Home / गुरु घण्टाल / आंटी गुलबदन और सेक्स (प्रेम) के सात सबक-3

आंटी गुलबदन और सेक्स (प्रेम) के सात सबक-3

Aunty Gulbadan Aur Sex (Prem) Ke Sath Sabak- Part 3

प्रेम गुरु की कलम से

आपने मेरी कहानी पढ़ी -: आंटी गुलबदन और सेक्स (प्रेम) के सात सबक-2

5. प्रेम अंगों को चूमना और चूसना

आंटी ने पहले ही बता दिया था कि प्रेम (सेक्स) में कुछ भी गन्दा नहीं होता। मानव शरीर के सारे अंग जब परमात्मा ने ही बनाए हैं तो इनमें कोई गन्दा कैसे हो सकता है। मेरे प्यारे पाठको और पाठिकाओं, अब मुनिया और मिट्ठू (लंड और चूत) की चुसाई का सबक सीखना था। मेरी बहुत सी पाठिकाएं तो शायद नाक-भोंह सिकोड़ रही होंगी। छी … छी … गंदे बच्चे…. पर मेरा दावा है कि इस सबक को मेरे साथ पढ़ लेने के बाद आप जरूर इसे आजमाना चाहेंगी।

हर बच्चे की एक जन्मजात आदत होती है जो चीज उसे अच्छी और प्यारी लगती है उसे मुंह में ले लेता है। फिर इन काम अंगों को मुंह में लेना कौन सी बड़ी बात है। यह तो नैसर्गिक क्रिया है। आंटी ने तो बताया था कि वीर्य पीने से आँखों की ज्योति बढ़ती है। इसका एक प्रत्यक्ष प्रमाण तो यही है कि अपने किसी वैश्या (गणिका) को चश्मा लगाये नहीं देखा होगा। शास्त्रों में तो इसे अमृत तुल्य कहा गया है। वैज्ञानिक दृष्टि से भी देखा जाए तो वीर्य और कामरस में कई धातुएं और विटामिन्स होते हैं तो फिर ऐसी चीज को भला व्यर्थ क्यों जाने दें। अगर शुरू शुरू में लंड चूसने में थोड़ी ग्लानि सी महसूस हो या अच्छा ना लगे तो लंड और चूत पर पर शहद या आइसक्रीम लगा कर चूसना चाहिए। ऐसा करने से इनका रंग भी काला नहीं पड़ता। उरोजों पर शहद लगा कर चूसने से उनका आकार सुडौल बनता है। यह ऐसा ही है जैसे गांड मरवाने से नितम्ब चौड़े और सुडौल बनते हैं।

ज्यादातर महिलायें मुख मैथुन पसंद करती हैं। इन में गुप्तांग भी शामिल हैं पर स्त्री सुलभ लज्जा के कारण वो पहल नहीं करती। वो इस कृत्य को बहुत ही अन्तरंग और आत्मीय नज़रिए से देखती हैं। इसलिए पूर्ण प्रेम के दौरान इसका बहुत महत्व है। प्रेमी को यह जानने की कोशिश करते रहना चाहिए कि उसकी प्रेमिका को कौन सा अंग चुसवाने में अधिक आनंद मिलता है।

आंटी ने बताया था कि गुप्तांगों की चुसाई करते समय इनकी सफाई और स्वछता का ध्यान रखना बहुत जरुरी है। झांट अच्छी तरह कटे हों और डिटोल और साबुन से इन्हें अच्छी तरह धो लिया गया हो। मेरे तो खैर रोयें ही थे मैंने पहली बार अपने झांट तरीके से काटे थे। आज हमें नाईट शिफ्ट में काम करना था। घर पर बता दिया था कि मैं 3-4 दिन रात में आंटी के पास ही पढ़ाई करूंगा। परीक्षा सिर पर है और सबक (पाठ) बहुत मुश्किल हैं। घरवाले बेचारे मेरी इस पढ़ाई के बारे में क्या जानते थे ?

