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बहन की चूत चोद कर बना बहनचोद -18

Bahan Ki Chut Chod Kar Bana Bahanchod-18

अब तक आपने मेरी पिछली कहानी मे  बहन की चूत चोद कर बना बहनचोद -17  पढ़ा…
अब वो मेरे लंड को सहला रही थी कि तभी वो नीचे बैठ गई और और मेरे लंड को चूसना शुरू कर दिया।
उसके लंड चूसने के तरीके से मैं समझ गया कि सोनाली ने इसके बारे में कुछ गलत नहीं बताया था.. ये ज़रूर अच्छे ख़ासे लंड खा चुकी होगी। कभी लंड के नीचे पड़े दो गोलों को चूसती.. तो कभी पूरा लंड अन्दर गटक जाती थी।
अब आगे..

मुझे भी अच्छा लग रहा था और तब तक चूसती रही.. जब तक मैं झड़ नहीं गया। वो मेरे लंड का सारा रस पी गई और मेरे लंड को एकदम साफ़ कर दिया।
अब मैंने भी उसकी चूत को चाटा.. जब वो भी डिसचार्ज हुई.. तब ही मुझसे अलग हुई और बिस्तर पर लेट गई।

मैं उसकी चूचियों के ऊपर हाथ घुमाने लगा और दबाने लगा और फिर कंट्रोल नहीं हुआ तो मैंने अपना मुँह ही लगा दिया और टॉप के ऊपर से ही उसके रसीले आमों को चूसने लगा।
कुछ देर चूसने के बाद हाथ टॉप में डाल दिया और नंगे पेट को सहलाने लगा। फिर कुछ देर में उसके टॉप को निकाल ही दिया.. अब वो सिर्फ़ ब्रा में थी।
ब्रा भी इतनी सेक्सी लग रही थी कि मैं बता नहीं सकता। काली ब्रा में बंद उसकी चूचियाँ.. मानो मुझे बुला रही थीं कि आओ.. और मुझे चूसो.. आज़ाद करो.. मुझे इस काली ब्रा के बंधन से..

मैं कैसे नहीं सुनता चूचियों की उस पुकार को.. सो मैं सीधा उस पर टूट पड़ा और बहुत जल्दी ही उनको आज़ाद कर दिया और ब्रा को खोल दिया। जैसे ही ब्रा खुली.. उसकी चूचियों उछल कर बाहर आ गईं.. जैसे बहुत देर से आज़ादी का इंतजार करने के बाद आज़ादी मिली हो।
अब मैं उन रस भरी चूचियों को चूसने लगा और दूसरे को हाथ से दबाने लगा। कुछ देर ऐसा करने के बाद मैंने अपनी शर्ट भी उतार दी और मैं भी पूरा नंगा हो गया।

मेरे शर्ट उतारते ही सुहाना मेरे मर्दाना बदन को भी चूमने लगी।
कुछ देर एक-दूसरे को चूसने के बाद मैंने उसको बिस्तर पर लिटा दिया और उसके पैरों के बीच चला गया। अब मैं उसकी चूत के ऊपर अपना लंड घुमाने लगा..
तो वो बोली- जल्दी डालो ना अन्दर..

तो मैंने एक झटके में पूरा लंड डाल दिया और पूरा का पूरा लंड उसकी चूत में घुसता चला गया…
वो कराह उठी।
लेकिन जल्दी ही नॉर्मल हो गई और मैं झटके मारने लगा और उसके मुँह से आअहह फक मी.. फक मी फास्ट.. निकलने लगा।
मेरे झटकों की आवाज़ और उसके मुँह से निकल रही मादक आवाज़ पूरे कमरे में फैल रही थी।

फिर कुछ देर ऐसा ही चलता रहा और कुछ देर बाद हम दोनों फारिग होने वाले थे.. तो लंड को बाहर निकाल कर मैंने उसके मुँह पर सारा रस छोड़ दिया।
कुछ देर बाद हम दोनों ने फिर चुदाई की.. कुछ पोज़ मैं जानता था.. कुछ उसने बताए और हम दोनों 3 बार डिसचार्ज होने के बाद एक साथ बिस्तर पर ही लेट गए।

