फक मी फक्क मी… और अन्दर तक डालो… चोद चोद कर जान निकाल दो मेरी… भोसड़ा बना दो मेरी इस चूत का… रंडी बना ले मुझे अपनी… हरामी, आज से मैं रखैल हूँ तेरी बहनचोद!

उसको चोदते हुए बहुत देर हो गई थी, पर मेरा पानी निकल ही नहीं रहा था. उधर महक का तीन बार रस निकल चुका था. वो काफी थक चुकी थी और मैं झड़ने का नाम ही नहीं ले रहा था.
वो बोली- बस अब और नहीं कर सकती. अब मुझे छोड़ दो!
मैंने कहा- यार, अभी मेरा तो माल निकला ही नहीं… तो कैसे छोड़ दूँ?
पर उसे तकलीफ हो रही थी, उसकी हालत देख कर मैंने अपना लंड बाहर निकाल लिया और उसके बाजू में लेट गया.
उसे लगा कि मैं अधूरा रहा गया हूँ तो वो मुझे खुश करने के लिए मेरा लंड चूसने लगी.

तभी मैंने ज़ोरदार पिचकारी मारी, मेरा पूरा रस उसके मुँह पर फैल गया था और वो उसे चाट रही थी. उसने मेरा लंड चाट के साफ किया.

थोड़ी देर बाद हम उठे और साथ में नहाने गए, फिर हम दोनों साथ में नंगे ही लिपट कर सो गए.
सुबह उठने के बाद देखा कि उसकी चूत सूज गई है, उससे चला भी नहीं जा रहा.
मैंने उसको उसके घर छोड़ दिया.

अगले दिन मैंने महक को चोदने की खुशी में तीन बार मुठ मारी. मुझे मुठ मारते समय याद आया कि महक से मिलने के एक दिन पहले भी मैंने उसको चोदने के सपने के साथ दो बार मुठ मारी थी, शायद इसी लिए मुझे झड़ने में ज्यादा देर लग रही थी.

मैंने महक से बात करने की सोची. मैं उसको फोन करने ही वाला था कि महक का खुद फोन आ गया, वो मुझसे चुदने के लिए कहने लगी.

दोस्तो, आपको मेरी जिंदगी की सेक्स की कहानी कैसी लगी, आपको कैसी लगी जरूर बताये. अगर कहानी लिखने मैं कोई गलती गयी हो ता माफ़ करना. आपकी ईमेल का इंतज़ार रहेगा.
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