रात के कोई 10 बजे होंगे। मैं और आंटी दोनों नंग धडंग पलंग पर लेटे थे। हमने अपने गुप्तांगो को अच्छे से धो लिया था। और हलका सा सरसों का तेल भी लगा लिया था। मेरे सुपाड़े पर आंटी ने शहद लगा दिया था और अपनी चूत पर थोड़ी सी आइसक्रीम। वैसे मुझे आइसक्रीम की कोई जरुरत नहीं थी। आप समझ ही रहे होंगे। आंटी की चूत का जलवा तो आज देखने लायक था। बिलकुल क्लीन शेव। जो चूत कल तक काली सी लग रही थी आज तो चार चाँद लग रही थी। बिलकुल गोरी चिट्टी गुलाबी। ऐसे लग रहा था जैसे किसी ने मोटे अक्षरों में अंग्रेजी का डब्लू (w) लिख दिया हो। उसके होंठ जरूर थोड़े श्यामल रंग के लग रहे थे पर इस जन्नत के दरवाजे के रंग से मुझे क्या लेना देना था। स्वाद तो एक जैसा ही मिलेगा फिर रंग काला हो या गोरा क्या फर्क पड़ता है।

आंटी ने बताया लिंग या योनि को चूसने के कई आसन और तरीके होते हैं पर अगर लिंग और योनि दोनों की एक साथ चुसाई करनी हो तो 69 की पोजिशन ही ठीक रहती है। यह 69 पोजिशन भी दो तरह की होती है। एक तो आमने सामने करवट के बल लेट कर और दूसरी प्रेमी नीचे और प्रेमिका उसके मुंह पर अपनी योनि लगा कर अपना मुंह उसके पैरों की ओर लिंग के ठीक सामने कर लेती है। इस आसन में दोनों को दुगना मज़ा आता है। अरे भाई प्रेमिका की महारानी (गांड) भी तो ठीक उसकी आँखों के सामने होती है ना ? उसके खुलते बंद होते छेद का दृश्य तो जानमारू होता ही है कभी कभार उसमें भी अगर अंगुली कर दी जाए तो मज़ा दुगना क्या तिगुना हो जाता है।

आइये अब चूत का प्रथम चुम्बन लेते हैं। आंटी ने मुझे चित्त लेट जाने को कहा। आंटी ने बड़ी अदा से अपने दोनों घुटने मेरे सिर के दोनों ओर कर दिए और अपना मुंह मेरे लंड के ठीक ऊपर कर लिया। मैंने उनकी मोटी मोटी संगेमरमर जैसी कसी हुई जाँघों को कस कर पकड़ लिया। चूत कोई 2″ ही तो दूर रह गई थी मेरे होंठों से। आंटी ने बताया था कि कोई जल्दी नहीं। मैंने होले से अपनी जीभ की टिप उसकी फांकों पर रख दी। आंटी की तो एक सीत्कार क्या हलकी चीख ही निकल गई। किसी मर्द की जीभ का दो साल के बाद उनकी चूत पर यह पहला स्पर्श था। मैंने नीचे से ऊपर अपनी जीभ फिराई गांड के सुनहरे छेद तक और फिर ऊपर से नीचे तक।

मेरा मिट्ठू तो किसी चाबी वाले खिलौने की तरह उछल रहा था। उसने तो प्री-कम के टुपके छोड़ने शुरू कर दिए थे। आंटी ने पहले मेरे लंड को अपने हाथ से पकड़ा और फिर अदा से अपने सिर के बालों को एक झटका दिया। बाल एक ओर हो गए तो उन्होंने सुपाड़े पर आये प्री-कम पर अपनी जीभ टिकाई। शहद और कम दोनों को उन्होंने चाट लिया। फिर अपनी जीभ सुपाड़े पर फिराई। ठीक मेरे वाले अंदाज़ में लंड के ऊपर से नीचे तक। फिर जब उन्होंने मेरे अन्डकोषों को चाटा तो मैंने भी उनकी गांड के सुनहरे छेद पर अपनी जीभ की नोक लगा दी। गांड का छेद तो कभी खुल रहा था कभी बंद हो रहा था। वो तो जैसे मुझे ललचा ही रहा था। मैंने थूक से उसे तर कर दिया था। मैंने अपनी एक अंगुली उसमें डालने की कोशिश की पर वो मुझे असुविधाजनक लगा तो मैंने अपने अंगूठे पर थूक लगा कर गच्च से आंटी की गांड के छेद में डाल दिया।