मैं- कहाँ से सीखा इतना अच्छा लंड चूसना और इतने सारे पोज़.. लगता है अच्छा-ख़ासा अनुभव है लंड चूसने का?
सुहाना- हाँ अब आप से क्या छुपाना.. वैसे आप भी कम नहीं हैं।
मैं- हाँ वो तो हूँ ही.. वैसे कितने लंड खाए हैं अब तक.. तेरी चूत बता रही है कि रेग्युलर लंड खाती हो।
सुहाना- हा हा हा.. ज्यादा नहीं, 5 ही खाए हैं।

मैं- क्या.. अभी 12वीं खत्म ही हुई है.. और 5 लंड खा चुकी हो.. वाउ कमाल की हो..
सुहाना- आप भी कम नहीं हैं.. मैंने भी आपकी करतूत आपके लैपटॉप में देख ली है।
मैं- हा हा हा.. वैसे कौन थे वो 5 लण्ड?
सुहाना- थे… अपने ही लोग थे..

मैं- कौन थे.. बताओ तो सही.. ज़रा मैं भी तो जानूँ.. तुम्हारी चूत का मजा लेने वाले ख़ुसनसीब कौन-कौन हैं?

सुहाना- ओके.. बताती हूँ.. पहली बार चुदाई सर से हुई.. जो टियूशन पढ़ाने आते थे..
मैं- वाउ.. कहाँ चोदता था तुमको..?
सुहाना- पहली बार तो घर में ही चोदा था.. फिर बाहर अपने घर पर पेला था।

मैं- उसके बाद?
सुहाना- पड़ोस में रहता है वो? उसने भी घर में ही चोदा था।
मैं- ओके..

सुहाना- उसके बाद 2 ब्वॉय-फ्रेण्ड और ये होटल और फ्रेंड के घर पर चोदा..
मैं- और एक और कौन?
सुहाना- आप का ही दोस्त मोहित
मैं- क्या मोहित?
सुहाना- हाँ..

मैं- ये कब हुआ.. मतलब कब से?
सुहाना- एक साल से और मुझे सबसे ज्यादा भी इसी ने चोदा है।
मैं- अब पता चला.. क्यों साले का घर नज़दीक होने के बाद भी तुम्हारे घर में किराए पर रहता था।
सुहाना- हा हा.. हा हा..
मैं- मैं कौन सा बुरा था यार.. मुझे भी दे देती।
सुहाना- मैं तो आपको लाइन देती ही थी.. आप ही ध्यान नहीं देते थे।

मैं- हो सकता है तुमको बच्ची समझ रहा होऊँ।
सुहाना- और अब?
मैं- अब तो तुम पटाखा.. चुदक्कड़ आइटम हो..
सुहाना- हाहहहह हाहा.. आपने भी तो बहुत को चोदा है।
मैं- वो तो तुम देख ही चुकी हो लैपटॉप में।
सुहाना- तब तो इसमें मेरा भी आ जाएगा..
मैं- हाँ वो देखो सामने कैमरा लगा है।

सुहाना- और इसे तो आपके दोस्त भी देखते होंगे।
मैं- नहीं.. लेकिन कुछ तो देखते ही हैं।
सुहाना- मेरा भाई भी.. उसे मत दिखाना.. नहीं तो क्या सोचेगा मेरे बारे में।
मैं- ओके रूको.. तुमको कुछ और दिखाता हूँ।

मैंने उसको सोनिया की फ़ोटो दिखा दी।
सुहाना- ये तो दीदी हैं.. मतलब आपने?
मैं- हाँ जो तुम बोलना चाह रही हो… वो सही है.. और उसको सोनिया का पूरा वीडियो दिखा दिया।
सुहाना- तुम बहुत कमीने हो?
मैं- वो तो हूँ ही.. आओ एक बार और करते हैं.. तुम्हारी गाण्ड किसी ने नहीं मारी है ना.. आज मैं ये कमी भी पूरी कर देता हूँ।
सुहाना- हाँ.. मजा आएगा..