ऊईइ माँ….. कहते हुए आंटी ने मेरे दोनों अन्डकोशों को अपने मुंह में भर लिया। थे भी कितने बड़े जैसे दो लिच्चियाँ हों। आईला….. इस परम आनंद को तो मैं मरते दम तक नहीं भूल पाऊंगा। फिर उन्होंने उन गोलियों को मुंह के अन्दर ही गोल गोल घुमाना शुरू कर दिया। मेरे लंड का बुरा हाल था। बेचारा मुर्गे की गर्दन की तरह आंटी के बिल्ली जैसे पंजों में दबा था। अब आंटी ने उसका सुपाड़ा अपने होंठों में लेकर दबाया। एक बार दांत गड़ाए जैसे मुझे इशारा कर रही हो कि तुम भी ऐसा ही करो।

मैं भला क्यों चूकता। मैंने उनकी दोनों फांकों को (छोटी छोटी सोने की बालियों समेत) गप्प से अपने मुंह में भर कर एक जोर की चुस्की लगाई। आंटी तो ऐसे जोर लगा रही थी जैसे पूरी चूत ही मेरे मुंह में घुसा देना चाहती हो। आंटी का सारा शरीर ही रोमांच से कांपने लगा था। मैंने होले से जब अपने दांत उनकी फांकों में गड़ाए तो उनकी एक किलकारी ही निकल गई और उसके साथ ही उनकी चूत से नमकीन और लिजलिजा सा रस मेरे मुंह में भर गया। आइसक्रीम में मिला उनका खट्टा, मीठा और कसैला सा कामरस मैं तो चाटता ही चला गया। आह.. क्या मादक गंध और स्वाद था मैं तो निहाल ही हो गया।

आंटी ने मेरे लंड को मुंह में भर लिया और लोलीपोप की तरह चूसने लगी। मैंने अपनी जीभ से उनकी चूत की फांकों को चौड़ा किया और उनकी मदनमणि को टटोला। जैसे कोई मोटा सा अनार या किशमिश का फूला हुआ सा दाना हो। मैंने उस पर पहले तो जीभ फिराई बाद में उसे दांतों से दबा दिया। आंटी की हालत तो पहले से ही ख़राब थी। उन्होंने कहा “ओह चंदू…. जोर से चूसो… ओह… मैं तो गई। ऊईई… माँ ……………”

और उसके साथ ही उनकी चूत फिर गीली हो गई। मेरी तो जैसे लाटरी ही लग गई। उस अमृत को भला मैं व्यर्थ कैसे जाने देता। मैं तो चटखारे लेता हुआ उसे चाटता ही चला गया। आंटी धम्म से एक ओर लुढ़क गई। उनकी आँखें बंद थी और साँसें जोर जोर से चल रही थी। मैं हक्का बक्का उन्हें देखता ही रह गया। पता नहीं ये क्या हो गया।

कोई 3-4 मिनट के बाद आंटी ने आँखें खोली और मुझे से लिपट गई। मेरे होंठों पर तड़ातड़ 4-5 चुम्बन ले लिये “ओह मेरे चंदू ! मेरे प्रेम ! मेरे राजा ! तुमने तो कमाल ही कर दिया। आज मैं तो तृप्त ही हो गई। उन्ह… पुच …” एक और चुम्मा लेकर वो फिर मेरे मुंह के ऊपर अपनी चूत लगा कर बैठ गई। उन्होंने अपनी चूत की दोनों फांकों पर लगी सोने की बालियों को दोनों हाथों से चौड़ा किया और अपनी चूत मेरे होंठों पर रख दी। मैं तो इस नए अनूठे अनुभव से जैसे निहाल ही हो गया। चूत के अन्दर से आती पसीने, पेशाब और जवानी की खुशबू से मैं तो सराबोर ही हो गया। मैंने अपनी जीभ को नुकीला किया और गच्च से उनकी चूत के छेद में डाल दिया और अन्दर बाहर करने लगा। आंटी तो सीत्कार पर सीत्कार किये जा रही थी और अपने नितम्ब उछाल उछाल कर जोर जोर से बड़बड़ा रही थी,”हाई … जानू ऐसे ही चूसो … या…. ओह …. और जोर से और जोर से …”