मैं उसके चूतड़ों को मसलने लगा.. फिर गलिसरीन आयल ला कर उसके पूरे चूतड़ों में लगा दिया और थोड़ा तेल उसकी गाण्ड के छेद में भी डाल दिया। फिर मैं उंगली अन्दर डालने लगा.. कुछ देर उंगली डालने के बाद उसकी गाण्ड के छेद पर अपने लंड को रख दिया और डालना चाहा.. लेकिन जा नहीं पा रहा था।

तो मैंने अपने लंड पर भी तेल लगाया उसके बाद एक झटका मारा और पूरा लंड अन्दर चला गया.. लेकिन वो चिल्लाने लगी- निकाल दो यार.. बहुत दर्द हो रहा है..
वो तड़फने लगी.. तो मैं उसकी चूत में उंगली करने लगा। कुछ देर बाद वो नॉर्मल हुई.. तो मैं फिर से झटके मारने लगा। अब उसको भी मजा आने लगा.. दम भर चोदने के बाद मैं डिसचार्ज हो गया और उसकी गाण्ड में रस छोड़ दिया।
फिर हम दोनों ने खुद को साफ़ किया।

सुहाना- आपने तो मेरे टॉप को गंदा कर दिया है.. अब मैं क्या पहन कर जाऊँगी।
मैं- अभी साफ़ कर दो और रात भर यहीं रुक जाओ.. जब सूख जाएगा तब चली जाना।
सुहाना- तब तक पहनूँगी क्या?
मैं- मेरी जान, यहाँ पर कपड़े कोई नहीं पहनता।
सुहाना- ठीक है।

रात भर सुहाना मेरे घर पर ही रही.. सुबह जब कपड़े सूख गए.. तब वापस जाने लगी।
मैं- जा रही हो जान.. फिर आती रहना..
सुहाना- मैं तो अपना सामान लेकर यहीं आ जाती हूँ.. कॉलेज खुलने तक यही रहूंगी।
मैं- वाउ.. तब तो मेरे मजे हैं.. जाओ जल्दी ही आना।
सुहाना- ओके बाय..

उसके जाते ही मैंने सूर्या को फोन किया।
मैं- कैसे हो.. इधर काम हो गया है..
सूर्या- क्या बात कर रहे हो.. सच्ची?
मैं- हाँ अभी तो यहाँ से गई है.. तुम कहाँ हो?
सूर्या- भोपाल में ही।
मैं- क्या?

सूर्या- हाँ सोनाली के साथ ही एक होटल में रुका हुआ हूँ।
मैं- साले तुम भी कमीने हो गए हो..
सूर्या- तुम से ही सीखा भाई.. तुमने तो..
मैं- लेकिन तुम्हारी बहन कुँवारी नहीं थी.. 5 लंड खा चुकी थी।
सूर्या- क्या?

मैं- हाँ उसकी चूत तो पहले से फटी थी गाण्ड मैंने फाड़ दी।
सूर्या- इतने लंड खा चुकी है.. तब तो मेरा लंड भी ले ही लेगी..
मैं- हाँ आ जा दिल्ली.. उसकी चूत भी तुमको भी दिलवाता हूँ..
सूर्या- ठीक है आता हूँ.. कुछ दिन में अभी सोनाली को चोदने दो.. यहीं मन लग रहा है।
मैं- ठीक है… एंजाय कर..

उस दिन के बाद सुहाना मेरे पास हमेशा आती और चुद कर जाती थी।
एक बार सूर्या के साथ भी उसको चोदा मतलब सिर्फ़ मैं ही नहीं.. सूर्या भी अपनी दोनों बहन को छोड़ बहनचोद बन गया था।

आपको मेरी कहानी कैसी लगी.. और अगर आपके कुछ सवाल हों तो आप मुझे मेल कर सकते हैं।
shusantchandan@gmail.com

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