कोई 4-5 मिनट तक मैं तो मजे ले ले कर उनकी चूत को चूसता ही रहा। बीच बीच में उनके नितम्बों को सहलाता कभी उनकी गांड के छेद पर अंगुली फिराता। अब आंटी कितना ठहरती। एक बार फिर उनको चरमोत्कर्ष हुआ और फिर वो एक ओर लुढ़क गई।

थोड़ी देर वो आँखें बंद किये लेटी रही और फिर मेरे पैरो के बीच में आ गई। पहले तो मैं कुछ समझा नहीं बाद में मुझे होश आया कि अब आंटी नई अदा से मेरा लंड चूसेगी। मैं चित्त लेटा था। आंटी के खुले बाल मेरे पेट और जाँघों पर गुदगुदी कर रहे थे। पर आंटी इन सब बातों से बे परवाह मेरे लंड को गप्प से पूरा अन्दर लेकर चूसने लगी। मैंने सुना था कि ज्यादातर औरतें लंड को पूरा अपने मुंह में नहीं लेती पर आंटी तो उसे जड़ तक अन्दर ले रही थी। पता नहीं उसने कहाँ से इसका अभ्यास किया था। कभी वो मेरे लंड को पूरा बाहर निकाल देती और उस पर जीभ फिराती कभी पूरा मुंह में ले लेती। कभी वो सुपाड़े को दांतों से दबाती और फिर उसे चूसने लगती। कभी मेरे लंड को अपने मुंह से बाहर निकाल कर मेरे अन्डकोशों को अपने मुंह में ले लेती और उन्हें चूम लेती और फिर दोनों अण्डों को पूरा मुंह में लेकर चूसने लगती। साथ में मेरे लंड पर हाथ ऊपर नीचे फिराती। मेरे आनंद का पारावार ही नहीं था।

पता नहीं इस चूसा चुसाई में कितना समय बीत गया। हाल में लगी घड़ी ने जब 11 बार टन्न टन्न किया तब हमें ध्यान आया कि हमें पूरा एक घंटा हो गया है। मैं भला कितनी देर ठहरता। मैंने आंटी को कहा कि मैं अब जाने वाला हूँ तो वो एक ओर हट गई। मैं कुछ समझा नहीं। मुझे लगा वो मेरा जूस नहीं पीना चाहती। पर मेरा अंदाज़ा गलत था। वो झट से चित लेट गई और मेरे लंड को अपने मुंह की ओर खींचने लगी। मैं उकडू होकर उनके मुंह के ऊपर आ गया। मेरे नितम्ब अब उनकी छाती पर थे और उनके नाजुक उरोजों को दबा रहे थे। मैंने आंटी के बालों को पकड़ लिया और और उसके सिर को दबाते हुए अपना लंड उसके मुंह में ठेलने की कोशिश करने लगा। मेरा लंड उसके गले तक जा पंहुचा था। आंटी को शायद सांस लेने में तकलीफ हो रही थी मगर फिर भी उसने मेरे लंड को अपने मुंह में समायोजित कर कर लिया और खूब जोर जोर से मेरे आधे से अधिक लंड को अपने मुंह में भर कर मेरे अन्डकोशों की गोलियों के साथ खेलते हुए चूसने लगी। वो कभी उन्हें सहलाती और कभी जोर से भींच देती। मेरी सीत्कार निकलने लगी थी। “ऊईइ … मेरी जा… आ… न… मेरी चान्दनी…. ईईइ…. और जोर से चूसो और जोर से ओईइ …… या आ …… ” और उसे साथ ही मेरे मिट्ठू ने भी पिछले एक घंटे से उबलते लावे को आंटी के मुंह में डालना शुरू कर दिया। आंटी ने मेरे अण्डों को छोड़ कर मेरे नितम्ब ऐसे भींच लिए कि अगर मैं जरा सा भी इधर उधर हिला तो कहीं एक दो बूँद नीचे ना गिर जाएँ। आंटी तो पूरी गुरु थी। पूरा का पूरा जूस गटागट पी गई।

फिर लाईट बंद करके एक दूसरे को बाहों में जकड़ कर हम दोनों सो गए। पता नहीं चला कब नींद के आगोश में चले गए।

आपका प्रेम गुरु

Check Also

मेरे टीचर ने की मेरी पहली चुदाई-2

Mere Teacher Ne Ki Meri Pahli Chudai- Part 2 मेरी चुदाई कहानी के पहले भाग …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *